
this Ganesh festival Make for soil, coconut Eco-friendly Ganpati
सतना. घर में अब गणपति को लाने की तैयारी शुरू हो गई है। 13 सितंबर से शुरू होने वाले इस उत्सव के लिए पूरा शहर तैयार है। इस बार लोगों का रुझान इको फ्रेंडली गणपति की ओर है। युवा इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। युवा कलाकार अपने स्तर पर प्रयास कर रहे कि ज्यादा से ज्यादा लोग इको फ्रेंडली गणपति को ही अपने घर लेकर आएं। इसके लिए वे अपने आसपास के लोगों के साथ ही अपने रिश्तेदारों, दोस्तों को मिट्टी के गणपति घर में रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है, अगर आप घर पर ही मिट्टी, लकड़़ी, नारियल, सुपाड़ी की गणेश प्रतिमा बनाकर स्थापित करेंगे तो उत्सव का महत्व कम नहीं होगा। शहर के विभिन्न मूर्तिकार भी बड़ी-बड़ी गणेश प्रतिमाओं को मिट्टी से तैयार कर रहे हैं। इनमें वॉटर कलर का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताकि पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचे।
मिट्टी से तैयार हो रहीं गणेश प्रतिमाएं
शहर में छोटी-बड़ी गणेश प्रतिमाएं मिट्टी से तैयार हो रही हैं। कई साल से मूर्ति बना रहे मूर्तिकार अभिषेक का कहना है कि प्रदूषण न हो इसके लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे कि इको फ्रेंडली गणपति बनाएं। गणेशोत्सव के पहले मिट्टी मिलना मुश्किल होता है, इसलिए मिट्टी को गर्मी के मौसम में ही एकत्रित कर लिया गया। छोटी और बड़ी सभी प्रतिमाओं को मिट्टी से तैयार किया जा रहा है। इनमें कच्चे रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। शासन की तरफ से भी नियम बनाए गए हैं जिनका ध्यान रखते हुए मूर्तियां बना रहे हैं।
इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा को इस्तेमाल करने के कारण
- इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा से जल प्रदूषण को रोका जा सकता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस में कई तरह के रसायन होते हैं जो पानी को जहरीला बना सकते हैं। यह पानी में जलीय जीवों की मौत का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं दूषित पानी मनुष्य के लिए भी खतरनाक साबिक हो सकता है।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस में सल्फर, फॉस्फोरस, जिप्सम, मैग्नेशियम जैसे कई खतरनाक रसायन होते हैं। मूर्ति को सजाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रंगों में कार्बन, लेड व अन्य रसायन होते हैं। जो जीवों के साथ ही मनुष्यों के लिए भी खतरनाक होते हैं।
- मूर्ति को सजाने में इस्तेमाल किए जाने वाले रंग कुछ गैसों का वितरण करते हैं। जब हम सांस लेते हैं तो इस गैसों से हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।-----------------
इको फ्रेंडली गणपति के लिए ये है बेहतर तरीका
1- चावल के एकदंतधारी
इस बार गणेश चतुर्थी पर बनाएं चावल के गणपति। एक चौकी पर अपने हाथों से चावलों को डाल कर गणपति का रूप दें। इसी का पूजन करें। जब आप इनका विसर्जन करेंगे, तो यह वातावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
2- फूलों से बप्पा
आप फू लों से भी बप्पा को बना सकते हैं। यह उन लोगों के लिए अच्छा उपाय है, जो गणेश चतुर्थी पर एक ही दिन के लिए बप्पा को स्थापित करते हैं। फू लों से तैयार गणपति का पूजन करने के बाद आप चाहें तो इन्हें गमलों में रख दें। जब यह फू ल मिट्टी के साथ मिलेंगे तो नए पौधे बन जाएंगे।
३- नारियल के गणेशा
नारियल के गणोश प्रतिमा बनाना भी आसान है। इससे भी जल प्रदूषित नहीं होगा।
४- सुपाड़ी के गजानन
महज नौ सुपाड़ी और वाटर कलर की सहयता से गजानन को एक घंटे में तैयार किया जा सकता है। यह देखने में भी बहुत खूबसूरत लगते हैं।
५- फि शफू ड से बनाएं गणपति
फि शफूड से भी गणपति बना सकते हैं। जब आप गणपति बप्पा का विसर्जन करेंगे तो आप आराम से इन्हें नदी या नहर में विसर्जित कर सकते हैं। इससे आप एक साथ दो अच्छे काम कर सकते हैं, एक तो मछलियों का खाना दे सकते हैं, दूसरा पानी को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।
मिट्टी के गणपति घर पर ऐसे बनाएं
स्टेप 1. सबसे पहले मिट्टी से बेस तैयार करें। इसका आकार चौकोर या गोल हो सकता है।
स्टेप 2. गणपतिजी को आकार देने के लिए मिट्टी का एक गोल आकार तैयार करें। जो गणपति का पेट है।
स्टेप 3. गोल आकार को बेस के ऊपर रखें और चार एक ही आकार के हाथ व पैर तैयार करते हैं। और उन्हें पेट के दोनों तरफ व नीचे लगाएं।
स्टेप 4. पेट के ऊपर के हिस्से में दो छोट-छोटे गोले लगाएं। अब गणपति का फेस को आकार दें और उसे पेट के ऊपर रखें।
स्टेप 5. आखरी में गणपति जी की सूंड बनाएं और उसे लगाएं।
Published on:
29 Aug 2018 08:08 pm
बड़ी खबरें
View Allसतना
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
