
Story of satna doctor Dr Venkatesh Agarwal
रमाशंकर शर्मा @ सतना। पेशेवर होती जा रही दुनिया में डॉक्टर का पेशा भी अब सेवा न होकर कारोबार बन चुका है। आए दिन चिकित्सकों द्वारा मरीजों के शोषण की खबरें आती हैं। उस बीच सतना में एक ऐसा चिकित्सक भी है जो आज की तारीख में मरीजों के लिए भगवान बना हुआ है।
हम बात कर रहे हैं डॉ. व्यंकटेश अग्रवाल की। नागौद के मूल निवासी व्यंकटेश अग्रवाल एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी चिकित्सकीय सेवाएं चित्रकूट से कीं।
उनकी सेवाएं नि:शुल्क
डॉ. व्यंकटेश मूल रूप से सर्जन हैं और उनकी कुशलता का लोहा जिले ही नहीं विन्ध्य के चिकित्सक भी मानते हैं। चित्रकूट में लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने के बाद डॉ. व्यंकटेश सतना में शिफ्ट हो गए। यहां आकर भी उन्होंने मरीजों की सेवा का धर्म नहीं छोड़ा। एक निजी नर्सिंग होम में वे दो दिन अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन उनकी सेवाएं नि:शुल्क होती हैं।
ऑपरेशन के लिए अपना शुल्क भी नहीं लेते
मरीजों के परीक्षण में वे पैसे तो लेते नहीं है और अगर उन्हें यह पता चल जाता है कि मरीज दवा खरीदने की स्थिति में नहीं है तो अपने से उन्हें दवाओं की भी व्यवस्था करते हैं। कई बार मरीज के आने-जाने का भी प्रबंध कर देते हैं। उनकी सेवा भावना यहीं खत्म नहीं होती। यदि कभी किसी गरीब का वे ऑपरेशन करते हैं तो ऑपरेशन के लिए अपना शुल्क भी नहीं लेते हैं।
नाम और फोटो से परहेज
डॉ. व्यंकटेश अपनी सेवा भावना चुपचाप करते चले जा रहे हैं। लेकिन उन्हें इसके लिए मीडिया हाइप में भी आने का कोई शौक नहीं है। स्थिति यह है कि वे मीडिया के कैमरे से भी दूर रहते हैं और किसी भी तरह के इन्टरव्यू से भी परहेज करते हैं।
जब कार के आगे लेट गए थे लोग
चित्रकूट स्थित जानकीकुंड अस्पताल में अपनी सेवा दे रहे डॉ. व्यंकटेश जब अपनी बड़ी होती बेटी को देखते हुए सतना शिफ्ट होने लगे और जिस दिन वे सतना के लिए निकलने लगे तो चित्रकूट के लोग उनकी कार के आगे लेट गए। यह प्रेम देख डॉक्टर ने अपनी गाड़ी वापस मोड़ी और दो साल तक फिर वहीं रह गए।
साल में दो बार चैरिटी ऑपरेशन
डॉ. व्यंकटेश साल में दो बार हार्निया और हाइड्रोसिल का चैरिटी ऑपरेशन का शिविर लगाते हैं। शिविर पूरी तरह नि:शुल्क होता है। इसमें मरीजों को दवाओं से लेकर खाना पीना तक मुफ्त होता है। इसके अलावा वे बाहर भी विभिन्न चैरिटी कार्यक्रमों में हमेशा शामिल होते रहते हैं।
अनुकरणीय है इनकी सेवा
इनसे इलाज करा चुके एक मरीज ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मेरी आर्थिक हालत काफी खराब थी। बीमारी का इलाज ऑपरेशन से ही संभव था। जब यह बात डॉक्टर को पता चली तो उन्होंने नर्सिंग होम में न केवल ऑपरेशन किया बल्कि अपने हिस्से का एक पैसा भी नहीं लिया।
आज उन्हें देवता मानते हैं
आर्थिक हालात ज्यादा खराब होने पर नर्सिंग होम के चार्ज में भी छूट दिलाई। यह इकलौता किस्सा नहीं है। डॉ व्यंकटेश की ऐसी कहानी बताने वाले काफी लोग हैं जो आज उन्हें देवता मानते हैं। लोगों का कहना है कि काश! अन्य डाक्टर भी डॉ व्यंकटेश से प्रेरणा ले तो चिकित्सा जगत की दशा और दिशा ही बदल जाएगी।
Published on:
27 Jan 2018 12:43 pm
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