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MP के इस जिले में अतिकम वजन के 4400 बच्चे, एनआरसी पहुंचे सिर्फ 1100

विशेष पोषण अभियान की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, सीडीपीओ दफ्तर में बैठ कर रहे निगरानी
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सतना

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Suresh Mishra

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Updated: 20 Aug 2018, 1:14 PM IST

Special Nutrition Campaign Report in satna

Special Nutrition Campaign Report in satna

सतना। महिला एवं बाल विकास महकमा जिले के माथे से कुपोषण का कलंक मिटाने में कितना गंभीर है, इसका खुलासा विशेष पोषण अभियान रिपोर्ट में हुआ है। जिलेभर में हर माह चार हजार से अधिक मासूम अतिकम वजन के चिह्नित किए जा रहे हैं पर इन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने में जमकर लापरवाही की जा रही है। रिपोर्ट की मानें तो 7 माह में महज 1108 कुपोषित एनआरसी में दाखिल कराए जा सके हैं। अन्य कुपोषितों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

महिला बाल विकास महकमे के मैदानी अमले को कुपोषित मासूमों के चिह्नाकन और पोषण पुनर्वास केंद्र में दाखिल कराने का जिम्मा सौंपा गया है। इनके कामकाज की निगरानी के लिए सीडीपीओ (ब्लॉक स्तर पर परियोजना अधिकारी) सहित सुपरवाइजर भी तैनात किए गए हैं। लेकिन कुपोषित मासूमों को एनआरसी में भर्ती कराने दोनों स्तर पर लापरवाही की जा रही है। जानकारी प्रशासन सहित महकमे के अधिकारियों को है पर संरक्षण के चलते सभी चुप्पी साधे हैं।

37 हजार मासूमों का वजन कम
अमले द्वारा हर माह केंद्रों में बच्चों का वजन किया जाता है। जुलाई में 37903 मासूम कम वजन और 4425 अतिकम वजन के मिले। लापरवाही के चलते कुपोषण का यह ग्राफ अनेक योजनाओं और अभियानों के बाद कम नहीं हो पा रहा। स्थिति जस की तस बनी है।

एनआरसी के बेड खाली
कुपोषितों को भर्ती कराने के लिए जिले में ९ पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। उनकी बेड क्षमता 100 मासूमों के दाखिल करने की है। महिला बाल विकास और स्वास्थ्य महकमे का मैदानी अमला कुपोषित मासूमों के उपचार में लापरवाही बरत रहा है। अधिकांश समय केंद्रों के 70 फीसदी से अधिक बेड खाली रहते हैं।

सिर्फ कागजी खानापूर्ति
कलेक्टर ने महिला बाल विकास और स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदारों को निर्देश दिए थे कि जिले के किसी भी एनआरसी के बेड खाली नहीं रहने चाहिए। सीडीपीओ को मैदानी अमले के कामकाज की निगरानी के निर्देश दिए गए थे। लेकिन निर्देशों को भी दरकिनार कर दिया गया है। निगरानी के नाम पर दफ्तर में बैठकर कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है।

खास-खास
- 14 कुल परियोजनाएं जिले में
- 3034 आंगनबाड़ी केंद्र जिले में
- 2312 आशा कार्यकर्ता जिले में
- 09 पोषण पुनर्वास केंद्र
- 100 एनआरसी की बेड क्षमता

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