। हेल्पलाइन 182 और ट्विटर सेल पर यात्रियों द्वारा की जाने वाली शिकायत और समस्या को रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों ने त्वरित निपटाने की प्रक्रिया शुरू की है। सतना रेलखंड से गुजरने वाली ट्रेनों के दौरान यदि कोई यात्री ट्विटर सेल या हेल्पलाइन 182 पर शिकायत करता है तो उसका ब्यौरा जुटाकर रजिस्टर में उसकी पूरी कुंडली लिखी जाएगी, ताकि समस्या का निस्तारण किया जा सके। यात्रियों को यह सहूलियत देने के लिए सतना रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों ने पहल शुरू कर दी है।
अफसरों के मुताबिक, सतना रेलखंड में पिछले एक माह में ट्विटर सेल पर तीन और हेल्पलाइन नंबर 182 पर करीब एक दर्जन शिकायतें आरपीएफ के संज्ञान में आई हैं। उनका ब्यौरा सहेजने व उस प्रकरण में क्या प्रगति हुई है, इसकी कुंडली तैयार करने के लिए एक अलग से ट्विटर सेल का रजिस्टर तैयार किया गया है। उसमें पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया दर्ज रहेगी, ताकि आवश्यकता पडऩे पर शिकायत की तारीख व ट्रेन क्रमांक आदि देखते ही फौरन कार्य प्रगति पता लग जाए।
केस-1
26 जनवरी 2016 को 12189 डाउन महाकौशल एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे यात्री नवीन पाराशर ने ट्विटर पर रेलमंत्री को सतना स्टेशन पर अमानती सामानघर में सामान निकालने के नाम पर 2500 रुपए मांगे जाने की शिकायत भेजी। शिकायत पहुंचते ही तत्काल उच्चाधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया और सतना आरपीएफ को शिकायत की पड़ताल करने को कहा।
केस-2
3 फरवरी 2016 को 12142 अप राजेंद्र नगर एक्सप्रेस के एच-1 कोच में सफर कर रहे सोमेश्वर प्रसाद ने मुगलसराय स्टेशन पर दो हजार की ठगी होने की शिकायत ट्विटर पर की। उच्चाधिकारियों ने फौरन सतना आरपीएफ को सूचित कर मुकदमा पंजीकृत करने को कहा। स्थानीय अफसरों ने पीडि़त की शिकायत दर्ज कर प्रकरण मुगलसराय के लिए स्थानांतरित कर दिया।
केस-3
24 फरवरी 2016 को 12141 डाउन पाटलिपुत्र एक्सप्रेस के बी-3 कोच में सफर कर रहे संतोष ङ्क्षसह ने आईफोन-4 चोरी होने की शिकायत रेलमंत्री के ट्विटर सेल पर भेजी। ट्रेन के सतना पहुंचते-पहुंचते पूरे जोन में हड़कंप मचा रहा। सतना रेलवे स्टेशन पर एएसआई शिवराज ङ्क्षसह ने शिकायत की जांच की। पीडि़त यात्री संतोष ने फोन मिल जाने की पुष्टि की।
यात्रियों से ले रहे फीडबैक
सतना रेलखंड में होने वाली घटनाओं व किसी समस्या के निस्तारण से पीडि़त है या नहीं, आरपीएफ ने छह पेज के फार्मेट में यात्रियों से फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। इस छह पेज के फार्मेट में जांचकर्ता अफसर की भूमिका, यात्री की शिकायत व आरपीएफ अफसर द्वारा की गई कार्रवाई का ब्यौरा अंकित किया जाएगा। एक पेज में पीडि़त यात्री से फीडबैक लिया जा रहा है कि वे आरपीएफ द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं। इस प्रक्रिया से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।