सिंचाई विभाग के एक बड़े जलाशय को किस सुनियोजित तरीके से सिंचाई विभाग से राजस्व विभाग में बदलवा कर बाद में कब्जेदार किसानों को दिलाने का जो प्रयास किया जा रहा है, वह प्रदेश में अपने तरह का अकेला और अलग है। यहां एक जलाशय को अनुपयोगी बताते हुए किसानों को वापस करने की बात कही जा रही है, जो कि नियम-अधिनियम के विपरीत है। वहीं टोंस बाराज में मूल भू-स्वामियों को अनुपयोगी जमीन वापसी की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में एक ही जिले में जलाशयों की जमीन वापसी के दो मापदण्ड अब सवालों में खड़े हो गए हैं।