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सतना-बेला फोरलेन बाइपास की अंतिम बाधा दूर करने काम शुरू

रेलवे ओवरब्रिज की ऊंचाई बढ़ाने के लिए हुआ पहला ट्रायल

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सतना. 44 किमी के सतना-बेला फोरलेन बाइपास के लिए एक साल से बाधा बने आरओबी की ऊंचाई बढ़ाने का काम शुरू हो गया है। इस पुल की ऊंचाई कम होने के चलते नेशनल हाईवे 39 पर सतना-बेला के सतना बाईपास को मजबूरी में दो हिस्से में खोलना पड़ा था। फोरलेन बाईपास में रेलवे ओवरब्रिज की ऊंचाई बढ़ाने के लिए तकनीकी रूप से जो कार्य किया गया उसकी फर्स्ट ट्रायल बूस्टिंग मंगलवार को की गई। इस दौरान रेलवे व नेशनल हाईवे के अधिकारी मौजूद रहे। बताया गया कि 600 टन हैवी गर्डर को 1 मीटर ऊंचा उठाने के लिए 300 टन का जैक लगाया गया। इसमे एक-एक पॉइंट में 300 टन लगे हैं। 1200 टन उठाने वाले जैक का ट्रायल है। यह कार्य 4 दिन में पूरा हो जाएगा। इसके बाद दूसरे ब्रिज में भी इसी तरह उंचाई बढ़ाई जाएगी।

दरअसल बाईपास में रेलवे लाइन पर आरओबी का निर्माण पूरा नहीं होने से पूरा बाईपास यातायात के लिए उपयुक्त नहीं है। अभी सोहावल मोड़ से चित्रकूट सड़क बगहा तक बाईपास मार्ग और दूसरे हिस्से में बन चुके सतना-बदखर से रीवा-बेला तक मार्ग पर यातायात चालू है।

आरओबी की लंबाई एक मीटर कम

बताया गया कि आरओबी के नीचे से रेलवे की पन्ना लाइन जाना है, जिसका अर्थवर्क पूरा हो गया है। पुल बन जाने पर एनएच व रेलवे के अधिकारियों को होश आया कि रेल विद्युतीकरण के हिसाब से आरओबी की लंबाई एक मीटर कम है। उसके बाद रेलवे व एनएच विभाग में करीब छह माह तक गतिरोध बना रहा। बाद में नई डिजाइन तैयार करा कर काम शुरू हुआ तब तक बाइपास प्रोजेक्ट एक साल और पीछे चला गया। इस लापरवाही पर किसी पर जिम्मेदारी नहीं डाली गई और न ही कोई कार्रवाई की हुई।

नो-एंट्री से मिलेगी मुक्ति

सतना-बेला राष्ट्रीय राजमार्ग आने वाले भविष्य में व्यावसायिक जगत के लिए लाइफलाइन बनेगा। सीमेंट कंपनियों एवं अन्य व्यावसायिक संस्थानों के औद्योगिक वाहन एवं भारवाहक वाहनों को नो एंट्री खुलने का इंतजार नहीं करना होगा। सतना-बदखर होते हुए यह वाहन रीवा, प्रयागराज की ओर जा सकेंगे। उधर सोहावल मोड़ से बगहा चित्रकूट रोड तक बाईपास की सुविधा से नागौद, छतरपुर की तरफ से आने वाले वाहन बिना शहर में प्रवेश किए चित्रकूट, बांदा, प्रयागराज, कानपुर की ओर जा सकेंगे।

इस तरह पिछड़ा प्रोजेक्ट

सबसे पहले वर्ष 2011-12 में बाईपास का काम शुरू हुआ, लेकिन ठेकेदार ने बीच में काम छोड़ दिया। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से इस मार्ग के लिए ईपीसी मोड पर दोबारा टेण्डर किया गया। इसके तहत 2016-17 में श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर में फिर से काम शुरू किया गया। 2019-20 इसे पूरा होना था, लेकिन कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते काम में देरी हुई। फिर आरओबी के कारण एक साल और लग गए।

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