
Sex ratio in Satna District madhya pradesh
विक्रांत दुबे @ सतना। 'बेटी तो है जग की जननी, हमें रक्षा अब इसकी करनी', 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे स्लोगन अब लोगों की समझ आने लगे हैं। लोगों ने इन पर अमल करना भी शुरू कर दिया है। शहरों के मुकाबले गांव में बेटियों की चाह तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में जिले से केंद्र व राज्य सरकार को भेजी गई लिंगानुपात की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट की माने तो जिले में वर्ष 2017-18 में 38,781 बच्चों को जन्म हुआ। जिनमें 20,175 लड़के और 17,575 बेटियां शामिल हैं। वर्ष 2016-17 के मुकाबले लिंगानुपात में भी वृद्धि हुई है। आकड़ों की बात करें तो लिंगानुपात में सालाना वृद्धि हो रही है।
गांव में बेटियों की चाह ज्यादा
शहर के मुकाबले गांवों में बेटियों की चाहत ज्यादा है। रिपोर्ट भी इसी हकीकत को बयां कर रही है। वर्ष 2017-18 में सोहावल (सतना) विकासखण्ड लिंगानुपात के मामले में जिले में सबसे निचले पायदान पर है। यहां जिलेभर में सबसे कम लिंगानुपात 887 है। बेटियों की जिले में सबसे ज्यादा चाह अमरपाटन में है। यहां का लिंगानुपात जिले में सर्वाधिक 994 है। यानी वर्ष 2017-18 में प्रति हजार पुरुष के मुकाबले 994 बेटियों ने जन्म लिया। इसी प्रकार उचेहरा का 978, रामपुर बाघेलान का 968, मझगवां का 963, मैहर का 949, नागौद का 914 और रामनगर का लिंगानुपात 901 है।
सतना में घट रही बेटियों की चाहत
जिले के ग्रामीण अंचल में बेटियों की चाह में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। वहीं जिला मुख्यालय सोहावल (सतना) विकासखण्ड में बेटियों की चाहत घट रही है। रिपोर्ट की माने तो वर्ष 2016-17 में सोहावल (सतना) का लिंगानुपात 902 था, जो कि वर्ष 2017-18 में घटकर 887 हो गया। इसके उल्टे ग्रामीण अंचल में बेटियों की चाह बढ़ रही है। वर्ष 2016-17 में अमरपाटन का 902, उचेहरा का 892, रामपुर बाघेलान का 904, मझगवां का 927, मैहर का 913, नागौद का 942 और रामनगर का लिंगानुपात 916 था। सभी विकासखण्डों के लिंगानुपात में वृद्धि दर्ज की गयी।
विकासखण्डवार लिंगानुपात
विकासखण्ड लड़के बेटियां लिगांनुपात
सोहावल (सतना ) 8676 7697 887
अमरपाटन 1095 1089 994
उचेहरा 1114 1090 978
नागौद 1886 1705 914
रामपुर बाघेलान 1018 986 968
रामनगर 1167 1052 901
मैहर 2882 2735 949
मझगवां 2337 2252 963
(वर्ष २2017-18 का लिंगानुपात)
सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का व्यापक असर हुआ है। इससे जागरुकता तेजी से बढ़ रही है, लोग अब बेटी-बेटियों में अंतर नहीं समझ रहे हैं। इसके अलावा योजनाएं (लाडली लक्ष्मी, कन्यादान, विवाह सहायता सहित अन्य) भी लिंगानुपात की वृद्धि में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का सख्ती से पालन का भी सकारात्मक असर पड़ रहा है।
- डॉ एसबी सिंह, सिविल सर्जन
Published on:
12 May 2018 06:38 pm
बड़ी खबरें
View Allसतना
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
