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सड़क हादसे रोकने के नियम तो बहुत पर क्रियान्वयन की कमी

सड़क सुरक्षा की बैठक : नागौद विधायक ने प्रशासन को दिखाया आइना, सांसद ने सतना शहर के गड्ढों को भरने के लिए दिया एक माह का समय

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सतना

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Sajal Gupta

Jan 24, 2019

सड़क हादसे रोकने के नियम तो बहुत पर क्रियान्वयन की कमी

सड़क हादसे रोकने के नियम तो बहुत पर क्रियान्वयन की कमी

सतना. सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में पहुंचे नागौद विधायक नागेन्द्र सिंह ने सड़क सुरक्षा मापदण्डों की पालना को लेकर सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों को रोकने के नियम तो बहुत हैं लेकिन क्रियान्वयन की कमी स्पष्ट नजर आती है। सड़क हादसे न्यूनतम करने के जिम्मेदार सभी अफसरों की मौजूदगी में विधायक ने आइना दिखाते हुए यह संदेश दे दिया कि बैठकों से ज्यादा महत्वपूर्ण नियमों और निर्णयों की पालना कराना है। सांसद गणेश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में नागौद कस्बे के सुगम यातायात के लिये कुछ मार्गों को नो-इंट्री जोन बनाने का प्रस्ताव दिया।
हालांकि जिला मुख्यालय में सुगम यातायात की समस्या ट्रैफिक लोड के कारण बहुत है, लेकिन इस संबंध में न तो प्रशासनिक अधिकारी कुछ सुझाव दे सके और न संबंधित जनप्रतिनिधि इस संबंध में कोई ठोस निर्णय ले सके। पिछली बैठकों के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन में यह जानकारी सामने नहीं आ सकी कि कितने दुर्घटना संभावित स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जा चुके हैं और कितने ब्लैक स्पॉट को सुरक्षित किया गया है। सांसद गणेश सिंह ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों की निरंतरता पर सवाल खड़े किए। बैठक की शुरुआत महाविद्यालयों में महिला लाइसेंस शिविर के आयोजन से हुई। इसमें आरटीओ ने बताया कि १५० लाइसेंस बन चुके हैं। सांसद ने कहा कि कॉलेज जाने वाली छात्राओं की संख्या तो काफी ज्यादा है, अगर मोपेड लेकर कॉलेज जाने वाली छात्राओं को ही सही लाभ मिलता तो संख्या ज्यादा होती। बैठक में आरटीओ और ट्रैफिक अधिकारी शिविर के लक्ष्य की जानकारी नहीं दे सके। निर्णय लिया गया कि आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ग्रासरूट लेवल पर काम करेगी और कॉलेज जाकर लक्ष्य निर्धारित करेगी। इसके बाद शिविर में छात्राओं के लाइसेंस बनाने के काम करेगी। इस दौरान आरटीओ कार्यालय की कार्यपद्धति पर भी तंज कसा गया कि सबको मालूम है कि इस दफ्तर में कैसा दलाली कारोबार होता है। बैठक में महापौर ममता पाण्डेय, सतीश शर्मा भी उपस्थित रहे।
पहले लाइन बनाएं, उसके बाहर हो वाहन
सांसद गणेश सिंह ने कहा कि शहर की ज्यादातर सड़क खस्ताहाल है। जहां देखों वहां गड्ढे हैं। आखिर इन्हें भरेगा कौन। लापरवाही विभागों की होती है और सवाल जनप्रतिनिधियों पर खड़े होते हैं। उन्होंने एक माह में गड्ढे भरने के निर्देश दिए। कहा कि कम से कम एक सड़क तो मॉडल बनाकर दिखाइए। जहां देखो वहां आटो खड़े रहते हैं,राहगीरों को चलने की जगह नहीं है। ऑटो के लिये न केवल स्थल तय करें, बल्कि पालन सुनिश्चित करें। निर्देश दिए कि मुख्य मार्गों में लाइनिंग हो और यह तय कर दिया जाए कि इस लाइन से बाहर वाहन खड़े न हों।
विधानसभावार हों सड़क सुरक्षा बैठकें
विधायक नागेन्द्र सिंह ने जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की तरह विधानसभा स्तर पर बैठक का सुझाव दिया। उन्होंने एक रोड का निर्माण शीघ्र कराने की बात कही जिससे नागौद के अंदर का ट्रैफिक कम हो सके, भारी वाहन बाहर से ही निकल सकें।
बैठक में पुराने कॉमर्शियल वाहन चालकों को रिफे्रशर कोर्स का प्रशिक्षण देने का मामला उठा तो आरटीओ ने सीमेंट फैक्ट्री सहित वाहन डीलर्स से मदद लेने की बात कही तो कलेक्टर ने पुलिस विभाग से मास्टर ट्रेनर तैयार करने की बात की। इस पर सांसद ने सवाल किया कि यह सब तो ठीक है लेकिन यह प्रशिक्षण कहां, कै से और कितने में होगा यह स्पष्ट किया जाए लेकिन इस मामले में भी कोई ठोस निर्णय प्रशासनिक अमले की ओर से निकल कर आता नहीं दिखा।
आरटीओ को पता नहीं कितने दूर से आते हैं स्कूली वाहन : स्कू ली वाहनों को लेकर जारी की गई सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पिछली बैठकों की ही तरह इस बार भी पढ़ कर सुना दी गई। जब आरटीओ ने यह कहा कि गाइड लाइन के अनुसार बस में महिला अटेंडेंट के मामले का जरूर यहां पालन नहीं हो रहा है, क्योंकि स्कू ल संचालकों का कहना है कि बसें शहर सीमा में ५ किमी के दायरे में ही चलती है। इस पर सांसद ने सख्त आपत्ति की और कहा कि यह गलत जानकारी है। यहां १५ से २० किमी दूर तक स्कू ल वाहन चलते हैं। बिरसिंहपुर हादसे में कई बच्चों की मौत हुई वह स्क ूल वाहन भी 15 किमी दूर से बच्चों को लेकर आता था।
और बाहर जाएगा नो-इंट्री प्वाइंट
शहर के व्यापक जनहित को ध्यान में रखते बैठक में कहा गया कि शहर के अंदर जगह-जगह भारी वाहन खड़े रहते हैं। इससे जाम की स्थिति बनती है। निर्णय लिया गया कि बिरला रोड पर नो-इंट्री प्वाइंट को और आगे खिसकाकर बाइपास के पास किया जाए। यह भी कहा गया कि शहर के अंदर जहां भी लोकल ट्रांसपोर्ट हैं उन्हें हटाकर ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्ट किया जाए। इस मामले को पूरी गंभीरता से लेने कहा गया। यह भी सामने आया कि शहर में कोई बाहरी व्यक्ति आता है तो उसे यह पता नहीं चलता है कि वह कहां है और किस दिशा में जाना है। इसके लिये सभी स्थलों पर संकेतक लगाने के निर्देश दिए और कहा गया कि एक व्यवस्थित साइनेज सिस्टम तैयार किया जाए। हालांकि यह पिछली कई बैठकों से उठने वाला मुद्दा रहा है, लेकिन आज तक एक भी संकेतक इस अनुरूप शहर में नहीं लगाए जा सके हैं।
एजेंडा के बाद भी नदारद रहे सीएमएचओ
बैठक में वाहन चालकों के नेत्र एवं स्वास्थ्य परीक्षण का एजेंडा भी रखा गया था और कलेक्टर की ओर से सीएमएचओ को इस बैठक में उपस्थित रहने कहा गया था, लेकिन सीएमएचओ इस बैठक में उपस्थित नहीं रहे। हालांकि बाद में उन्हें बुलवाया गया लेकिन वे आए या नहीं यह स्पष्ट नहीं हो सका। हालांकि नेत्र परीक्षण के संबंध में निर्णय लिया गया कि स्कूल बस और वैन चालकों के नेत्र परीक्षण को प्राथमिकता में रखा जाए। सांसद गणेश सिंह ने कहा कि जिले में स्कूल वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले अभी हाल में सामने आ चुके हैं और स्कूल वाहनों को लेकर तमाम लापरवाही के मामले लगातार आ रहे हैं। इसलिये स्कूल वाहन चालकों के नेत्र और स्वास्थ्य परीक्षण लगातार होते रहे। हालांकि इसके लिये आरटीओ ने सीएमएचओ से चिकित्सकीय सहयोग की बात रखी लेकिन उस वक्त सीएमएचओ की गैरमौजूदगी में बात आई गई हो गई।