
Parking is not the parking place, how smart will the city's traffic
सतना. शहर की जनता को स्मार्ट सिटी के सपने दिखा रहा निगम प्रशासन अवैध निर्माण कार्यो पर रोक लगाने में नामाक साबित हो रहा है। शहर में बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत हो या रिहायसी मकान। किसी भी निर्माण कार्य में नियमों का पालन नहीं हो रहा। आलम यह है कि चौक चौराहे पर खड़ी होने वाली नई इमारतों में भी वाहन पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। नक्शा के विपरीत हो रहे निर्माण कार्य से एक ओर जहा शहर की सूरत बिगड़ रही हैं। वहीं इन इमारतों का व्यावसायिक उपयोग होने पर वाहन सड़क में पार्क होने से शहर की यातायात बिगडऩा तय है।
अवैध वसूली तक सिमटी निगरानी
दो साल पहले निर्माण कार्य की स्वीकृति एवं नक्शा पास कराने की व्यवस्था ऑनलाइन करते हुए निगम प्रशासन ने हर मकान के निर्माण से पहले नक्शा पास कराना अनिवार्य किया था। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी इस आदेश का जमीनी स्तर पर पालन नहीं हो सका। शहर में बनने वाले 90 फीसदी मकान अवैध हैं। व्यावसायिक भवन जिनके निगम द्वारा नक्शा पास किए गए हैं। उनका निर्माण भी नक्शा के अनुसार नहीं किया जा रहा है। इसके बावजूद अतिक्रमण दस्ता द्वारा शहर में धडल्ले से बन रही अवैध कालोनियां एवं भवनों के निर्माण कार्य रोक नहीं लगाई जा रही है। शहर में अवैध अतिक्रण की निगरानी के लिए घूम रहे राजस्व निरीक्षकों की ड्यूटी निर्माणकर्ताओं से अवैध वसूली करने तक सीमित है।
भूतल में पार्किंग अनिवार्य
भवन निगम के नियमों के तहत कामर्सियल बिल्डिंग के भूतल अथवा सामने पार्र्किंग के लिए पर्याप्त जगह छोडऩा अनिवार्य हैं। बिना पार्र्किंग की जगह छोड़े कोई भी व्यक्ति भवन का निर्माण नहीं कर सकता। लेकिन वर्तमान में शहर में एक दो नहीं दो दर्जन से अधिक बहुमंजिला इमारते निर्माणाधीन है। इनमें से 90 फीसदी निर्माणाधीन इमारतों में पाकिंग के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई। स्वीकृत नक्शा के विपरीत बन रहीं इन इमारतों की निगरानी की जिम्मेदारी निगम के तकनीकी अमले की है। लेकिन लेकिन आज तक किसी भी अवैध निर्माण पर न तो रोक लगाई गई और न ही किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की गई।
नक्शा सिर्फ लोन स्वीकृत के लिए
नगर निगम प्रशासन शहर को स्मार्ट बनाने के दावे तो करता है। लेकिन अवैध कालोनियां एवं अवैध बिल्डिंग के निर्माण पर आज तक अंकुश नहीं लगा पाया। शहर में व्यापारिक भवन हो या रहवासी मकान निर्माण से पहने निगम से नक्शा स्वीकृति सिर्फ वह भवन स्वामी या बिल्डिर ही कराता है जिसे बैंक से भवन निर्माण के लिए लोन पास कराना होता है। में हर साल बनने वाले दो हजार से अधिक मकान में 90 फीसदी मकान नक्शा के विपरीत अवैध होते हैं। इसके बाद भी निगम प्रशासन अवैध निर्माण कार्यो पर रोक लगाने कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
फैक्स फाइल
156 कालोनियां शहर में
134 कालोनियां अवैध
80 हजार मकान
90 फीसदी अवैध
200 कामर्सियल बिल्डिंग
150 में वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं
Updated on:
18 Mar 2019 01:03 pm
Published on:
18 Mar 2019 01:02 pm
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