
swami priyanand written by nijanand sampraday source-book
सतना। शहर के श्रीराधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में भक्ति की गंगा बहाने आए हरियाणा के हिसार से आए स्वामी प्रियाशास्त्री ने निजानंद सम्पदाय के मूल ग्रंथ को लिखने का वचन लिया है। वे इस युग में सुबह पूजा-पाठ करने करने के साथ-साथ निजानंद सम्प्रदाय के मूल ग्रंथ श्री कुलजंम स्वरुप साहेब को लिखना शुरू किया है।
स्वामी प्रिया शास्त्री ने बताया कि मेरे मन में राज श्याम जी ने उपजाया और मैं अपने काम में जुट गया हूं। उन्होंने बताया कि हर सम्प्रदाय का मूल ग्रंथ होता है। इसी प्रकार निजानंद सम्प्रदाय का मूल ग्रंथ श्री कुलजम स्वरूप साहब जी है। जिसे लिखने की शक्ति हमें राज-श्यामा जी ने दी है।
दो रंगों का उपयोग
स्वामी प्रिया शास्त्री ने बताया कि लिखने में काले व लाल स्याही का उपयोग करते हैं। पूरी लेखनी स्याही के पेन से की जा रही है। 18 हजार से अधिक चौपाइयों की लिखने का मन में वचन लिया और लिखने लगे। प्रतिदिन 8 से 10 घंटे लिखते हैं। ज्ञात हो कि शास्त्री जी की लेखनी प्रिंटिग मशीन से छपने जैसी है।
एक ग्रंथ पहले लिख चुके
उन्होंने बताया कि पहले भी छोटे-छोटे ग्रंथ लिखे जा चुके हैं, लेकिन इतने बड़े ग्रंथ को लिखने की शक्ति व प्रेरणा श्री राज श्यामा जी ने दी है। उन्होंने बताया कि इस कार्य को करने में हमारे कई लोगों ने अपना हर प्रकार का योगदान दिया है। हमारे मूल ग्रंथ को कई वर्षों पहले हांथों से लकड़ी के पेन व स्याही बनाकर लिखा जाता था। अब तो सारा काम प्रिंटिंग प्रेस में होता है।
चांदी से कंवर पेज मढ़ेगा
शास्त्री की इच्छा है कि मूल ग्रंथ के पूर्ण होंने के बाद चांदी से कवर पेज मढ़वाने की इच्छा है। उन्होंने बताया कि श्रीराज-श्यामा जी ने आज तक सारी इच्छाएं पूर्ण की है यह भी मेरी इच्छा पूर्ण करेंगे। उन्होंने बताया कि किसी भी ग्रंथ को लिखने के बाद कोई अक्षर गलत होने पर उसे सुधारने में अधिक दिक्कत होती है।
Published on:
04 Jul 2018 05:43 pm
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