सीधी। जिले की महाविद्यालयों सहित प्रदेश भर में छात्र संघ चुनाव प्रतिवर्ष टाले जा रहे हैं। शैक्षणिक कैलेंडर में छात्र संघ चुनाव को लेकर तिथियां तो निर्धारित की जाती हैं, लेकिन चुनाव नहीं कराये जा रहे हैं। प्रदेश की कॉलेजों में छ: साल पहले अप्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव हुए थे। वहीं प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए हुए करीब 20 साल हो गए हैं। लंबे समय से छात्र संगठन प्रदेश के कॉलेजों में प्रत्यक्ष रूप से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार छात्रसंघ चुनाव को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
कॉलेजों छात्र संघ चुनाव को लेकर पत्रिका द्वारा शनिवार को जिले के अग्रणी महाविद्यालय संजय गांधी स्मृति शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय सीधी में छात्र-छात्राओं के टॉक-शो का आयोजन किया गया। टॉक-शो में छात्र-छात्राओं ने चुनाव को लेकर बेवाकी से राय रखी। ज्यादातर छात्र-छात्राएं चुनाव कराये जाने के पक्ष में अपनी बात रखी तो कुछ छात्रों ने चुनाव न कराये जाने के पक्ष में बोला। छात्रों का कहना था कि राजनीति का पहली पाठशाला छात्रसंघ चुनाव है, यहीं से युवाओं में राजनीति का अंकुरण होता है, इसलिए कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराया जाना अति आवश्यक है। टॉक-शो के आयोजन में कंप्यूटर विज्ञान विभाग के संकाय सदस्य प्रमोद कुमार द्विवेदी व छात्र नेता शिवम शुक्ला का विशेष योगदान रहा।
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…….कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव कराया जाना चाहिए। इससे छात्रों में नेतृत्व क्षमता का विकास होगा। राजनीति में रूचि रखने वाले छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अंकिता साहू, छात्रा
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…….लंबे समय से कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव नहीं हो रहे हैं। छात्र संगठन इसकी लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन चुनाव के आयोजन में सरकार रूचि नहंीं दिखा रही है।
अंशु सिंह, छात्रा
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…….आवश्यक नहीं है कि हर छात्र या छात्रा की चुनाव में रूचि रहती है, लेकिन राजनीति में रूचि रखने वाले छात्र-छात्राओं का चुनाव न होने से नुकसान हो रहा है।
स्वाति मिश्रा, छात्रा
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……..कॉलेज ही युवाओं का प्रमुख प्लेटफार्म है, यहां से छात्र-छात्राएं अपने कैरियर का निर्धारण करते हैं। राजनीति भी एक कैरियर है और छात्र संघ चुनाव उसका प्रमुख माध्यम।
रिस्मिता मिश्रा, छात्रा
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……..कॉलेज में छात्र-छात्राओं की समस्याओं के समाधान व हितों के लिए आवाज उठाने का प्रमुख माध्यम भी छात्र संघ के पदाधिकारी होते हैं। चुनाव न होने से वह नेतृत्व नहीं मिल रहा।
अंशिका सिंह, छात्रा
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………देश के जो भी बड़े नेता हैं, ज्यादातर के राजनैतिक कैरियर की शुरूआत छात्र संघ चुनाव से ही हुई थी। लंबे समय से छात्र संघ चुनाव न होना राजनीति की पाठशाला बंद करने जैसा है।
शिवम सिंह, छात्र
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……..छात्रों के हितों और महाविद्यालय की समस्याओं को उठाने के लिए एक नेतृत्व होना चाहिए। छात्रसंघ के नेता उस नेतृत्व का निर्वहन करते हैं। चुनाव न होने से नेतृत्व क्षमता का हनन हो रहा है।
विक्रम ङ्क्षसह, छात्र
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……..छात्र संगठन प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कर रहे थे, यहां तो सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली से भी चुनाव कराना बंद कर दिया। इसके लिए आवाज उठनी चाहिए।
अजीत गुप्ता, छात्र
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…….छात्रसंघ चुनाव राजनीति की पहली पाठशाला है। इससे नेतृत्व क्षमता के साथ ही व्यक्तित्व विकास भी होगा। छात्र संघ के माध्यम से छात्र अपनी समस्याओं को बुलंदी से उठा सकेंगे।
अर्पित कुमार पाठक, छात्र
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……..मेरे नजरिये में छात्र संघ चुनाव कराया जाना उचित नहीं है। चुनाव से पढ़ाई प्रभावित होती है, छात्रों के बीच विवाद होता है। कई बार तो बड़े विवाद की स्थिति बन जाती है। सरकार ने सोच समझकर ही निर्णय लिया होगा।
शिवांग सिंह, बघेल, छात्र
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20 साल पहले हुए थे प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव-
……प्रदेश के कॉलेजों में 2017 में अप्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव कराए थे। उस समय छात्र संगठनों ने राज्य सरकार से चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने की मांग की थी। इसे खारिज कर दिया गया था। प्रत्यक्ष प्रणाली से आखिरी बार 2003 में छात्र संघ चुनाव हुए थे। तब से अब तक लगातार प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाने की मांग की जा रही है।
शिवम शुक्ला, छात्र नेता
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सरकार के निर्णय का पालन करेंगे-
……..छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार जो निर्णय होगा, उसका पालन करेंगे। शैक्षणिक कैलेंडर में तो छात्रसंघ चुनाव को लेकर निर्धारण किया गया है। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई भी दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अभी यह भी तय नहीं हुआ है कि चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे या अप्रत्यक्ष प्रणाली से।
डॉ.एआर सिंह, प्रचार्य एसजीएस कॉलेज सीधी
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