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पुलिस ने 12 साल तक हत्या के मुख्य आरोपियों को बचाए रखा, अब एजीपी ने कोर्ट में कहा-भूलवश मेमोरेंडम संलग्न नहीं किए

बहुचर्चित शिवम हत्याकांड: परिजनों का आरोप- वारदात में शामिल मुख्य सूत्रधारों को नहीं बनाया गया आरोपी

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shivam murder case : Police saved the main accused of murder for 12 year

shivam murder case : Police saved the main accused of murder for 12 year

सतना. 2007 में हुए बहुचर्चित 11 वर्षीय मासूम शिवम हत्याकांड मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। हत्या के मुख्य आरोपियों को पुलिस ने संरक्षण देकर 12 साल तक बचाए रखा। शुक्रवार को एजीपी गिरजेश प्रसाद पाण्डेय ने द्वितीय अपर सत्र न्यायालय को आवेदन देकर कहा है कि भूलवश आरोपियों के मेमोरेंडम संलग्न नहीं हैं। न्याय निर्णय के लिए मेमोरंडम का प्रकरण प्रस्तुत करना आवश्यक है। उन्होंने अभियोजन का आवेदन स्वीकार कर प्रकरण में मेमोरेंडम लेने का अनुरोध किया है। इधर, परिजनों का आरोप है कि अपहरण, हत्या की वारदात में शामिल मुख्य सूत्रधारों को आरोपी तक नहीं बनाया गया।

ऐसे हुआ खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपी स्मोंटी सिंह (20) पिता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि 29 जनवरी 2007 की शाम 5:30 बजे बांधवगढ़ कॉलोनी निवासी शिवम मिश्रा (11) पिता मृदुलचंद मिश्रा स्कूल बस से घर जाने के लिए बांधवगढ़ चौराहे पर उतरा। वहां पर पहले से खड़े संजू तिवारी ने शिवम को अपनी बाइक पर बैठाया और कुछ दूर जाकर डिप्पल श्रीवास्तव, विकास सिंह को बाइक पर बैठा कर भाग गया। मैहर रोड स्थित क्रशर के पास संजू ने बाइक विकास को दे दी। विकास और डिम्पल शिवम को लेकर मैहर की ओर रवाना हो गए। उन्होंने शिवम का स्कूल बैग सतना नदी में फेंक दिया। मैहर पहुंचकर शिवम के घर एसटीडी से फोन कर दस लाख रुपए की फिरौती मांगी। इसके बाद तीनों शिवम को लेकर बदेरा होते हुए इंदवार के जंगल पहुंचे। वहां पर शिवम रोने लगा और आरोपियों से बोला कि संजू अंकल ने मुझे पकड़ कर आप लोगों को दिया है। तब पकड़े जाने के डर से 30 जनवरी 2007 को सेजवाही के जंगल में डिम्पल श्रीवास्तव शिवम का गला दबाकर मारने लगा। उसी समय एक राहगीर साइकिल से आ रहा था। शिवम की रोने की आवाज सुनकर वह रुक गया। वहां उसने मुझे देखा और गांव की ओर चला गया। उस दौरान मंै बाइक से निगरानी करता रहा। कुछ देर बाद विकास सिंह आया और उसने एक बॉटल में बाइक से पेट्रोल निकाला। आसपास से लकडि़या इक_ी की और शिवम के शव पर पट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके बाद तीनों माोटर साइकिल से मौके से भाग खड़े हुए।

डीएनए जांच से पता चला था कि अधजला शव शिवम का है

आरोपियों के मुताबिक, शिवम के शव को पेट्रोल डालकर जलाया गया पर बॉडी पूरी तरह नहीं जल पाई।7 फरवरी को उमरिया पुलिस को इंदवार जंगल से मासूम का अधजला शव मिला। पुलिस ने शिनाख्त के लिए माता-पिता को शव नहीं दिखाया बल्कि कपड़े दिखाकर पहचान करने को कहा। इसके बाद डीएनए के लिए बॉडी के अवशेष सागर, हैदराबाद भेजे गए। 28 मई 2007 को डीएनए रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शव शिवम का था।


सितंबर में चालान, मुख्य आरोपियों का नाम तक नहीं
पुलिस ने सितंबर 2007 में डिम्पल श्रीवास्तव मुख्त्यारगंज सतना, पुष्पेंद सिंह सोहागपुर रोड शहडोल, पिंकू उर्फ पुष्पेंद्र सिंह बजरंग नगर रीवा, स्मोंटी सिंह अनंतपुर और विकास सिंह नेहरू नगर रीवा के खिलाफ भादवि की धारा 364 ए, 302, 201, 120 बी के तहत न्यायालय में चालान पेश किया गया। परिजनों का आरोप है कि अपहरण और हत्या के मुख्य सूत्रधार नितेश उर्फ पिंटू मिश्रा पिता रामचंद मिश्रा (मृतक शिवम का रिश्ते का भाई ) और संजू तिवारी निवासी मुख्त्यारगंज हाल मुकाम मनेंद्रगढ़ छग हैं। इनके द्वारा ही हत्या और अपहरण की पांच अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची गई पर पुलिस ने मुख्य सूत्रधारों को आरोपी तक नहीं बनाया।

एनकॉउंटर में मारा गया डिम्पल

पुलिस द्वारा बनाए गए पांच आरोपियों में दो की मौत हो चुकी है। इनमें मुख्त्यारगंज निवासी डिम्पल श्रीवास्तव का उप्र पुलिस ने 23 मार्च 2007 को दारागंज क्षेत्र इलाहाबाद में एनकाउंटर कर दिया था। दूसरे आरोपी पुष्पेंद्र सिंह निवासी सोहागपुर रोड शहडोल की भी मृत्यु हो चुकी है। पुष्पेंद्र रिटायर्ड डीएसपी पीके सिंह का पुत्र था।

सरेंडर करने के बाद हुआ खुलासा
शिवम के अपहरण और हत्या में स्मोंटी सिंह रीवा कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इसके बाद स्मोंटी से पुलिस द्वारा पूछताछ की जाती रही। उस दौरान शिवम के अपहरण और हत्या में शामिल अन्य आरोपियों के नाम का खुलासा किया। इसके बाद पुलिस ने सितंबर 2007 में चालान पेश किया।