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‘जलावर्धन में भ्रष्टाचार’ की भेंट चढ़ी परिषद, एक सप्ताह के लिए बैठक स्थगित

परिषद में दो इंजीनियरों के अलग-अलग जवाब, हंगामे में गुजर गए दो घंटे

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Satna Nagar Nigam Council meeting news in hindi

Satna Nagar Nigam Council meeting news in hindi

सतना। लंबे समय बाद नगर निगम में परिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक में शहर विकास पर चर्चा न होकर हंगामा होता रहा। जलावर्धन योजना में हुए भ्रष्टाचार को लेकर पार्षद सीधे जवाब चाहते थे। दो इंजीनियरों को जवाब देने के लिए बुलाया गया, जो अपने आपमें विरोधाभाषी थे। लिहाजा, हंगामा बढ़ गया और अंत में अध्यक्ष अनिल जैसवाल ने बैठक एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।

ये है मामला
दरअसल, बैठक में जलावर्धन योजना का मामला उठा। बताया गया कि पूरा शहर खुदा पड़ा है। इसके बावजूद ठेकेदार को शत प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। जबकि अनुबंध में शर्त थी कि सड़कों का पैचवर्क करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। इसी को मुद्दा बनाते हुए पार्षदों ने तोड़ी गई सड़कों का पैचवर्क कराने की मांग अध्यक्ष से की। मामले को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष ने योजना के प्रभारी इंजीनियर को तलब कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

सदन को गुमराह करने की कोशिश
ईई योगेश तिवारी सामने आए और गोलमोल जवाब देते हुए सदन को गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने बताया, जलावर्धन योजना के तहत ठेका कंपनी को 167 किमी पाइपलाइन बिछानी थी। सड़क मरम्मत के लिए जो पैसा देना था उसके बदले ठेका एजेंसी ने शहर में 247 किमी पाइपलाइन डाल दी है। इस पर पार्षद नीरज शुक्ला ने सवाल उठाया। कहा, बिना परिषद की अनुमति के योजना के डीपीआर से छेडड़ाड़ किसने की और किसके आदेश से की गई?

योजना की फाइल नहीं रखी गई
इसकी जानकारी सदन को दी जाए। इसके बाद अन्य पार्षद भी सवाल जवाब करने लगे। पार्षदों की मांग पर जब अध्यक्ष ने जलावर्धन योजना की डीपीआर फाइल सदन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए तो अधिकारियों के होश उड़ गए। लगभग आधा घंटा इंतजार करने के बाद भी सदन में योजना की फाइल नहीं रखी गई। अधिकारियों की मनमानी से आक्रोशित पार्षदों ने हंगामा शुरू किया तो कार्यपालन यंत्री एके सिंह ने जवाब दिया कि जलावर्धन योजना के तहत ठेका एजेंसी को 13 वार्डों में 167 किमी पाइप लाइन डालनी थी।

13 हजार नल कनेक्शन किए
लेकिन आवश्यकता 247 किमी. की थी। डीपीआर में 35 हजार कनेक्शन शामिल थे। लेकिन ठेका एजेंसी ने सिर्फ 13 हजार नल कनेक्शन किए। नल कनेक्शन की बची राशि से 247 किमी पाइप लाइन बिछा दी गई। सड़क मरम्मत का पैसा पाइपलाइन डालने में खर्च नहीं हुआ। इसके बाद पार्षद इस बात पर अड़ गए कि आखिर हकीकत क्या है, दो इंजीनियर अलग-अलग जवाब दे रहे हैं। हांगामा बढ़ता गया और बहिष्कार की स्थिति बन गई। इसके बाद परिषद स्थगित हो गई।

उच्चस्तरीय जांच की मांग
जलावर्धन योजना में हुए भ्रष्टाचार की पोल खुलते ही पार्षदों ने कहा कि निगम अधिकारियों ने ठेकेदार से मिलकर सड़क मरम्मत का पूरा पैसा डकार लिया। योजना में 50 करोड़ से अधिक का घोटला हुआ है। इसकी जांच ईडी या किसी बड़ी जांच एजेंसी से कराई जाए।

जब अध्यक्ष पर भड़के पार्षद
जलावर्धन योजना में हुए भ्रष्टाचार पर सदन में हंगामा होते देख अध्यक्ष ने कहा, इसकी जांच के लिए पार्षदों की एक जांच गठित कर देते हैं। इतना सुनते ही पार्षद भड़क गए। सभी ने एक स्वर में कहा कि पांच कमेटी बन चुकी है। अब पार्षदों की कोई कमेटी नहीं बनेगी। बिजली घेटाला, चौपाटी में हुए घोटाले की जांच के लिए भी पार्षद की टीम गठित हुई थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सभी फाइलें अधिकारियों ने दबा दी।

निगमायुक्त को लिया आड़े हाथ
निगम अधिकारियों के अडि़यल रवैएे को लेकर पार्षदों निगमायुक्त को जमकर सुनाई। निगमायुक्त को संबोधित करते हुए पार्षदों ने कहा कि निगम के भ्रष्ट अधिकारियों ने नरक निगम बना दिया है। आप शहर के लिए नए हैं। इसलिए अधिकारी आपको गुमराह कर अपना काम निकाल रहे हैं। इसलिए इनके बहकावे में न आएं। आप शहर भ्रमण कर अपनी आंख से शहर की जमीनी हकीकत देखें और उनका निराकरण करें।