
Panni Lal Chowk case in satna
सतना। पन्नीलाल चौक स्थित घंटाघर को मंगलवार को धराशायी कर दिया गया। निगम के अतिक्रमण दस्ते को ३२ साल पुरानी इस पहचान को जमींदोज करने में महज तीन घंटे का वक्त लगा। नगर निगम ने इसे जर्जर घोषित किया था। इसके चलते यह कदम उठाया गया। इससे पहले गत २३ मई को एमआईसी में भी गिराने संबंधी प्रस्ताव पास किया गया था। घंटाघर को गिराए जाने को लेकर आम जनमानस में आक्रोश भी देखने को मिला।
क्योंकि यह शहर की विरासत के रूप में शुमार था। जब एमआईसी में प्रस्ताव पास हुआ तो कई संगठनों ने विरोध भी जताया था। उल्लेखनीय है, निगामयुक्त ने एमआईसी के प्रस्ताव के मद्देनजर आदेश जारी किया था। मंगलवार अल सुबह ही निगम अमला मौके पर पहुंच गया था।
कर्मचारियों ने पहले पिलर के कंक्रीट को हटाया
सुबह सात बजे से घंटाघर को गिराने का काम शुरू हुआ। कर्मचारियों ने पहले पिलर के कंक्रीट को हटाया। जब पिलर कमजोर हो गए तो स्वयं ही पूरा स्ट्रक्चर एक तरफ झुकते हुए गिर गया। सुबह १० बजे तक निगम ने अपना काम कर लिया। इसके बाद दो जेसीबी व क्रेन के माध्यम से मलबा हटाया गया।
पीपल का पेड़ गिरने से हुआ था जर्जर
गत वर्ष बरसात के समय शिवमंदिर के पीपल पेड़ का एक हिस्सा घंटाघर पर गिर गया था। इससे वह जर्जर हो गया था। निगम ने एक दिन के लिए रास्ता बंद कर पीपल के पेड़ के हिस्से को हटवाया था। हालांकि इस घटना में घंटाघर का ऊपरी हिस्सा ही प्रभावित हुआ था। उसके बावजूद निगम ने इसे जर्जर घोषित किया और गिरा दिया।
अब युकां ने जताया विरोध
घंटाघर गिराने के बाद राजनीति भी शुरू हो गई। अतिक्रमण दस्ते की कार्रवाई के बाद युकां ने आक्रोश व्यक्त किया है। देंवेंद्र तिवारी के नेतृत्व में कलेक्टर को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। इसमें घंटाघर को विरासत बताया गया। साथ ही कहा गया कि ये पहचान थी, जर्जर नहीं था। उसके बावजूद कुछ लोगों को लाभ देने के लिए निगम ने मनमानी पूर्ण कार्रवाई की है। सवाल उठता है कि जब कार्रवाई हो रही थी तब न तो जनप्रतिनिधि आगे आए और न ही अन्य समाजसेवी संस्थाएं?
४ माह पूर्व गिराने का प्रस्ताव
व्यापारियों की मांग पर निगमायुक्त ने इंजीनियरों की 3 सदस्यीय जांच टीम गठित कर घंटाघर का सर्वे कराया था। जांच टीम ने अपने सर्वे रिपोर्ट में घंटाघर को जर्जर बताते हुए लोगों को लिए खतरा बताया था। इंजीनियरों की रिपार्ट के आधार पर निगम प्रशासन ने घंटाघर को जर्जर घोषित करते हुए प्रस्ताव मेयर इन काउंसिल की बैठक में रखा।
23 मई को एमआईसी की बैठक में चर्चा
महापौर ममता पांडेय की अध्यक्षता में २३ मई २०१७ को संपन्न एमआईसी की बैठक में चर्चा के बाद गिराने को हरी झंडी दे दी गई थी। एमआईसी में पास प्रस्ताव को आधार मानते हुए निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने ५ सितंबर २०१७ को इसे गिराने के निर्देश अतिक्रमण दस्ता प्रभारी को दिए थे।
३२ साल से थी पहचान
पन्नीलाल चौक स्थित घंटाघर विगत ३२ साल से शहर की पहचान था। निगम ने इसे १९८४-८५ में बनवाया था। शुरू में इसमें चार बड़े आकार की घडिय़ां लगाई गईं थीं। इससे लोग अपनी घड़ी का समय सही करते थे। इसके चलते इसका नामकरण घंटाघर के रूप में हुआ। तब से इसकी यही पहचान थी।
सौ साल पुराने कुएं पर स्थित
पन्नीलाल चौक के बीचोंबीच १०० साल पुराना कुआं है। इसके सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव आया था, तो निगम ने घंटाघर बनवाने का निर्णय लिया था। ताकि कुआं भी सुरक्षित रहे और सौंदर्यीकरण भी हो जाए।
गिरने के बाद टूटी घंटाघर प्रेमियों की नींद
नगर निगम प्रशासन ने चार माह पूर्व ही घंटाघर को गिराने का प्रस्ताव तैयार कर लिया था। एमआईसी में इस प्रस्ताव के पास होने की जानकारी पूरे शहर को थी। इसके बावजूद घंटाघर को बचाने शहर का न तो कई सामाजिक संगठन आगे आया और न ही शहर की जनता जागी।
घंटाघर को गिराने के आदेश
एक सप्ताह पूर्व ५ सितंबर को जब अतिक्रमणदस्ते ने पन्नीलाल चौक स्थित जर्जर इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू की थी, उसी दिन निगमायुक्त ने घंटाघर को गिराने के आदेश भी दिए थे। लेकिन इसे गिराने के लिए मशीनरी उपलब्ध न होने की बात कहते हुए दस्ते ने इसे गिराने से हाथ खड़े कर दिए थे। यह खबर शहर में दूसरे दिन सुर्खियों में रही।
सोशल मीडिया पर हो हल्ला
आयुक्त द्वारा घंटाघर गिराने के आदेश के सात दिन तक शहर की जनता और निगम की कार्रवाई पर सावाल उठाने वाले लोग सोते रहे। मंगलवार को जब अतिक्रमण दस्ते ने शहर की पहचान को ढहा दिया तब लोगों की नींद टूटी। मौके पर कोई नहीं पहुंचा, सोशल मीडिया पर हो हल्ला मचाना शुरू कर दिया।
Published on:
13 Sept 2017 10:44 am
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