
Satna News: 5 key points related to sunderkand ramayana
सतना। 'सुंदरकांड' ( Sunderkand ) 'श्री रामचरित मानस' ( shri ramcharitmanas ) का पंचम सोपान है। रामचरित मानस ( ramcharitmanas ) महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित 'रामायण' ( ramayan ) पर आधारित महाकाव्य है। वाल्मीकि ने रामायण ( Valmiki Ramayana ) संस्कृत में लिखी थी। जिससे आम आदमी तक सीधे उसकी पहुंच नहीं थी लेकिन तुलसीदास ने तत्कालीन आम बोल चाल की भाषा अवधी में इसकी रचना कर रामायण को घर-घर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
लोगों की जुबान पर मानस पाठ पढ़ने का एक कारण यह भी था कि आम बोल-चाल की भाषा में होने के साथ-साथ इसमें ज्ञेयता है। एक लय है, एक गति है। वैसे तो रामचरित मानस में तुलसीदास ने प्रभु श्रीराम के जीवन चरित का वर्णन किया है और पूरे मानस के नायक मयार्दा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ही हैं। लेकिन सुंदरकांड में रामदूत, पवनपुत्र हनुमान का यशोगान किया गया है। इसलिए सुंदरकांड के नायक श्रीहनुमान हैं। यहां एमपी पत्रिका सुंदरकांड से जुड़ी 5 अहम बातें बता रहा है।
1.क्यों रखा गया सुंदरकांड का नाम
हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटांचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटांचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे। तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका निर्मित थी। इसी वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी। इस कांड की सबसे प्रमुख घटना यहीं हुई थी, इसलिए इसका नाम सुंदरकांड रखा गया।
2.शुभ अवसरों पर सुंदरकांड का पाठ क्यों
शुभ अवसरों पर तुलसीदासजी द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। जबकि किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां हों, कोई काम नहीं बन पा रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकांड करने की सलाह देते हैं।
3. सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता है
माना जाता हैं कि सुंदरकांड के पाठ से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। सुंदरकांड के पाठ में बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। जो लोग नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं, उनके सभी दुख: दुर हो जाते हैं, इस कांड में हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और बल से सीता माता की खोज की है। इसी वजह से सुंदरकांड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है।
4. सुंदरकांड से क्यों मिलता है मनोवैज्ञानिक लाभ
वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है, संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरूषार्थ को दर्शाती है, सुंदरकाण्ड एक मात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का कांड है। मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड है, सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है, किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।
5. सुंदरकांड से क्यों मिलता है धार्मिक लाभ
सुंदरकांड के वर्णन से धार्मिक लाभ मिलता है। हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है। बजरंगबली बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं, शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं, इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकांड का पाठ करना है, सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार की परेशानी हो सुंदरकांड के पाठ से दूर हो जाती है, यह एक श्रेष्ठ और सरल उपाय है।
Published on:
27 Aug 2019 02:18 pm
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