नतमस्तक निगम प्रशासन: खस्ताहाल सड़क का नहीं दे रहा स्थाई समाधान
सतना. नगर निगम के अंदर से गुजरने वाले नेशनल हाइवे का पन्ना नाका का २०० मीटर हिस्सा नेशनल हाइवे, जिला प्रशासन सहित नगर निगम प्रशासन के लिए बदनुमा दाग बन चुका है। एक दशक से लगातार इस स्थान की सड़क हर बारिश में टूट जाती है और यहां बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं। लाखों रुपए इन गड्ढों को भरने के लिए विभाग यहां अब तक खर्च कर चुका है, लेकिन उसने यह जानने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर क्या वजह है कि सिर्फ इसी स्थान पर सड़क क्यों टूट रही है। अब एक बार फिर विभाग १८ लाख रुपए खर्च करने की तैयारी में है और यह भी तय है कि लाखों रुपए का काम एक बार फिर पानी में बह जाने वाले है। इसकी बड़ी छोटी से वजह है इस २०० मीटर के हिस्से में सड़क की पटरी का लेवल सड़क से ऊपर है। इससे पानी सड़क पर भर जाता है और सड़क टूट जाती है। स्थानीय निवासियों और पार्षद ने सभी जिम्मेदारों से मांग की है कि अब इस रोड का समाधान करने के बाद सड़क का डामरीकरण किया जाए।
पानी भरने से टूट जाती है सड़क
सड़क निर्माण विभाग से जुड़े जानकारों ने बताया कि डामर वाली सड़क का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। शहर के अंदर से गुजरने वाली नेशनल हाइवे के दो हिस्से इसी की वजह से हमेशा खराब हो जाते हैं और आगे भी तब तक खराब होते रहेंगे जब तक कि यहां सड़क की पटरी का लेवल हाइवे के बीटी लेवल (डामर लेवल) से नीचे नहीं किया जाएगा। होता यह है कि जब भी बारिश का मौसम आता है तो सड़क की पटरी का लेवल ऊंचा होने से सड़क का पानी नीचे नहीं जा पाता है बल्कि पटरी का भी पानी सड़क पर आकर जमा हो जाता है। जिससे सड़क उखड़ जाती है। लिहाजा यहां विभाग को ब्लैक टॉप से पहले पटरी नीचे करते हुए नाले से पानी निकलने का इंतजाम करना होगा। यह काम नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग के बिना नहीं हो सकेगा। इनका कहना है कि यदि अभी सड़क बना भी दी जाती है और कभी यहां निगम की पाइप लाइन फूटने से पानी भरेगा या बारिश का पानी जमा होगा तो यह सड़क फिर टूट जाएगी।
यह हैं सड़क के गुनहगार
पन्ना नाका में सड़क टूटने के सबसे बड़े गुनहगार इस २०० मीटर के हिस्से के किनारे रहने वाले धन्नासेठ हैं। इनके द्वारा अपने भवनों और परिसर के सामने फिलिंग करके पटरी का लेवल सड़क से ऊंचा कर लिया है। इतना ही नहीं इनके द्वारा नाले को भी पूरी तरह से ढंक दिया गया है और उसका भी लेबल ऊपर कर लिया है। इस वजह से सड़क का पानी नहीं निकल पाता है। जबकि सड़क के दोनों ओर साढ़े १७ मीटर तक इन्हें इस तरह का काम करने का अधिकार नहीं है। यह एक तरीके से शासकीय संपत्ति को क्षति पहुंचाने का मामला बनता है।
निगम का अतिक्रमण दस्ता भी दोषी
ऐसा नहीं कि इस मामले को निगम ने संज्ञान नहीं लिया। तत्कालीन कलेक्टर संतोष मिश्रा और नरेश पाल के कार्यकाल में उनके कहने पर तत्कालीन निगमायुक्त ने यहां अपने अतिक्रमण दस्ते को भेजा। उसे निर्देश दिए गए थे कि पटरी का लेवल नीचे कर नाले को पूरी तरह से साफ करें। लेकिन तत्कालीन अतिक्रमण दस्ता प्रभारी रामहर्ष मिश्रा पूरा दिन यहां जेसीबी खड़ी कर चलते बने थे और कोई काम नहीं किया था। इतना ही नहीं इसके लिये उन्होंने लंबा लेन-देन भी किया था।
तो दो दिन में शुरू होगा काम
नेशनल हाइवे के अधिकारियों ने बताया कि इस काम की निविदा हो चुकी है और १७.९३ लाख रुपए में यह काम ठेका कंपनी सुशील कुमार शर्मा को दिया गया है। ठेका कंपनी की ओर से शुक्रवार को एग्रीमेंट किया जाएगा और उसके बाद यहां काम शुरू होगा। अभी गुडफेथ में ठेकेदार ने वहां कुछ काम किया है। पर निविदा अनुसार काम एग्रीमेंट के बाद होगा। उन्होंने भी माना कि पटरी नीची नहीं होने तक यह समस्या बनी रहेगी। इसके लिये निगम को यहां पटरी का लेवल नीचे करने में सहयोग की अपेक्षा जताई है।