
satna smart city: 1530 crore works could not land
सतना। स्मार्ट शहरों की सूची में सतना को शामिल हुए दो वर्ष बीत चुके हैं। 2017 में जब सतना नगर निगम स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित हुआ तो रहवासी बड़े-बड़े सपने देखने लगे। उनमें अच्छे दिन और अच्छे शहर की उम्मीद जगी पर हकीकत इसके विपरीत थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया जनता के स्मार्ट सिटी के सपने टूटते गए। कारण, जनप्रतिनिधियों की उदासीनता एवं प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली के चलते प्रस्तावित 1530 करोड़ के कार्य धरातल पर उतर ही नहीं पाए। अफसरों को दो साल तो योजना बनाने और जमीन तलाशने में बीत गए।
सतना स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट प्रदेश के अन्य छह स्मार्ट शहरों से बिल्कुल अलग है। भोपाल, इंदौर सहित सभी शहरों में शहर के रिहायशी क्षेत्र को ही स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना है, लेकिन सतना में स्मार्ट सिटी का कार्य दो पार्ट में होना है। एक पैन सिटी (मौजूदा शहर) और दूसरा एबीडी (एरिया बेस्ड डेवपलमेंट)। शहर से बाहर जमीन अधिग्रहित कर एबीडी स्मार्ट सिटी विकसित करनी है। इस न्यू स्मार्ट सिटी बनाने के चलते ही शहर स्मार्ट सिटी के कार्य में पिछड़ गया है। स्मार्ट सिटी के कार्य की कछुआ चाल का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि 632 हैक्टेयर में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के लिए 300 हैक्टेयर सरकारी जमीन अधिग्रहित करने निगम प्रशासन को दो वर्ष लग गए। निजी जमीन अधिग्रहण की फाइल अभी भी स्वीकृति के लिए भोपाल में अटकी है। जमीन अधिग्रहण एवं निर्माण कार्य शुरू कराने में प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण सतना स्मार्ट सिटी रैंकिंग में प्रदेश के सात स्मार्ट शहरों में सबसे पीछे तथा देश में 64वें स्थान पर पहुंच गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा हाल ही में जारी 16 नगर निगमों के कार्यों की रैंकिंग में भी सतना की शर्मनाक स्थिति रही। स्वच्छता अभियान, अमृत योजना और स्मार्ट सिटी में सतना फिसड्डी रहा। प्रदेश की 7 स्मार्ट सिटी वाले शहरों में सतना नगर निगम 1.34 अंक के साथ आखिरी पायदान पर रहा। ऐसी प्रगति पर 2022 तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट कैसे पूरा होगा, यह सोचनीय बात है।
ऐसे रहे शुरू के दो साल
दो साल तक स्मार्ट सिटी का कार्य योजना बनाने तक सीमित रहा। निर्माण कार्य शुरू करने की बता की जाए तो सिर्फ कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का निर्माण कार्य ही जमीन पर उतर पाया। धीमी प्रगति का अनुमान ऐसे समझ सकते हैं कि प्रदेश और केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी विकास के लिए दो वर्ष में सतना को 71 करोड़ रुपए दिए पर प्रशासन मात्र 8 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया।
तीसरे साल दिखी कुछ तेजी
तीसरे साल स्मार्ट सिटी के कार्यों ने गति पकड़ी। निगमायुक्त ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते हुए जमीन अधिग्रहण में अटके न्यू स्मार्ट सिटी की जगह शहर को स्मार्ट बनाने की पहल की। परिणाम, प्रोजेक्ट के तहत शहर विकास में खर्च होने वाले 285 करोड़ में से लगभग 150 करोड़ के कार्य प्रगति पर हैं।
सफाई में हर माह एक करोड़ खर्च फिर भी शहर गंदा
शहर की लचर सफाई व्यवस्था एवं सड़कों पर लगे कचरे के ढेर स्मार्ट हो रहे शहर की जनता को मुंह चिढ़ा रहे। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को देश का नंबर एक स्वच्छ शहर बनाने के लिए निगम प्रशासन हर वर्ष तैयारियों में लाखों रुपए बहा रहा, हर माह सफाई पर एक करोड़ रुपए खर्च हो रहे, इसके बावजूद न जनता जागरूक हो रही और न कचरा कम हो रहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सितंबर में प्रदेश के 16 नगर निगमों के कामकाज का आकलन करते हुए उनकी रैंकिंग जारी की है। इसमें स्वच्छता के मामले में सतना की स्थिति खराब रही। साफ-सफाई एवं कचरा प्रबंधन में शहर को 100 में से मात्र 22.92 अंक मिले। सतना प्रदेश के 16 नगर निगमों में स्वच्छता के मामले में आखिरी पायदान पर रहा।
तीन स्कूल स्मार्ट, जल्द बदलेगी सात चौराहों की सूरत
स्मार्ट सिटी के सीईओ का पूरा ध्यान शहर विकास पर है। शहर के 7 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करना था। इसमें से तीन स्कूलों के कायाकल्प का कार्य पूरा हो चुका है। शहर के 33 में से सात चौराहों को स्मार्ट बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सेमरिया चौक, सर्किट हाउस, सिविल लाइन, धवारी चौराहा, कोतवाली चौराहा, पतेरी तिराहा तथा संतोषीमाता तालब तिराहे को स्मार्ट बनाने का कार्य प्रगति पर है। शहर के इन मुख्य चौराहों पर स्मार्ट पोल, ट्रैफिक सिग्नल, सीसीटीवी कैमरे तथा चौड़ीकरण का कार्य 30 नवंबर तक पूरा हो जाएगा। मुख्य मार्ग सीसीटीवी की निगरानी में आने एवं टै्रफिक व्यवस्था की मॉनीटिरंग होने से शहर की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था सुधरने की उम्मीद बंधी है।
Published on:
31 Oct 2019 05:05 pm
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