11 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Breaking: डकैतों के चंगुल से 60 घंटे बाद आजाद हुए रिटायर्ड SDO, क्लर्क और ड्राइवर

बगदरा घाटी अपहरण कांड

2 min read
Google source verification

सतना

image

Suresh Mishra

Oct 26, 2018

Satna SDO kidnapping case: forest department retired officer ransom

Satna SDO kidnapping case: forest department retired officer ransom

सतना। बगदरा घाटी से अपहृत हुए सेवानिवृत्त फॉरेस्ट एसडीओ रामाश्रय पांडेय, लिपिक और ड्राइवर डकैतों की पकड़ से 60 घंटे बाद मुक्त हो गए है। बताया गया कि शुक्रवार की भोर करीब 3 बजे के लगभग तीनों लोग अपने-अपने घर सकुशल पहुंच गए है। सूत्रों की मानें तो फिरौती की रकम ने अपहृतों को डकैतों के चंगुल से मुक्त कराया है। वहीं एमपी-यूपी की पुलिस ने भी भारी दबाव बनाए हुई थी। इसलिए डकैतों को मजबूर होकर तीनों को आजाद करना पड़ा।

बता दें कि, पूरे घटनाक्रम पर नजर फेरने के बाद तराई के जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नेताओं पर दबाव बनाने के लिए डकैतों ने वारदात को अंजाम दिया है। चुनाव के एेनवक्त दस्यु दल नेताओं से मोटी रकम वसूल कर चुनाव प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। एेसा ही इस बार करने के लिए भूमिका बनाई जा रही है।

नहीं आ सके सब इंस्पेक्टर
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशासन अनुराधा शंकर ने तिहरे अपहरणकांड के मद्देनजर दमोह, उमरिया व कटनी जिले के पांच उप निरीक्षकों को सतना भेजने के आदेश दिए थे। बुधवार को जारी इस आदेश के बाद तय समय पर सब इंस्पेक्टर जिले में आमद नहीं दे सके। सूत्रों के अनुसार, दमोह जिले में पदस्थ उप निरीक्षक मंशाराम बगेन, सत्येन्द्र कुमार राजपूत के नाम में संशोधन करने की प्रक्रिया चलती रही। इसी तरह कटनी जिले से एसआइ जय प्रकाश पटेल व धीरज कुमार राज भी गुरुवार की सुबह तक आमद नहीं दे सके थे। जबकि उमरिया जिले में पदस्थ एसआइ विनय सिंह ने सतना के लिए रवानगी ले ली है। उधर एसपी संतोष सिंह गौर ने कहा कि तीनों को सकुशल मुक्त कराने हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

परिजनों की हुई फोन पर बात
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार की दोपहर अपहृत व्यक्तियों के परिवार की महिलाओं से डकैतों ने फोन पर बात की है। 15 मिनट से ज्यादा देर तक दोनों के बीच बात चलती रही। इस बीच डकैतों ने अपनी मांग को दोहराते हुए अपहृतों से भी बात कराई है। फोन पर हुई इस बात पर पुलिस की पैनी नजर रही। लेकिन, सटीक लोकेशन नहीं मिलने से पुलिस डकैतों के ठीहे तक नहीं पहुंच सकी। खबर है कि मप्र की ओर बियावान जंगल में ही डकैतों ने डेरा जमा रखा है। दोपहर बाद पुलिस भी इस बात पर जोर देती रही कि देर रात तक डकैतों के चंगुल से अपहृत व्यक्तियों को मुक्त करा लिया जाएगा।

फरियादी को उठा लाई पुलिस
बगदरा घाटी से अपहरण के दौरान डकैतों ने बाइक से जा रहे कुछ युवकों के मोबाइल फोन लूट लिए थे। इनमें एक रंगीलाल मवासी और दूसरे राजकुमार निवसी निवासी घूरडांग का नाम सामने आया। सूत्रों के अनुसार, लूटे गए मोबाइल फोन को सर्विलांस में रखते हुए पुलिस इनके लोकेशन का पता लगा रही थी। तभी पता चला कि लूटे हुए मोबाइल फोन का एक नंबर शहर में एक्टिवेट है। पुलिस की एक टीम सटीक लोकेशन पर दौड़ी और युवक को पकड़ लिया। पूछताछ हुई तो पता चला कि घटना के बाद राजकुमार ने अपने नंबर का दूसरा सिमकार्ड जारी करा लिया था। पड़ताल में यह बात सामने आई कि मोबाइल फोन कंपनी ने बिना पुलिस आवेदन के ही सिमकार्ड जारी कर दिया। जबकि पुलिस में शिकायत की प्रति देने पर ही अब तक सिमकार्ड दूसरा उपभोक्ता को जारी किया जाता था। एेसे में मोबाइल कंपनी के डीलर से भी पूछताछ हो रही है।