
satna collector Surprise inspection in girls hostel
सतना। कलेक्टर मुकेश शुक्ला ने शनिवार को सखी वन स्टॉप सेंटर (नारी निकेतन), कन्या छात्रावास आदर्श नगर और शिशु गृह मातृछाया का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। संस्थाओं में जो भी कमियां मिलीं उसे दूर करने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने को कहा तो कन्या छात्रावास में बच्चियों से बात करते हुए किसी भी प्रकार की समस्या की जानकारी ली। शिशुगृह में मापदंडों के अनुरूप व्यवस्थाओं का जायजा लिया। यहां अप्रशिक्षित नर्स की मौजूदगी पाई गई। संबंधित अधिकारियों को इनका विस्तृत निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए। इस दौरान एसडीएम पीएस त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
सखी वन स्टाप सेंटर से शुरुआत
कलेक्टर शुक्ला सुबह 11 बजे के लगभग सखी वन स्टाप सेंटर पहुंचे। यहां सबसे पहले सेंटर में रुकने और ठहरने की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बिस्तर और शौचालयों की स्थिति देखी। संतोषजनक स्थिति मिलने के बाद आंगन का निरीक्षण किया। पाया कि यहां नल की जो पाइप लाइन है वह सुरक्षा मापदंडों के अनुकूल नहीं है। इसके सहारे पहले एक युवती भाग भी चुकी है।
व्यवस्था में सुधार के निर्देश
इस पर कलेक्टर ने तत्काल इस व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए। इसके पश्चात यहां लगे सीसीटीवी कैमरों का अवलोकन किया। फिर स्क्रीन पर कैमरों की स्थिति देखी। यहां की अन्य व्यवस्थाओं संतुष्ट होने के बाद वे मौजूद स्टाफ को संवेदनशीलता से काम करने के निर्देश दिए। इस दौरान महिला बाल विकास अधिकारी मनीष सेठ, उप संचालक सामाजिक न्याय डीएस सिंह, जिला संयोजक आजाक अभिषेक सिंह सहित अन्य अमला मौजूद रहा।
कॉल का रखें रेकॉर्ड
कलेक्टर ने वन स्टॉप सेंटर में आने वाली युवतियों द्वारा मोबाइल से की जाने वाली बातों के संबंध में जानकारी ली। बताया गया कि यहां जो भी महिला आती है उनके मोबाइल आदि पहले ही सुरक्षित रख लिये जाते हैं। अगर उन्हें बात करनी होती है तो संस्था के फोन या कार्यरत स्टाफ के मोबाइल से बात कराई जाती है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि जो भी बातचीत हो उसका पूरा रेकॉर्ड रखा जाए। इसके लिए अलग से रजिस्टर संधारित किया जाए।
कन्या छात्रावास में खुलवाई खिड़कियां
कलेक्टर मुकेश शुक्ला आदर्श नगर स्थित कन्या छात्रावास के निरीक्षण में पहुंचे। यहां पहुंचते ही पाया कि छात्रावास में सीलन भरा महौल है और उजाले की कमी है। जब बच्चियों के कमरों में गए तो पाया कि सभी खिड़कियां बंद है। इस पर उन्होंने अधीक्षिका को निर्देशित किया कि दिन में उजाले के लिए खिड़कियों को खोल कर रखें। ताकि स्वच्छ हवा और रोशनी आ सके तथा यहां सीलन और बदबू की स्थिति न बने। सफाई व्यवस्था और दुरुस्त करने को कहा।
मुख्य द्वार पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश
इसके बाद उन्होंने बच्चियों से सीधी बात करते हुए उन्हें अगर कोई समस्या हो तो बताने कहा। कलेक्टर ने यहां के डायनिंग हाल की स्थिति देखी। यहां डायनिंग टेबल की आवश्यकता जताई और इसका प्रस्ताव बनाकर देने संबंधित अधिकारी को कहा। साथ ही मुख्य द्वार पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए। यहां भोजन और नाश्ते की जानकारी ली तो पता चला कि मीनू के अनुसार नाश्ता नहीं दिया गया है। इस पर अधीक्षिका को समझाइश दी।
महिला अधिकारियों को मिलेगी जिम्मेदारी
कन्या छात्रावास निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने कहा कि जिले की महिला अधिकारियों को एक-एक छात्रावास की जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही इन्हें कहा जाएगा कि वे यहां हर १५ दिन में विजिट करेंगी और यहां की समस्याओं और कमियों के संबंध में नियमित प्रतिवेदन देंगी। हास्टल वार्डन ने इस दौरान हास्टल बाउण्ड्री से लगी दुकानों के संबंध में शिकायत की। जिस पर इन्हें हटवाने के निर्देश कलेक्टर ने दिए।
नर्स नहीं दे सकी डिग्री की जानकारी
अंत में कलेक्टर शिशुगृह मातृछाया का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां नवजात बच्चों से लेकर छोटे बच्चों को रखा जाता है। उनका लालन पालन के साथ ही गोद भी दिया जाता है। कलेक्टर ने अन्य अधिकारियों सहित यहां का निरीक्षण किया। बच्चों के पालन प्रक्रिया की जानकारी ली और उनके केयर की स्थितियां देखी। एक अन्य अधिकारी ने यहां मौजूद महिला से उसके पद के बारे में जानकारी ली। जिस पर बताया कि नर्स है। जब उससे नर्स संबंधी डिग्री की जानकारी ली तो वह नहीं बता सकी। इसके पश्चात कलेक्टर ने शिशुगृह संचालकों से संवेदनशीलता से साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
Published on:
12 Aug 2018 04:15 pm
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