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7 एकड़ जमीन नहीं मिलने से सतना मेडिकल कॉलेज का कामकाज थमा, कलेक्टर और शासन स्तर पर लंबित है मामला

निर्माणाधीन छात्रावास भवन हस्तांतरण पर साधी चुप्पी

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Satna Medical College Process stops, 7 acres jamin ki Demand

Satna Medical College Process stops, 7 acres jamin ki Demand

रमाशंकर शर्मा@सतना। भाजपा सरकार में जिलेवासियों ने मेडिकल कॉलेज की मांग में जिस तरह एका दिखाया और इसके लिये सर्वदलीय प्रयास हुए उसका नतीजा यह रहा कि सतना जिले को मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हो गया। इस दौरान तत्कालीन कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल तत्काल प्रभाव से मेडिकल कॉलेज के नाम पर जमीन का आवंटन किया साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि शेष जमीन चाहे जाने पर तत्काल आवंटित कर दी जाएगी और यह भी कहा गया कि इसके निकट निर्माणाधीन छात्रावास भवन को भी कॉलेज के लिये आवश्यक होने पर हस्तांतरित किया जाएगा। लेकिन उनके जाने के बाद यह मामला अब खटाई में पड़ गया है। जिससे मेडिकल कॉलेज की आगे की प्रक्रिया रुकी हुई है। ऐसे में न केवल कॉलेज निर्माण कार्य प्रारंभ होने में विलंब होगा बल्कि उसकी ड्राइंग डिजाइन पर भी प्रभाव पड़ेगा।

वित्तीय स्वीकृति जारी
संभागीय परियोजना यंत्री पीआइयू कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सतना जिले को मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिलने के साथ ही इसकी निर्माण एजेंसी पीआईयू को बनाया गया। निर्माण एजेंसी पीआइयू ने प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार के पास भेजा जहां से इस प्रोजेक्ट का अनुमोदन करने के साथ ही वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। इतना ही नहीं सांसद गणेश सिंह के प्रस्ताव के बाद 100 के स्थान पर 150 सीटें चिकित्सा महाविद्यालय के लिए स्वीकृत कर दी गई है। लेकिन इस मामले में अब एक बड़ी बाधा जमीन उपलब्धता की आ गई है। जिस मामले में निर्माण एजेंसी द्वारा लगातार लिखे जाने के बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज का काम लटकने की संभावना भी बनती जा रही है।

यह पेंच भी फंसा
मेडिकल कॉलेज को आवंटित 37.72 एकड़ की जमीन में ही दो एकड़ की भूमि में कन्या एवं बालक छात्रावास के लिये भी जमीन का आवंटन पूर्व से था, जहां छात्रावास निर्माणाधीन भी है। उस वक्त निर्णय लिया गया था कि यह निर्माण यथा स्थिति में बंद कर अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति विकास विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। सरकार बदलने के साथ ही यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। ऐसे में पीआईयू अब कॉलेज निर्माण की स्थिति को लेकर असमंजस में फंसी हुई है और माना जा रहा है कि ऐसे में कॉलेज निर्माण की स्थिति प्रभावित होगी।

यह है मामला
तत्कालीन जिला प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज के लिये 37.72 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दी थी। साथ ही यह भी आश्वस्त किया था कि तय प्लान के अनुसार इससे लगी 7.5 एकड़ की जमीन का और आवंटन कर दिया जाएगा। जिसमें से एक शासकीय जमीन वह थी जो वृक्षारोपण के लिये आवंटति की गई है। इधर अब जब इस मेडिकल कॉलेज का नक्शा सहित ड़्राइंग डिजाइन का काम अंतिम चरण में है और टेंडर प्रक्रिया भी प्रारंभ है ऐसे में निर्माण एजेंसी को इस जमीन से लगी 4 एवं 3.5 एकड़ (कुल 7.5 एकड़) अतिरिक्त भूमि नहीं मिल पा रही है।

इनकी मानी जा रही अनदेखी
बताया गया है कि शेष 7.5 एकड़ जमीन हस्तांतरण का मामला कलेक्टर स्तर का है अभी तक निर्णय नहीं लिया जा सका है। इसी तरह से निर्माणाधीन छात्रावास का मामला राज्य शासन स्तर का है जिस पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कायम है।

पूर्व कलेक्टर को इस संबंध में कहा गया था और प्रस्ताव शासन को हस्तांतरण के लिये भेजा भी गया था। अब इस मामले में कलेक्टर सहित शासन सहित सभी संबंधितों से चर्चा कर इस दिशा में प्रयास किया जाएगा।
गणेश सिंह, सांसद