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sidhi: वनाधिकार से वंचित हो रहे आदिवासी परिवार, अब तक महज 27 फ ीसदी को मिला पट्टा

विभागीय अमले के ढुलमुल रवैया से चक्कर काटने को मजबूर आदिवासी परिवार-गैर आदिवासी परिवारों के ढाई हजार दावों में महज एक मान्य-वन भूमियों में काबिज परिवार वनाधिकार पट्टे का दावा स्वीकार किये जाने लगा रहे चक्कर

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tribal dominated villages

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सीधी। पैत्रिक रूप से वन भूमियों पर काबिज आदिवासी एवं गैर आदिवासी परिवारों को वन भूमि का पट्टा दिलाने के लिए सरकार द्वारा अधिनियम तो बना दिया गया है। लेकिन नियम कायदों से अनजान आदिवासी परिवार वनाधिकार अधिनियम के तहत वन भूमि का पट्टा पाने से वंचित हो रहे हैं। जिले में वनाधिकार के तहत सीधी जिले में प्रारंभ से अब तक कुल 9529 दावे किये गए थे, जिसमें से आदिवासी विकास विभाग द्वारा 2580 दावे स्वीकृत किये जाकर
वनाधिकार पत्र का वितरण किया गया है। प्राप्त दावों में से 73 फीसदी दावे अमान्य कर दिये गए हैं। आदिवासी परिवार अधिनियम के तहत पट्टा पाने विभागीय कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें आवश्यक जानकारी नहीं मिल पा रही है।
विभागीय आंकड़े के अनुसार सीधी जिले में अब तक अनुसूचित जन जाति के 6346 लोगों द्वारा वनाधिकार के तहत वन अधिकार पत्र के लिए दावा किया गया था। इसमें से 2527 दावे परीक्षण समिति द्वारा अमान्य कर दिये गए। शेष 2019 दावों को स्वीकृत किया जाकर वन अधिकार पत्र का वितरण किया गया है। वहीं गैर आदिवासी यानि अन्य पिछड़ा वर्ग के 2528 लोगों द्वारा दावे किये गए थे, इनमें से महज 1 दावा ही मान्य किया गया है, शेष 2527 दावे अमान्य कर दिये गए हैं। इसके साथ ही सामुदायिक रूप से 655 दावे किये गए थे, जिसमें से 560 दावे मान्य किये जाकर वन अधिकार पत्र का वितरण किया जा चुका है, शेष 95 दावे अमान्य कर दिये गए हैं।
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अमान्य दावों के पुनर्विचार की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में-
शासन स्तर से निरस्त आवेदनों को वन मित्र पोर्टल पर अपलोड कर पुनर्विचार करने का अक्टूबर 2019 में निर्देश जारी किया गया था। इस निर्देश के बाद आदिवासी व गैर आदिवासी व्यक्तियों के 6949 आवेदन पोर्टल पर डाले गए। विभागीय अधिकारियों की माने तो इनमें से अभी तक एक भी पट्टा स्वीकृत नहीं हो पाया है। अधिकारियों की दलील है कि अभी वनमित्र पोर्टल पर किए गए आवेदनों का परीक्षण चल रहा है। गौरतलब है कि आवेदनों का परीक्षण वन अधिकार समिति, ग्राम सभा और उपखंड स्तर पर किया जा रहा है।
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देरी की वजह-
*आवेदन की तीन स्तर पर परीक्षण की प्रक्रिया
*वन व राजस्व अमले द्वारा सीमांकन में देरी
*वरिष्ठ अधिकारियों की व्यस्तता की वजह
*आवेदकों में प्रक्रिया की जानकारी का अभाव
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वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त, निराकृत एवं अमान्य दावों की स्थिति-
समुदाय - प्राप्त दावे - मान्य दावे - अमान्य दावे
अजजा - 6346 - 2019 - 4327
ओबीसी - 2528 - 01 - 2527
सामुदायिक- 655 - 560 - 95
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सभी दावों का हो चुका है निराकरण-
वनाधिकार अधिनियम के तहत हमारे कार्यालय में प्राप्त सभी दावों का निराकरण किया जा चुका है। प्राप्त दावों में से करीब 73 फीसदी दावे परीक्षण उपरांत मान्य पाए गए, उनका वन अधिकार पत्र भी वितरित किये जा चुका है। रही बात वन मित्र पोर्टल की तो उनका परीक्षण चल रहा है। परीक्षण उपरांत मान्य दावों को वन अधिकार पत्र का वितरण किया जाएगा।
राजेश सिंह परिहार, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग सीधी
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