ये है मामला
दरअसल, भर्ती नियमानुसार कोई शासकीय कर्मचारी एक साथ दो जगह सेवाएं नहीं दे सकता। अगर, सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करता है, तो अपने मूल विभाग से अनुमति लेनी होती है और चयन होने पर पूर्व पद से इस्तीफा देना होता है। इसके बाद ही उसका चयन वर्तमान पद के लिए होता है। फिर प्रशिक्षण सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। लेकिन, सतना जिले में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान जानबूझकर लापरवाही बरती गई। सेना के चार जवानों का चयन पटवारी के लिए हुआ था। दस्तावेज सत्यापन के दौरान शासकीय सेवा नियम को नकार दिया गया और उनका चयन करते हुए प्रशिक्षण के लिए भेज दिया गया। जब मामला कलेक्टर के पास पहुंचा, तो उन्होंने तत्काल अभ्यर्थियों के चयन को निरस्त कर दिया। लेकिन, सवाल है कि गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं प्रस्तावित की गई? उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।