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रामनगर थाना प्रभारी को कोर्ट की फटकार

कहा- क्यों न आपके विरुद्ध प्रेषित किया जाए परिवाद, 420 के मामले में खसरा सहित रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने का मामला

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satna court design

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सतना. थाना प्रभारी रामनगर दिलीप पुरी को 420 के एक मामले में मूल खसरा सहित राज्य परीक्षक विवादित दस्तावेज पुलिस मुख्यालय भोपाल की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करना महंगा साबित हुआ। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अजीत कुमार तिर्की की अदालत ने थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने थाना प्रभारी से कहा कि आप व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर लिखित में कारण बताएं कि क्यों न आपके विरुद्ध भादवि की धारा १७३ व २१९ में अभियोजन के लिए परिवार सक्षम क्षेत्राधिकार युक्त मजिस्ट्रेट के न्यायालय को प्रषित किया जाए?

यह है मामला
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अजीत कुमार तिर्की की अदालत में सत्र प्रकरण क्रमांक-२६५/२०११ शासन बनाम रोशन लाल द्विवेदी अंतर्गत भादवि की धारा ४२०, ४६६, ४६७, ४६८ के तहत विचाराधीन है। इसमें पुलिस थाना रामनगर के अपराध क्रमांक २०५/२००८ भादवि की धारा ४२०, ४६६, ४६७, ४६८ के तहत आरोपी रोशन लाल द्विवेदी पिता रामाधार द्विवेदी निवासी ग्राम कुआं थाना रामनगर जिला सतना से संबंधित मूल दस्तावेज और राज्य परीक्षक विवादित दस्तावेज पुलिस मुख्यालय जहांगीराबाद भोपाल की रिपोर्ट सहित मूल खसरा पेश किया जाना है। इस संबंध में रामनगर थाना प्रभारी को ज्ञापन जारी किए गए थे, लेकिन दस्तावेज सहित रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा रही थी। इसके अलावा कार्रवाई करने के संबंध में कोई प्रतिवेदन भी नहीं दिया जा रहा था।


मामला उच्च न्यायालय की वरीयता सूची में
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अजीत कुमार तिर्की की अदालत ने कहा कि अभिलेख के अवलोकन से दर्शित है कि पुलिस अधीक्षक सतना के ज्ञापन क्रमांक /पुअ/सतना/एफएसएल/७८/२००९ दिनांक १९ मार्च २००९ द्वारा विवादित दस्तावेजों को जांच के लिए भोपाल भेजा गया था लेकिन उक्त रिपोर्ट एवं मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। मामला पांच वर्ष से अधिक पुराना होकर वर्ष २०११ से लंबित है जो कि उच्च न्यायालय की वरीयता सूची का होकर शीघ्र निराकरण आपेक्षित है।


लिखित में बताएं कारण
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अजीत कुमार तिर्की की अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी रामनगर दिलीप पुरी को नोटिस जारी कर लिखित में कारण बताने के आदेश दिए हैं। यह भी कहा कि क्यों न आपके विरुद्ध भादवि की धारा १७३ व २१९ में अभियोजन के लिए परिवाद सक्षम क्षेत्राधिकार युक्त मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रेषित किया जाए।