28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

MP के इस गांव को कहते हैं सैनिकों की नर्सरी, हर घर के युवा हैं भारतीय सेना का हिस्सा

घर-घर में सुनाई जाती सैनिकों की वीरता की कहानियां, 13 से अधिक युवा हो चुके है देश के लिए बलिदान
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

सतना

•

image

Suresh Mishra

•

Updated: 8 Jan 2018, 1:30 PM IST

sainik nursery in satna latest news before 26 january republic day

sainik nursery in satna latest news before 26 january republic day

सतना. जोश भारत मां की रक्षा करने का... जुनून देश के लिए प्राण न्योछावर करने का... जज्बात देश के दुश्मनों को खदेडऩे का...इस हौसले को देखना है तो सतना जिले के चूंद गांव से मुफीद जगह कोई नहीं हो सकती है। यहां के नौजवानों में सेना व अद्र्धसैनिक बल के ही सपने पलते हैं। तभी तो इस गांव में जितने किसान व खेतिहर मजदूर नहीं हैं, उससे कई गुना अधिक सेना के जवान हैं।

जो भारत मां की रक्षा करने के लिए कठिन से कठिन परिस्थिति से गुजरने को तैयार रहते हैं। जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर कोटर तहसील के चूंद गांव जैसे सेना की नर्सरी बन चुका है। घर-घर में देश भक्ति, शहादत व सैनिकों की वीरता की कहानियां सुनाई जाती हैं।

3500 आबादी वाले गांव में 400 से ज्यादा सैनिक

दरअसल, चूंद गांव की पहचान सैनिकों के गांव रूप में होती है। गांव के हर घर से कोई न कोई व्यक्ति भारतीय सेना का हिस्सा है। करीब 3500 आबादी वाले गांव में 400 से ज्यादा सैनिक हैं। वहीं इसके डेढ़ गुना भूतपूर्व सैनिक हैं। इस स्थिति को देखने के बाद चूंद गांव को सेना की नर्सरी कहा जाए, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यहां के बुजुर्ग बताते हैं, गांव में युवा शुरू से ही सेना में जाने का सोचते हैं।

हर युवक की यही कहानी

वे भूतपूर्व सैनिकों के अनुभव के माध्यम से गांव में ही तैयारी शुरू करते हैं। और आगामी एक दो साल के अंदर भारतीय सेना के लिए चयनित हो जाते हैं। कोई व्यक्ति बाहर जा कर अलग से प्रशिक्षण नहीं लेता। गांव में ही पूरी तैयारी करता है। चूंद गांव से सेना में चयनित हर युवक की यही कहानी है।

एक गांव के चार शहीद
कारगिल युद्ध में सतना जिले से 6 जवान शहादत को प्राप्त हुए थे। इसमें से तीन शहीद एक ही गांव चूंद के रहने वाले हैं। वहीं एक अन्य आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहादत को प्राप्त हुए थे। समर बहादुर सिंह (सिपाही), कन्हैया लाल सिंह (नायक) व बाबूलाल सिंह (नायक) के जज्बे की कहानी आज भी चूंद गांव के लोग सुनाते हैं। उल्लेखनीय है, कन्हैया लाल सिंह (नायक) व बाबूलाल सिंह (नायक) सगे भाई हैं। जब इनका पार्थिव देह गांव पहुंचा था, तो पिता ने कहा था, बंदूक दे दो, मैं पाकिस्तानियों को मारूंगा।

सेना के हर क्षेत्र में योगदान
चूंद गांव के युवा सेना के एक क्षेत्र में अपना योगदान नहीं दे रहे। बल्कि हर क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। भारत की सीमा की रक्षा से लेकर रक्षा अनुसंधान तक में भूमिका अदा कर रहे हैं। जल सेना, थल सेना व वायु सेना के हिस्सा हैं। बताया जाता है कि यहां के युवा सैनिक से लेकर कनज़्ल तक के पद तक पहुंच चुके हैं।

हर युद्ध में योगदान
देश की रक्षा के लिए जब-जब कदम आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ी है, चूदं गांव के बहादूरों ने कुबानज़्ी दी है। देश के लिए लड़े गए हर युद्ध में सपूतों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, जरूरत पडऩे पर देश के लिए अपने को बलिदान भी कर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1962 में चाइना वार, 1965 में इंडो-पाक वार, 1971 में इंडो-पाक वार, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन रक्षक व ऑपरेशन विजय में सहित देश के लिए हर युद्ध में हमारे रणबांकुरों ने योगदान दिया है।

शहीद की संताने भी देश सेवा को आतुर
कारगिल युद्ध में वीरगति प्राप्त शहीदों के परिवार के लिए आज भी देशहित सवोज़्परि है। कई ऐसे परिवार हैं, जिनके बेटे युद्ध में शहीद हुए, उसके बावजूद उन्होंने परिवार के अन्य सदस्य को सेना में जाने से नहीं रोका। बल्कि गर्व के साथ सेना में देशसेवा के लिए जाने दिया। शहीद समर सिंह व कन्हैया लाल सिंह के बेटे भारतीय सेना के अंग हैं।

तीन टोलों का एक गांव
चूंद गांव की पहचान सैनिकों के गांव के रूप में होती है। लेकिन, ये गांव तीन टोलों का है। इसमें चूंद खुर्द, चूंद कला व चूंद कोठार टोला शामिल हैं। बताया जाता है, चूंद खुर्द में 2000, चूंद कला में 1000 व कठार टोला 700 करीब लोग निवास करते हैं।

जिले के वीर शहीद
- समर बहादुर सिंह (सिपाही)- चूंद, तहसील कोटर
- कन्हैया लाल सिंह (नायक)- चूंद, तहसील कोटर
- बाबूलाल सिंह (नायक)- चूंद, तहसील कोटर
- केपी कुशवाहा (गनर)- महुला, मेहुती, सतना
- राजेन्द्र सेन (सिपाही)-करही मेदनीपुर
- शिव शंकर प्रसाद पांडेय (सिपाही)- कुआं, सतना
- सुग्रीव (सिपाही)-इंडो-चाइना वार 1962
- बद्री प्रसाद (सिपाही)-इंडो-चाइना वार 1962
- वंशराज सिंह (सिपाही)- इंडो-पाक वार 1965
- राम पाल सिंह (सिपाही)-इंडोपाक वार 1965
- दुर्गा प्रसाद (सिपाही)- इंडो-पाक वार 1971
- छोटे लाल सिंह (सिपाही)-इंडो- पाक वार 1971
- लालजी सिंह (सिपाही)-ऑपरेशन मेघदूत

बड़ी खबरें

View All

सतना

मध्य प्रदेश न्यूज़

ट्रेंडिंग