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सुषमा स्वराज का निधन, सतना ने था गहरा नाता

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की मदद से 8 साल बाद सतना के श्रीधर की हुई थी वतन वापसी

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sushma swaraj no more

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सतना. भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज अब सिर्फ यादों में रहेंगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार की रात निधन हो गया। निधन की खबर मिलते ही जिले के सियासी गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई। सुषमा का सतना से गहरा नाता रहा है। अपने राजनीतिक जीवन में वे दर्जनों बार सतना आईं। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सतनावासियों के लिए मददगार रहीं। सतना के श्रीधर कुशवाहा की वतन वापसी कराने में उनकी भूमिका ने गहरी छाप छोड़ी।

यह था मामला
दरअसल, यह मामला नवंबर 2018 में हुए बिरसिंहपुर स्कूल वाहन हादसे से जुड़ा हुआ था। हादसे में सात बच्चों की मौत हो गई थी। इसमें पगारकला निवासी शिल्पी कुशवाहा भी थी। दूसरे दिन बच्चों का अंतिम संस्कार हुआ, लेकिन शिल्पी का नहीं हो सका। पता चला कि उसके पिता श्रीधर कुशवाहा आठ साल पहले अक्टूबर 2010 में रोजगार के सिलसिले में मलेशिया गए। वहां दस्तावेजों के अभाव में फंस गए। उनकी स्थिति बंधक जैसे बनकर रह गई थी। वे परिजनों से लगातार संपर्क में थे, लेकिन वापस नहीं लौट पा रहे थे।

ट्वीट को लिया था संज्ञान
जब उनकी अनुपस्थिति में बच्ची के अंतिम संस्कार न होने की खबर मीडिया में छपी तो एक स्थानीय व्यक्ति ने खबर को तत्कालीन विदेश मंत्र सुषमा स्वराज को ट्वीट कर दिया। उन्होंने पूरे मामले को संज्ञान में लिया और मलेशिया स्थित भारतीय दूतावास को मदद के निर्देश दिए। इसके बाद दूतावास के अधिकारियों ने श्रीधर से संपर्क किया और उन्हें 1 दिसंबर को प्लेन से मलेशिया से कोलकाता लाया गया। वहां से वे हावड़ा-मुंबई मेल के माध्यम से सतना पहुंचे थे। इस तरह 8 साल बाद श्रीधर की वतन वापसी हुई थी।

24 अप्रैल को अंतिम सतना दौरा
सुषमा स्वराज ने सतना का अंतिम दौरा लोकसभा चुनाव के समय किया। वे 24 अप्रैल 2019 को सांसद गणेश सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार करने सतना पहुंची थीं। स्थानीय टाउन हाल में बुद्धिजीवियों से परिचर्चा किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि आपका एक वोट से दो काम होंगे। गणेश सिंह सांसद बन जाएंगे और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन जाएंगे। उनकी ये बात चर्चा का विषय रही।

सशक्त महिला थीं स्वराज
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आकस्मिक निधन पर सांसद गणेश सिंह ने दुख जताया। कहा, वो मेरी राजनीतिक गुरु थी। उनसे काफी कुछ सिखने को मिला। वो भारत की सशक्त व मृदुभाषी महिला नेत्रियों मे रही हैं। उनके निधन से राजनीतिक जगत में शून्यता आई है।