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ये है विंध्य के अनोखे मास्साब! जो जंगल को ले आए थे स्कूल, विद्यार्थियों से कराया था MP का पहला ऑक्सीजन सर्वे

संभाग में अकादमिक गतिविधियों में बनाई अलग पहचान

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Teachers Day 2019: Satna teacher Anjani Tripathi success story

Teachers Day 2019: Satna teacher Anjani Tripathi success story

सतना। 90 का दशक जब सतना जिले के दूरस्थ अंचल के कई विद्यालय नकल के लिये बदनाम थे, तब ऐसे ही स्कूल को हराभता करने की जुगत में एक प्राचार्य जुटे थे। अपनी पहली प्रार्थना सभा में ऋषि काल के गुरुकुल की कहानी सुनाते हुए कहा था कि पहले जंगल में विद्यालय होते थे जो आज के परिवेश में संभव नहीं है, लेकिन हम विद्यालय में जंगल ला सकते हैं। इस बात को सुनकर तब सभी चौंके थे।

1996 में विद्यालय में पदस्थापना के बाद उजाड़ से विद्यालय में पहुंचे इस प्राचार्य ने धराशायी शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शिक्षक विद्यार्थी और अभिभावक के गठजोड़ पर काम शुरू किया। शाला में बच्चों की अभिरुचि जगाने जितने बच्चे उतने पेड़ का अभियान शुरू किया और देखते ही देखते विद्यालय में सैकड़ों पौधे लग गए।

हर बच्चे का अपना पेड़ और उसे पालने की जिम्मेदारी भी उनकी। अभिभावकों से निरंतर संवाद का दौर हुआ और उजाड़ से लगने वाले विद्यालय परिसर में घने पेड़ तैयार हो गया। ये प्राचार्य थे अंजनी त्रिपाठी जो वर्तमान में रीवा संभाग के संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा हैं।

सूरज से आंख मिलाने की सीख दी

अंजनी त्रिपाठी के सामने स्कूल को हराभरा करने के बाद गुरुकुल में बहने वाली उल्टी शैक्षणिक बयार को बदलने की चुनौती थी। नकल के लिये कुख्यात होते जा रहे इस विद्यालय में बच्चों को शिक्षा रूपी सूरज से आंख मिलाने की सीख दी जाने लगी। नकल बंद होने से रिजल्ट आया 18 फीसदी। लेकिन अब हवाओं ने रुख बदलना शुरू कर दिया था। अगली परीक्षाएं हुई और परिणाम 90 फीसदी था। मंडल ने इस पर अचरज जताया और नकल का आरोप लगाकर शून्य प्रतिशत रिजल्ट कर दिया। मामला हाईकोर्ट गया। मंडल ने अपनी गलती न्यायालय में मानी। कहा प्रतिष्ठित विद्यालय है और रिजल्ट वापस सही किया। लेकिन विद्यार्थियों की बेइज्जती का बदला अभी कहा पूरा हुआ था। मामला फोरम में गया और मंडल को पांच लाख का जुर्माना हुआ।

बदल चुका था माहौल
बिरसिंहपुर क्षेत्र के जो लड़के लड़कियां बड़े शहरों में पढऩे जाते थे लौट आए। यहां पीईटी, पीपीटी, पीएमटी, पीएटी की तैयारी कराई जाने लगी। रविवार को भी कक्षाएं लगने लगीं। छात्र मेडिकल, इंजीनरिंग, कृषि, सेना में जाने लगे। पीपीटी में प्रदेश में विद्यालय के छात्र को तीसरा स्थान मिला। शिक्षक नियमित हो गए थे। बदलाव की बयार बहने लगी थी। इसी दौरान एनएसएस शिविर के माध्यम से मांजन शहीद स्थल का उद्धार कराया गया। चूंद में गांववालों के साथ विद्यार्थियों ने मिलकर शहीद स्थल का निर्माण कराया गया।

पर्यावरण का पहला सर्वे
व्यंकट 2 में बतौर रसायन शास्त्र के व्याख्याता रहे त्रिपाठी ने पर्यावरण को विद्यार्थियों के प्रयोग से जोडऩे का नवाचार किया। विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया। नगर में पेड़ों की संख्या और उनसे मिलने वाली आक्सीजन की मात्रा का सर्वे कराया। साथ ही नगर में रहने वाले लोगों की सांस लेने तथा वाहन में गैस सिलेंडर में खर्च होने वाली आक्सीजन का आंकड़ा निकाल कर सतना में आक्सीजन उत्पादन और खपत का बृहद सर्वे कराया। यह प्रदेश में पर्यावरणीय गतिविधियों का अपनी तरह का पहला सर्वे था। इसी तरह नालियों में बहने वाले कचड़े से होने वाले प्रदूषण का भी सर्वे सहित अन्य पर्यावरणीय सर्वे इस दौर में विद्यार्थियों ने किए।

नेशनल ग्रीन कोर को ड्रेस
भारत सरकार ने विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरुकता के लिये नेशनल ग्रीन कोर का कान्सेप्ट प्रारंभ किया। लेकिन त्रिपाठी ने कन्या धवारी में पदस्थापना के बाद पहली बार नेशनल ग्रीन कोर का ड्रेस डिजाइन किया और दल गठित कर पहली बार राष्ट्रीय पर्व की जिला स्तरीय परेड में शामिल करवाया। तब से लगातार यह प्रक्रिया जारी है। उन्होंने अपनी रीवा पदस्थापना के दौरान वहां भी यह प्रथा शुरू की।

अन्य कार्य
- डाइट में नवग्रह वाटिका
- गंदी बस्ती के बच्चों के लिए डाइट में बतौर प्रयोगशाला बस्ती की पाठशाला की शुरुआत
- स्वच्छता के लिए डाइट में ब्लू कोर का गठन