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देश के हर युद्ध में मध्यप्रदेश के इस जिले ने दी शहादत, यहां पढ़ें शहीदों की कुर्बानी

देश के हर युद्ध में मध्यप्रदेश के इस जिले ने दी शहादत, यहां पढ़ें शहीदों की कुर्बानी

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सतना

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Suresh Mishra

Aug 15, 2018

story of satna chund village veer shahido ki kurbani

story of satna chund village veer shahido ki kurbani

सतना। देश के लिए जब भी शहादत की बात आती है तो सतना के रहवासी जान की बाजी लगाने से पीछे नहीं हटते। भारतीय सेना में तैनात जिले के जवानों ने हमेशा ही दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं। जब भी मौका मिला, देशहित के लिए प्राण तक न्योछावर कर दिया। देश की सुरक्षा, स्वतंत्रता, अखंडता के लिए लड़े गए हर युद्ध में यहां के रणबांकुरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत-चाइना, भारत-पाक, कारगिल सहित ऑपरेशन मेघदूत में भी सतना के जवानों ने शहादत दी है। पाक के साथ 1999 में हुए कारगिल युद्ध में जिले से 6 जवान शहीद हुए थे।

हर युद्ध में योगदान
देश की रक्षा के लिए जब-जब कदम आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ी है, सतनावासियों ने कुर्बानी दी है। हर युद्ध में सतना के सपूतों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। देश के लिए अपने को बलिदान भी कर दिया। 1962 में चाइना वार, 1965 में इंडो-पाक वार, 1971 में इंडो-पाक वार, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन रक्षक व ऑपरेशन विजय सहित देश के लिए युद्ध में रणबांकुरों ने योगदान दिया।

ऑपरेशन विजय में फहराया तिरंगा
1999 में हुए कारगिल युद्ध में देश के जवानों ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए और ऑपरेशन विजय पर फतह हासिल की। इसमें सतना के सपूत भी शामिल थे। 26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना के जवानों ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ऑपरेशन विजय को सफलता पूर्वक अंजाम दिया था।

6 महानायकों ने प्राण न्योछावर किए
पाकिस्तान से भारतीय सीमा में घुसे घुसपैठियों से युद्ध के दौरान भारत ने 527 से अधिक वीर योद्धाओं की कुर्बानी दी थी। इसमें सतना के सैकड़ों सपूतों ने योगदान दिया। सतना के 6 महानायक ऐसे भी रहे, जिन्होंने प्राण न्योछावर कर दिया।

एक गांव के तीन शहीद
कारगिल युद्ध में जिले से 6 जवान शहादत को प्राप्त हुए थे। इसमें से तीन शहीद एक ही गांव चूंद के हैं। समर बहादुर सिंह, कन्हैयालाल सिंह व बाबूलाल सिंह के जज्बे की कहानी आज भी गांव के लोग सुनाते हैं। इस गांव को सैनिकों का गांव भी कहा जाता है। ढाई सौ घर वाले इस गांव के करीब 400 लोग भारतीय सेना में हैं।

शहीद की संतान भी देश सेवा को आतुर
शहीदों के परिवार के लिए देशहित सर्वोपरि है। कई ऐसे परिवार हैं, जिनके बेटे युद्ध में शहीद हुए। बावजूद उन्होंने परिवार के अन्य सदस्य को सेना में जाने से नहीं रोका। शहीद समर सिंह व कन्हैया लाल सिंह के बेटे भारतीय सेना के अंग हैं।

ये भी हुए शहीद
- इंडो-चाइना वार 1962 : सुग्रीव (सिपाही), बद्री प्रसाद (सिपाही)
- इंडो-पाक वार 1965 : वंशराज सिंह (सिपाही), राम पाल सिंह (सिपाही)
- इंडो-पाक वार 1971: दुर्गा प्रसाद (सिपाही), छोटे लाल सिंह (सिपाही)
- ऑपरेशन मेघदूत : लालजी सिंह (सिपाही)

ये हैं कारगिल के वीर शहीद
- समर बहादुर सिंह (सिपाही), चूंद, तहसील रामपुर
- कन्हैया लाल सिंह (नायक), चूंद, तहसील रामपुर
- बाबूलाल सिंह (नायक), चूंद, तहसील रामपुर
- केपी कुशवाहा (गनर) महुला, मेहुती, सतना
- राजेन्द्र सेन (सिपाही), करही मेदनीपुर
- शिव शंकर प्रसाद पांडेय (सिपाही), कुआं, सतना