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पानी से कचरा निकालने का ‘सतना मॉडल’ टॉप-30 इनोवेशन में शामिल, अब आइबीएम देगा इंटर्नशिप

नीति आयोग ने आयोजित की थी अटल टिंकरिंग मैराथन प्रतियोगिता, टॉप 100 तक पहुंचे थे मध्यप्रदेश के सिर्फ तीन मॉडल

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सतना

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Rajiv Jain

May 10, 2018

Satna School boys in Atal Tinkering Marathon Top 30 Innovations

Satna School boys in Atal Tinkering Marathon Top 30 Innovations

सतना. जिले के विद्यार्थियों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सतना के दो छात्रों के बनाए एक्वा मोबीक्लीन मॉडल को देश के टॉप 30 में शामिल किया गया है। दरअसल, नीति आयोग द्वारा अटल टिंकरिंग मैराथन प्रतियोगिता (Atal Tinkering Marathon) का आयोजन किया था। इसमें देश के 1600 टॉप क्लास स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। जिन्हें पछाड़ते हुए सतना के छात्रों ने परचम लहाराया है। इस मॉडल के माध्यम से छात्रों ने बताया है कि किसी भी जलस्रोत से कैसे कचरा निकाला जा सकता है, उसका वर्गीकरण करते हुए कचरे को कैसे अलग-अलग किया जा सकता है। मेटल को कैसे हटाया जा सकता है और किस प्रकार अन्य कचरे को अलग कर सकते हैं। मॉडल को हर पैमाने पर आकलन करने के बाद टॉप 30 में वेस्ट मैनेजमेंट वर्ग में जगह दिया गया है।
दरअसल, नीति आयोग द्वारा आयोजित अटल टिंकरिंग मैराथन में क्रिस्तकुला हायर सेकंडरी स्कूल (CHRISTUKULA MISSION HIGHER SEC SCHOOL Satna) के छात्रों ने हिस्सा लिया था। इसमें रचित अग्रवाल व साधक जैन ने वेस्ट मैनेजमेंट के तहत एक्वा मोबीक्लीन (पानी से कचरा निकालने का मॉडल) पेश किया। वहीं एग्री टैक के तहत केतन सिंह व नीरव दसवानी ने स्मार्ट सेवर मॉडल पेश किया। शुरुआती दौर में दोनों मॉडल टॉप 100 तक जगह बनाने में सफल रहे। उसके बाद नीति आयोग द्वारा टॉप 30 का चयन किया। इसमें रचित अग्रवाल व साधक जैन का एक्वा मोबीक्लीन मॉडल चयनित हुआ। टॉप 100 में हरदा जिले के सरस्वती विद्यामंदिर के अभिषेक गौर और नीरज गुर्जर का मॉडल भी शामिल रहा।

ऐसे हुआ चयन
नीति आयोग द्वारा अटल टिंकरिंग मैराथन के तहत पहले उन स्कूलों का चयन किया गया जहां आधुनिक लैब थी और विद्यार्थी उपयोग करते थे। इस तरह 1600 स्कूल का चयन हुआ। उसके बाद एक प्रतियोगिता पुणे में आयोजित की गई। इसमें इन स्कूल के बच्चों को अपना मॉडल प्रस्तुत करना था। जो थ्योरी के साथ-साथ व्यावहारिक रूप से काम करता हो। प्रतियोगिता में देश के 100 स्कूल के मॉडल का चयन किया गया। उसके बाद मॉडल को वर्किंग स्थिति के साथ वीडियो बनाकर नीति आयोग को भेजना था। संबंधित विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुतिकरण देना था। इसके बाद एक्सपर्ट कमेटी द्वारा मॉडल के गुणदोष के आधार पर चयन करना था। इसमें सतना के दो विद्यार्थियों ने बाजी मारी।

ऐसे करता है काम
टॉप 30 में चयनित एक्वा मोबीक्लीन मॉडल रचित अग्रवाल व साधक जैन ने बनाया है। मॉडल के विषय में साधक जैन बताते हैं, मॉडल बहुत आसानी से जलस्रोत से कचरा साफ करता है। हम लोगों ने इसका उपयोग स्कूल के जलाशय में भी किया था। इसमें एक कनवेयर बेल्ट लगाया गया है और बेटरी है। उसे ब्लूटूथ से जोड़ दिया गया। इसके माध्यम से पूरा मॉडल काम करता है। इससे मेटल को पानी से अलग भी किया जा सकता है।

IMAGE CREDIT: patrika

क्या है टिंकरिंग लैब
टिंकरिंग लैब एक प्रकार की आधुनिक लैब होती है। वहां विद्यार्थियों को ऐसी सुविधा दी जाती है कि उनके पास कोई आइडिया है, तो प्रयोगकर देख सकते हैं। एक्सपर्ट व टीचर से बात करते हुए उसे और बेहतर कर सकते हैं। इसे ही राज्य व केंद्र सरकार द्वारा अटल टिंकरिंग मैराथन के तहत प्रोत्साहित किया जाता है। सफल स्कूलों को 20 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, ताकि स्कूल की लैब को और बेहतर बनाया जा सके।

आइबीएम देगा इंटर्नशिप
साधक जैन ने बताया, मॉडल का टॉप 30 में चयन होने के बाद आइबीएम ने हम लोगों को बेंगलुरु में इंटर्नशिप देने का प्रस्ताव दिया है। यह15 दिन के लिए होगा। इसमें हम लोगों को बताया जाएगा कि इस मॉडल को अपग्रेड करते हुए बेहतर कैसे किया जा सकता है? इसको विकसित करने की संभावना क्या-क्या है। व्यावहारिक उपयोग कैसे कर सकते हैं। हालांकि अभी इंटर्नशिप की तिथि तय नहीं हुई है।