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मध्यप्रदेश के युवा वैज्ञानिक का कमाल, विश्व में दिलाई भारतीय मानकों की पहचान, कैसे तय होते है मानक, यहां पढ़ें

मध्यप्रदेश के युवा वैज्ञानिक का कमाल, विश्व में दिलाई भारतीय मानकों की पहचान, कैसे तय होते है मानक, यहां पढ़ें

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सतना

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Suresh Mishra

Jan 12, 2019

Success Story of Young scientist Raman Kumar Trivedi

Success Story of Young scientist Raman Kumar Trivedi

सतना। स्वामी विवेकानंद की पंक्ति 'कभी भी यह मत सोचो कि तुम्हारे लिए, तुम्हारी आत्मा के लिए कुछ भी नामुमकिन है।' जब हमारे भारत वर्ष के उत्पादों को गुणवत्ता के मामले में निम्नतर आंका जाता है तब यह बात हर भारतीय को खटकती है। लेकिन उसी समय स्वामी विवेकानंद के विचार सामने आ जाते है। ऐसा मानना है रीवा के वैज्ञानिक रमन कुमार त्रिवेदी पिता रमेश कुमार (32) का। वे गोविंदगढ़ के समीपी गांव नींगा भटलो में जन्मे हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर जेल मार्ग रीवा से हुई। यहां से कक्षा एक से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई की। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

पढ़ाई पूरी करते ही रमन का टीसीएस में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कैंपस सलेक्शन हो गया। नौकरी के साथ-साथ दिल्ली में कई कॉम्पटेटिव एग्जाम क्लियर किए। इसमें यूपीएससी के तीन एग्जाम शामिल हैं। दो बार रक्षा मंत्रालय के गजेटेट ऑफिसर के पद पर चयन हो चुका है। पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण इन पदों को ज्वाइन नहीं किया। इसके अलावा मध्यप्रदेश के एमपीइबी में एइ के लिए भी चयनित हुए है। ओएनजीसी जैसी कंपनी में चयन के बावजूद ज्वाइन नहीं किया। इन्होंने कॅरियर का चुनाव इस तरह किया कि इंजीनियरिंग का उपयोग भारत की उद्योग व्यवस्था, गुणवत्ता और मानकों को विश्वस्तरीय बनाया जा सके। इसलिए उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो में कॅरियर की शुरुआत बतौर वैज्ञानिक के रूप में की।

देख रहे मानक नीति एवं योजना विभाग के कार्य
भारत की राष्ट्रीय मानक संस्था, जो उपभोक्ता मामले में मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करती है। विश्वस्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व, मानकों के निर्माण क्षेत्र में काम करती है, इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो आईएसआई मार्क, सोने के आभूषणों पर हालमार्क, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर रजिस्ट्रेशन मार्क देने का भी कार्य करती है। लगभग 139 उत्पाद बिना इन चिह्नों के भारत में नहीं बिक सकते है। इन चिह्नों को देने के आधार मानक इंडियन स्टैंडर्ड होते है। वर्तमान में रमन त्रिवेदी मानक नीति एवं योजना विभाग के कार्य को देखते है। इसमें ये ऐसी नीतियों का निर्धारण करते हैं जिससे भारत में निम्न क्वॉलिटी के उत्पाद की बिक्री रोकी जा सके। चाहे वह आभूषणों की बात हो या फिर रसोई गैस, चूल्हा, कुकर, सीमेंट, सरिया, मोबाइल फोन, प्रिंटर आदि।

रमन के कॅरियर की उपलब्धि
रमन ने एनएसएस नामक भारत सरकार की योजना का सफलतापूर्वक क्रियान्वन किया है। इससे पांच सौ विशेषज्ञों का चयन कर विश्वस्तरीय मानक निर्धारण समितियों में भेजा गया है। इन विशेषज्ञों ने भारत के पक्ष को भलीभांति रखा। इन्होंने चार सौ विशेषज्ञों को मानक निर्धारण की ट्रेनिंग दी। साथ ही भारतीय मानकों के निर्माण में सक्रियता से भारत सरकार का सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 7 विश्वस्तरीय मीटिंग के भी भारत में सफलता पूर्वक आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 25 एएनएच को लाइसेंस भी प्रदान किया। इसके माध्यम से आभूषणों का परीक्षण हो रहा है। समय-समय पर भारतीय मानक ब्यूरो के आधीन विभिन्न प्रयोग शालाओं का निरीक्षण भी इनके द्वारा किया जाता है। निरीक्षण के दौरान पाई गई विसंगतियों को दूर करने के लिए भी सलाह देने का कार्य भी करते हैं। इन्होंने लक्ष्य बना लिया है कि अपने उत्पादों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए विश्वस्तरीय मानकों के निर्माण की नीतियां बनाएंगे। उसका अनुपालन भी समय समय पर सुनिश्चत करेंगे। स्मार्ट सिटी, इलेक्ट्रकल मोटर वीकल, आईओटी जैसी चीजों के मानकों के निर्माण का कार्य इनके सहयोग से शुरू हो गया है। जिससे भारत विश्व स्तरीय छवि प्राप्त कर सकेगा।