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sidhi: 1600 स्कूलों में से महज 716 में शुरू हो पाई वाटर सप्लाई की सुविधा

करोड़ो खर्च, फिर भी स्कूलों में नहीं बन पा रही रनिंग वाटर की सुविधा-जलजीवन मिशन के तहत स्कूलों में रनिंग वाटर सुविधा बहाल करने पानी की तरह बहाया गया पैसा-कहीं मोटर खराब तो कही अन्य तकनीकी समस्या से नहीं हो पा रही पानी की सप्लाई-पीएचई की रिपोर्ट के बाद विभागीय सर्वे में खुलासा

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sidhi: out of 1600 schools only 716 started water supply facility

sidhi: out of 1600 schools only 716 started water supply facility

सीधी। शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में रनिंग वाटर सुविधा बहाल करने शासन स्तर से पानी की तरह पैसा गया। लेकिन अभी स्कूलों में रनिंग वाटर की सुविधा बहाल नहीं हो पाई है। इस बार स्कूलों में रनिंग वाटर सुविधा बहाल करने की जिम्मेदारी जल जीवन मिशन के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग को सौंपी गई थी, लेकिन यहां से भी लापरवाही का ही आलम रहा। अभी तक जिले की 1600 स्कूलों में से महज 716 स्कूलों में ही रनिंग वाटर की सुविधा बहाल हो पाई है। जबकि अब नया शैक्षणिक शुरू होने वाला है। ऐसे में इस सत्र की शुरूआत में भी छात्र-छात्राओं के साथ ही स्कूल प्रबंधन को पानी के लिए परेशान होना पड़ेगा।
बताते चलें कि जिले की समस्त शासकीय स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में रनिंग वाटर की सुविधा बहाल करने की जिम्मेदारी जल जीवन मिशन के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग को सौंपी गई थी। विगत माह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग द्वारा जिले की 1600 शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट जिला शिक्षा केंद्र में सौंपी गई। जिला शिक्षा केंद्र अधिकारियों द्वारा जब स्कूलों में इसका सत्यापन कराया गया और समीक्षा की गई तो पाया गया कि 1600 स्कूलों में से अभी तक महज 716 स्कूलों में ही जल जीवन मिशन के तहत वाटर सप्लाई का कार्य पूर्ण हो पाया है। 238 स्कूलों में कार्य अपूर्ण है, 302 स्कूलों में पाइप लाइन आदि छतिग्रस्त हैं, वहीं 344 स्कूलों में अभी तक कार्य प्रारंभ ही नहीं किया गया है।
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पेयजल के लिए फिर होगा परेशान-
स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू होने वाला है। विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी स्कूलों में वाटर सप्लाई का कार्य अधूरा व अपूर्ण होने से छात्र-छात्राओं के साथ ही स्कूल प्रबंधन को पानी के लिए परेशान होना पड़ेगा। सबसे बड़ी समस्या स्कूलों में सुविधा घरों के उपयोग को लेकर है। सुविधा घरों में रनिंग वाटर की सुविधा न होने से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। रनिंग वाटर की सुविधा के अभाव में सुविधा घर गंदगी से पट जाते हैं। ग्रामीण अंचलों में इनकी सफाई के लिए स्वीपर न मिलने से सफाई भी नहीं हो पाती, ऐसे में स्कूल प्रबंधन द्वारा सुविधा घरों को ताले में कैद कर दिया जाता है।
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नहीं दिखाई जा रही गंभीरता-
स्कूलों में सप्लाई सुविधा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। दो साल पहले ही जल जीवन मिशन के तहत शासन स्तर से स्कूलों में वाटर सप्लाई का कार्य पूर्ण करने की जिम्मेदारी पीएचई विभाग को सौंपी गई थी। लेकिन पीएचई विभाग द्वारा कार्य को पूर्ण कराने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। जिन संविदाकारों को कार्य पूर्ण कराने का टेंडर दिया गया था, उनकी ओर से भी जमकर लापरवाही की गई। जिसका परिणाम यह है की करीब 55 फीसदी स्कूलों में वाटर सप्लाई का कार्य बहाल नहीं हो पाया है।
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जलजीवन मिशन अंतर्गत स्कूलों में वाटर सप्लाई के प्रगति की विकासखंडवार स्थिति-
विकासखंड - पूर्ण - अपूर्ण - छतिग्रस्त - अप्रारंभ - कुल
कुसमी - 124 - 38 - 15 - 44 - 221
मझौली - 131 - 70 - 56 - 48 - 305
रामपुर नैकिन - 169 - 64 - 42 - 77 - 352
सीधी - 152 - 33 - 109 - 175 - 469
सिहावल - 140 - 33 - 80 - 00 - 253
योग - 716 - 238 - 302 - 344 - 1600
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वर्जन-
........जल जीवन मिशन के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में वाटर सप्लाई के प्रगति की रिपोर्ट पीएचई विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई थी। जिसका सत्यापन कराकर समीक्षा की गई जिसमें पाया गया कि 1600 स्कूलों में से महज 716 में ही कार्य पूर्ण है। शेष स्कूलों में कहीं कार्य अपूर्ण है तो कहीं पाइप लाइन आदि छतिग्रस्त है। 344 स्कूलों में तो कार्य प्रारंभ ही नहीं हुआ है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट पीएचई विभाग को सौंपी जा चुकी है, और कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के लिए पत्राचार भी किया गया है।
एसपी तिवारी, एसडीएम जिला शिक्षा केंद्र सीधी
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