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MP के इस जिले में दो जनपद पंचायत पिछड़े, अब CM की निगरानी में होगा ‘विकास’

केंद्र की तर्ज पर राज्य सरकार ने की घोषणा, विकास के सभी पैरामीटर में पिछड़े होने पर किए गए शामिल

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सतना

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Suresh Mishra

Jul 09, 2018

two backward Janpad Panchayat in satna madhya pradesh

two backward Janpad Panchayat in satna madhya pradesh

सतना। केंद्र सरकार के नीति आयोग ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, इंफ्रॉस्ट्रक्चर और वित्तीय समावेशन के पैरामीटर को आधार पर बनाकर मध्यप्रदेश के 5 जिलों सहित देश के 101 पिछड़े जिलों का चयन किया था। उसी तर्ज पर प्रदेश सरकार ने भी 21 जिलों की 50 पिछड़ी जनपदों का चयन किया है। साथ ही इनकी रैंकिंग जारी की गई है। सतना जिले के दो जनपद क्रमश: रामपुर बाघेलान व मझगवां को शामिल किया गया है। अब प्रदेश सरकार इन्हें मूल धारा में लाने के लिए रियल टाइम प्रगति के आंकड़े दर्ज करना शुरू करेगी।

इसका अलग से डैशबोर्ड बनाया जाएगा। प्रदेश सरकार ने इन जनपदों की सूची जारी करते हुए इन्हें विकास के आकांक्षी जनपद कहा है। प्रदेश सरकार द्वारा इन पिछड़े जनपदों की जारी सूची के संबंध में संबंधित अधिकारियों द्वारा बताया गया कि प्रदेश के मानव विकास सूचकांकों में सुधार करने सहित इन जनपदों में विकास की गति को बढ़ाकर इनमें रहने वाले लोगों का जीवन स्तर विकसित जनपदों की तरह बेहतर बनाया जाएगा।

49 पैमानों पर फेल
बताया गया कि प्रदेश सरकार ने इन 50 जनपदों को विकास के पांच सेक्टर्स में 49 पैमानों पर आंका है। इन जनपदों में अलीराजपुर का कट्टीवाड़ा सबसे ऊपर है तो टीकमगढ़ का पलेरा आखिरी पायदान पर है। सतना से रामपुर बाघेलान 41 वें तथा मझगवां 42वें स्थान पर है। रीवा जिले का हनुमना 31वें, जवा 37वें तथा सिरमौर 47वें स्थान पर है। पन्ना जिले की जनपद पंचायत शाहनगर 13वें स्थान पर तथा अजयगढ़ विकास के पैमाने पर 26वें स्थान पर शामिल की गई है।

यह हैं लक्ष्य
गरीबी मुक्त, शून्य भूख, अच्छा स्वास्थ्य बेहतर जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ पानी एवं स्वच्छता, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा, बेहतर काम और आर्थिक उन्नति, अधोसंरचना और औद्योगिक विकास, असमानता खत्म करना, सतत विकासशील शहर और समाज, जिम्मेदार उत्पादन और खपत, पर्यावरण अनुकूलन, जलजीवन, शांति व न्याय और मजबूत संस्थाएं, लक्ष्य के प्रति मजबूत सहभागिता।

न स्वास्थ्य न शिक्षा
जिन पिछड़े जनपदों को चयनित किया गया है वहां विकास कार्यों की गति काफी लचर पाई गई है। हालात यह है कि आधारभूत शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाएं तक नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य के लिए 100 में 30 फीसदी अंक निर्धारित किए गए हैं जिसमें मातृ स्वास्थ्य, नवजात की सुरक्षा, बच्चों के विकास व स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे 22 अलग-अलग मापदण्ड रखे गए हैं।

परीक्षा परिणाम आदि मापदंड शामिल

इसी तरह से शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता, पठन पाठन का स्तर, योजनाओं की पहुंच, परीक्षा परिणाम आदि मापदंड शामिल किए गए हैं। अधोसंरचना में रोड, बिजली, पानी के कई मापदंडों के आधार पर जनपदों के पिछड़ेपन को गिना गया है।

शुरू होंगे समन्वित प्रयास
इन पिछड़े जनपदों में अब राज्य शासन द्वारा कलेक्टर एवं जिपं सीईओ द्वारा वृहद स्तर पर समन्वित प्रयास कर इन्हें विकास की मूल धारा के समकक्ष लाया जाएगा। इन क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य कराए जाएंगे। इनकी सतत निगरानी राज्य स्तरीय एजेंसियों द्वारा की जाएगी। इसकी नियमित अपडेट मुख्यमंत्री को दी जाएगी।