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मनरेगा: श्रमिकों के आधार लिंक कराने में सतना-रीवा निचले पायदान पर

कलेक्टर एवं जिपं सीईओ को प्रगति बढ़ाने के निर्देश, रोजगार सहायकों और सहायक लेखाधिकारियों की लापरवाही

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Speed ​​study will be done for the time taken for construction works under MNREGA

सतना. अप्रैल 2017 में सरकार ने मनरेगा की समीक्षा में पाया कि एक जॉब कार्ड में जितनी संख्या में श्रमिकों के नाम जुड़े हैं उन सभी की मजदूरी एक ही संयुक्त खाते में जाती थी। इससे अक्सर विवाद की स्थिति बनती थी। इसको देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया कि जॉब कार्ड में दर्ज सभी श्रमिकों के पृथक खाते बना कर उन्हें आधार से लिंक किया जाएगा, इसके बाद मजदूरी उनके खाते में सीधे जाएगी। इसके लिए समयबद्ध कार्यक्रम जारी किया गया और इसकी जिम्मेदारी रोजगार सहायकों और जनपद के सहायक लेखाधिकारियों को दी गई। लेकिन, सतना-रीवा में इसकी प्रगति बहुत अच्छी नहीं है। हालिया समीक्षा में पाया गया है कि श्रमिकों के आधार नंबर नरेगा साफ्ट से लिंक करने के मामले प्रदेश के सबसे कम प्रगति वाले १० जिलों में भी सबसे निचले पायदान पर है। आधार लिंक का प्रदेश का औसत ६९.६३ फीसदी है जबकि सतना का 59.02 और रीवा का ५४.२३ है। भिण्ड ३९.८२ फीसदी के साथ प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर है।

आयुक्त मप्र राज्य रोजगार गारंटी परिषद शिल्पा गुप्ता ने एमआईएस में मनरेगा श्रमिकों के आधार नंबर अंकित किये जाने की जब समीक्षा की तो प्रदेश के १० जिलों की स्थिति सबसे कमजोर पाई गई। ये जिले निचले क्रम में क्रमश भिंड, रीवा, सतना, रतलाम, छतरपुर, बैतूल, अलीराजपुर, दतिया, मंदसौर और झाबुआ हैं। इन जिलों के कलेक्टर और जिपं सीईओ को आधार लिंकिंग का काम तेजी से करवाने के निर्देश दिए हैं।

इनकी है जिम्मेदारी
श्रमिकों के खाते आधार से लिंक करवाने की जिम्मेदारी रोजगार सहायक की है। उन्हें श्रमिकों से सहमित पत्र लेकर संबंधित बैंक शाखा में देकर खाते को आधार से लिंक कराना था। इसके बाद जनपद के सहायक लेखाधिकारी की जिम्मेदारी है कि एक सप्ताह बाद बैंकों से लिंक खातों की जानकारी लेकर धीमी प्रगति पर तेजी लाएंगे। इससे श्रमिकों की मजदूरी भुगतान में भी तेजी आएगी।

एक्टिव वर्कर में स्थिति ठीक
मामले में जिला रोजगार गारंटी सेल का कहना है कि एक्टिव वर्कर (जो श्रमिक वास्तव में मनरेगा में मजदूरी करते हैं) के मामले में जिले की स्थिति ठीक है। आधार लिंकिंग का प्रतिशत ७९.३८ है। सबसे बेहतर स्थिति अमरपाटन की ८९.१३ है। मैहर की ८४.३७, मझगवां ६७.१७, नागौद ८८.९९, रामनगर ८४.२७, रामपुर ७४.७५, सोहावल ७७.९३ व उचेहरा की ७९.३ है। गौर करने वाली बात यह है कि मझगवां आदिवासी इलाका है और यहां सर्वाधिक मजदूरों को काम की जरूरत होती है। लेकिन यहां के मजदूरों के ही खाते जिले में अभी तक सबसे कम लिंक है। दूसरी ओर कुल श्रमिकों के मामले में बात करें तो सबसे कम आधार लिंक की स्थिति मझगवां में ही ४७ फीसदी है। अमरपाटन में ६२, मैहर में ६१, नागौद में ६४, रामनगर में ६७, रामपुर बाघेलान में ५९, सोहावल में ५४, उचेहरा में ६७ है।