15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गारंटी पीरियड में ही दरक गई 17 लाख की सड़क, निगम के इंजीनियर दबा गए मामला

गुणवत्ता पर सवाल: एनीकेट पहुंच मार्ग का दो साल पहले हुआ था निर्माण, मामले को दबा गए निगम के इंजीनियर

2 min read
Google source verification

image

Suresh Kumar Mishra

Aug 02, 2017

Poor construction of Aniket Access Road

Poor construction of Aniket Access Road


सतना। निगम द्वारा करवाए गए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर आए दिन सवाल खड़े होते हैं। कुछ ऐसा ही मामला एनीकेट पहुंच मार्ग के रूप में बनी सीसी सड़क का है। जिसे दो साल पहले 17 लाख की लागत से बनाया गया था, लेकिन ये सड़क परफॉर्मेंस गारंटी पीरियड में ही बीच से दरक गई।

इसके चलते अब निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं सबकुछ जानते हुए भी इंजीनियर व ठेका फर्म चुप्पी साध कर बैठ गए हैं, ताकि समायावधि गुजर जाए और मामला ठंडे बस्ते में चला जाए।

निगम ने सीसी सड़क बनाने का निर्णय लिया
दरअसल, एनिकेट तक पहुंचने के लिए पहले जो मार्ग था, उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। निगम के वाहन आए दिन फंसते थे। जिसके चलते निगम ने सीसी सड़क बनाने का निर्णय लिया। टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, तो ठेका कंपनी मेसर्स सुशील शर्मा टेंडर हासिल करने में सफल रहे।

पूरी राशि का भुगतान
इसी फर्म द्वारा 17 लाख की लागत से काम पूरा किया गया। जिसके बाद निगम के इंजीनियरों ने मौका मुआयना करते हुए काम को सही माना और पूरी राशि का भुगतान कर दिया। लेकिन, अब स्थिति ये है कि सड़क बीच से दरक चुकी है, साथ ही अगल-बगल से भी धसकना शुरू हो गई।

पाइप लाइन का बहना
अब मामला सामने आने के बाद निगम के इंजीनियर पाइप लाइन के ऊपर सड़क बनने से ऐसा होने की बात कर रहे हैं। लेकिन, शहर में ऐसी कई सड़कें हैं, जिनके नीचे से पाइप लाइन गुजरी है और सड़क सुरक्षित है। अगर, ऐसा होता, तो निगम के इंजीनियर किस आधार पर कार्य को अनुमति दिए हैं, ये भी सवाल है।


दफ्तर के बाहर सड़क नहीं गिट्टी
निगम द्वारा निर्माण कार्यों में किस कदर इंजीनियर मौके का निरीक्षण करते हैं और बिल पास करते हैं इसका उदाहरण भी सामने है। डायवर्सन रोड स्थित नगर निगम भवन परिसर मद से सड़क हाल ही में लगभग डेढ़ वर्ष पहले बनाई गई थी लेकिन इस जगह में सड़क तो नहीं गिट्टीनुमा सड़क जरूर दिखाई देती है। जबकि दिन भर निगम में महापौर, निगमायुक्त व इंजीनियरों की नजर पड़ती है।


गिनती के गुजरते वाहन
अगर, सड़क पर वाहन भार की बात की जाए, तो नामात्र का लोड है। इस सड़क का उपयोग निगम के वाहन ही करते हैं। वो भी एनिकेट के निरीक्षण आदि के दौरान। यानि दिनभर में गिनती के वाहन गुजरते हैं। उसके बावजूद सड़क दरक गई है।


तीन साल की गारंटी
इस सड़क की परफार्मेंंस गारंटी तीन साल की थी। लेकिन, दो साल के अंदर ही सड़क दरकना शुरू हो गई है। जिसके चलते इंजीनियरों ने ठेका फर्म को दरके हुए हिस्से को भरने का निर्देश दिया था। ये काम भी फर्म ने किया, लेकिन सड़क का दरकना रूका नहीं है। जिसके बाद इंजीनियर चुप्पी साध कर बैठ गए हैं।


पाइप लाइन के कारण सड़क में दरार आ गई होंगी। ऐसा कई सड़कों में होता है। बाकी काम तो ठीक था। निगम परिसर की सड़क किसने बनाई जानकारी नही है।

अरुण तिवारी, कार्यपालन यंत्री

ये भी पढ़ें

image