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सतना

Satna Lok sabha Seat 2024 : सतना में गणेश सिंह ने लिया अपना बदला, कांग्रेस प्रत्याशी को 80 हजार से ज्यादा मतों से हराया

Satna Loksabha Seat : एमपी की सतना लोकसभा सीट 2024 का मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। यहां बीजेपी प्रत्याशी ने 80 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है।

सतनाJun 04, 2024 / 06:18 pm

Himanshu Singh

satna loksabha seat result
Satna Lok Sabha Seat 2024 : लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम आने शुरू हो गए हैं। मध्यप्रदेश में बीजेपी ने क्लीन स्वीप करते हुए कांग्रेस के चारों खाने चित्त कर दिए हैं। सतना लोकसभा सीट पर बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल ही है। यहां से बीजेपी प्रत्याशी गणेश सिंह ने अपना बदला लेते हुए कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा को 84 हजार 949 वोटों से हराया है। बता दें कि, विधानसभा चुनाव 2023 (Vidhansabha election 2023) में कांग्रेस से सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू ने बीजेपी गणेश सिंह को हराया था।

किसके पक्ष में है सतना का समीकरण


सतना लोकसभा (Satna Loksabha) में प्रत्याशी की हार और जीत ब्राह्मणों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। सतना के लोगों में गणेश सिंह को लेकर नाराजगी जताई जा रही है। इस बार सतना का वोटर साइलेंट बताया जा रहा। क्योंकि मुंह में तो राम हैं, लेकिन गणेश सिंह से नाराजगी भी है। अब इस साइलेंट मोड का जवाब 4 जून को पता लगेगा। बरहाल, गणेश सिंह और सिद्धार्थ कुशावहा पिछड़ा वर्ग से आते हैं। दोनों की अपने-अपने समाजों के वोटों में अच्छी पकड़ है। वहीं एक दबका क्षत्रिय वोटरों का भी जो कि कुछ बीजेपी के पक्ष में जाएगा और कुछ कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। सतना में जीत ब्राह्मण वोटर ही तय करेगा, लेकिन बसपा की एंट्री ने बीजेपी-कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है। क्योंकि बसपा से चुनाव नारायण त्रिपाठी लड़े थे। ये मैहर विधायक भी रह चुके हैं। अगर ब्राह्मणों का वोट इनके पक्ष में जाता है तो फिर भाजपा-कांग्रेस की राह और भी मुश्किल होने जाएगी। बताया जाता है कि सतना लोकसभा में ब्राह्मणों के लगभग 20-22 परसेंट की हिस्सेदारी है।
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राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दे भी अहम


सतना लोकसभा में राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दे हमेशा से असर डालते नजर आ रहे हैं। जहां बीजेपी अबकी बार 400 पार का नारा दे तो रही है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर गणेश सिंह से नाराजगी भी है। इसी नाराजगी के चलते गणेश सिंह को विधानसभा चुनाव 2023 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। सतना में जातिगत समीकरण काफी हावी रहते हैं। सतना लोकसभा में क्षत्रिय और ब्राह्मण में छत्तीस का आंकड़ा रहता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सतना लोकसभा में फिर गणेश सिंह आएंगे, या इस बार होगा नया बदलाव।

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