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MP के इस जिले में हर दिन उजड़ रही दो महिलाओं की कोख, डेथ ऑडिट के नाम पर होती है खानापूर्ति

ऐसी है शिशु मृत्यु दर को कम करने की हकीकत, योजनाओं के नाम पर महज खानापूर्ति, पीडि़तों को नहीं मिल पा रहा लाभ

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Satna Infant mortality: two women everyday womb desolate on satna

Satna Infant mortality: two women everyday womb desolate on satna

विक्रांत दुबे@सतना/ जिले में शिशु मृत्यु दर को कम करने की हकीकत चौंकाने वाली है। स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार नवजातों की मौत को कम करने के बड़े-बड़े दावे करते हैं पर मौत का यह आंकड़ा सालाना बढ़ता ही जा रहा रहा। हर दिन दो महिलाओं की कोख उजड़ रही। इसके बाद भी अमला नींद से नहीं जाग रहा। मौत की डेथ ऑडिट तक नहीं की जा रही।

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स्वास्थ्य विभाग की वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे रिपोर्ट पर गौर करें तो अप्रेल 18 से फरवरी 19 तक 11 माह में जिले में 1100 शिशुओं (3 माह से 5 वर्ष) ने दम तोड़ा। जबकि 717 नवजातों का दम कोख में घुट गया। यानी हर दिन दो महिलाओं की कोख सूनी हो रही। जबकि, हाईरिस्क गर्भवती का चिह्नांकन कर चिकित्सका मुहैया कराकर मासूमों को बचाया जा सकता था।

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लेकिन मैदानी अमला महज कागजी कोरम पूरा करता रहा। सीएमएचओ, डीएचओ, बीएमओ सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी दफ्तरों में बैठकर निगरानी करते रहे। चिकित्सकों के मुताबिक 3 माह से 5 वर्ष के शिशुओं की मौत की वजह डायरिया, निमोनिया और संक्रामक बीमारियां हैं। इन मासूमों को समय रहते चिकित्सा मुहैया कर बचाया जा सकता था।

प्रदेश में भोपाल के बाद सतना
स्वास्थ्य महकमे की रिपोर्ट पर नजर फेरें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा महिलाओं की कोख भोपाल और सतना जिले में उजड़ रही है। अप्रेल 18 से फरवरी 19 तक 11 माह में भोपाल में सर्वाधित 1072 और सतना में 717 महिलाओं की कोख सूनी हुई। छतरपुर 663, इंदौर में 634 महिलाओं की कोख उजड़ी।

योजना के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च
जिले की चिकित्सा सुविधा को बेहतर बनाने के अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन द्वारा शिशु मृत्यु दर कम करने के नाम पर करोड़ों रुपए से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन, महकमे की इन योजनाओं, अभियानों का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा। इसकी वहह से शिशु मृत्यु दर का ग्राफ घटने की बजाय सालाना बढ़ता ही जा रहा है।

शिशुओं की मौत की वजह
- पेरीफेरी में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव।
- जिले की सबसे बड़ी रेफरल इकाई में शिशुओं के लिए आईसीयू जैसी इकाई नहीं।
- लोगों का स्वास्थ्य के प्रति जागरुक न होना।
- पीएचसी-सीएचसी में चिकित्सकों की कमी।

कोख उजडऩे की वजह
- मैदानी अमले द्वारा हाई रिस्क गर्भवती के चिह्नांकन और जिम्मेदारों द्वारा निगरानी में लापरवाही।
- कोख उजडऩे का सबसे बड़ा कारण एनीमिया है। खून की कमी होने पर गर्भ में नवजात को आक्सीजन नहीं मिल पाती है और स्थिति गंभीर हो जाती है।
- मां को गर्भावस्था के दौरान किसी मर्ज (सिस्टमैटिक डिसीज) के शिकार होने होने पर भी कोख में दम घुट जाता है।
- बच्चे का आकार बड़ा होना, अत्याधिक रक्तस्त्राव, और आकस्मिक स्थिति में सर्जरी नहीं होने पर भी गर्भ में दम घुट जाता है।

सतना की ऐसी है स्थिति
ब्लॉक मौत
सतना 382
मैहर 95
नागौद 76
मझगवां 56
रामनगर 35
अमरपाटन 23
रामपुर बाघे. 22
उचेहरा 28
कुल 712
(नोट: कोख में घुटा दम)

संभाग की स्थिति
जिला मौत
सतना 717
रीवा 556
सीधी 471
सिंगरौली 519
(नोट: कोख में घुटा दम)