7 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

6 दिन बाद रिहा हुए अपहृत शिक्षकों के परिजनों ने बताया, डकैतों ने पहले नोट गिनी फिर पकड़ छोड़ी

इधर, पुलिस का दावा-दबाव में छूटी पकड़, गिरफ्तारी के लिए एसपी ने घोषित किया इनाम

5 min read
Google source verification

सतना

image

Suresh Mishra

Dec 29, 2017

two kidnapped teachers free in chitrakoot

two kidnapped teachers free in chitrakoot

सतना। नयागांव थाना क्षेत्र के थरपहाड़ से अगवा दोनों शिक्षक छह दिन बाद डकैतों के चंगुल से रिहा हो गए। पुलिस का दावा है कि उसके दबाव के कारण पकड़ छूटी। चर्चा यह भी है कि फिरौती मिलने के बाद डकैतों ने शिक्षकों को छोड़ा। डकैतों को करीब ढाई लाख की रकम परिजनों ने पहुंचाई है।

खुद शिक्षकों ने पारिवारिक सदस्यों को बताया कि डकैतों ने पहले नोट गिना, उसके बाद मडफ़ा जंगल में देव पहाड़ से लगे भैरव बाबा स्थान के पास ले गए।

वहां छोड़ते हुए कहा कि जाओ घर। उधर, गुरुवार की दोपहर पुलिस ने शिक्षकों को सुरक्षित माहौल देते हुए पहले बात की। इसके बाद दोनों को परिवार से मिलने दिया गया। एसपी राजेश हिंगणकर ने डकैतों पर 10-10 हजार रुपए के इनाम की घोषणा की है।

हाथ बांधकर ले गए जंगल
सहायक शिक्षक फूल सिंह गोड़ ने पत्रिका को बताया, वह पप्पू के साथ स्कूल बंदकर थरपहाड़ से घर जा रहा था। तभी नकाबपोश हथियारबंद डकैतों ने उन्हें रोका और पकड़ लिया। उसके बाद उन्होंने मोबाइल छुड़ा लिया। फिर दोनों के हाथ पीछे कर बांध दिए और जंगल ले जाकर आंख पर पट्टी भी चढ़ा दी। बकौल फूल सिंह, थरपहाड़ पर एसएएफ पोस्ट है। कुछ जवान भी घटना के वक्त नित्यक्रिया के लिए नजदीक ही टहल रहे थे। लेकिन, उन्हें घटना की भनक नहीं लगी।

मुखबिरी की बात पर की पिटाई
पकड़ से छूटे अतिथि शिक्षक रामप्रताप पटेल ने बताया कि लगभग 9 की संख्या में डकैतों ने स्कूल से बाहर निकलते ही दूसरी खखरी के पास पकड़ लिया था। सभी अपने मुंह ढके थे। लगभग एक किलोमीटर आंदर ले जाकर बैठाया। फिर यह कहने लगे कि तुम्हारी मुखबिरी के कारण यहां फोर्स लग गई है। इसलिए हम लोग खाना पानी तक को परेशान हैं। इसके बाद मारपीट करने लगे। फिर आंखों में पट्टी बांध कर कोल्हुआ जंगल की ओर ले गए।

खाली हाथ लौटा दिया
पीडि़त परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक बात यह सामने आई है कि डकैतों ने पहले 20 लाख रुपए मांगे। फिर बात 10 लाख पर आई। दिन बीतने के साथ तीन लाख पर बात अटक गई। जब डकैतों को बताया गया कि महज ढाई लाख रुपए ही हैं, तो इसी पर सौदा तय हो गया। बुधवार को जब डकैतों पर पुलिस दबाव बना चुकी थी तो फूल सिंह के परिजन उसे मुक्त कराने जंगल पहुंचे। लेकिन, डकैतों ने जब देखा कि कोई रकम लेकर नहीं आया तो जान से मारने की धमकी देकर लौटा दिया।

डकैतों ने रुपए हाथ में लिया और गिना

इसके बाद घर फोन लगाकर धमकाया कि अब पैसे नहीं भेजे तो जान से मार देंगे और फूल सिंह को मारते हुए उसकी बेटी से बात भी कराई। रात करीब 12 बजे रुपए भेजे गए। वहां डकैतों ने रुपए हाथ में लिया और गिना। संतुष्टि होने पर शिक्षकों को रिहा कर दिया। फिरौती फूल सिंह के परिवार ने दी है। फिरौती देने गांव के लोगों सहित फूल सिंह के पारिवारिक सदस्य भी गए थे।

गिरोह सदस्यों पर इनाम
पुलिस अधीक्षक सतना राजेश हिंगणकर ने नयागांव थाना के अपराध क्रमांक 162/17 में आईपीसी की धारा 364ए व 11/13 एडी एक्ट के प्रकरण में सेजवार निवासी आरोपी दिनेश रजक पुत्र राम प्रकाश रजक, खुन्नू उर्फ अवगेश रजक पुत्र शिव प्रसाद रजक, कैलाश कहार पुत्र राम नरेश कहार, विजय उर्फ मोटू पुत्र राम खेलावन रजक, दीपक शिवहरे पुत्र मोहन शिवहरे की गिरफ्तारी के लिए दस-दस हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। बताया गया है कि इन्हीं आरोपियों ने 22 दिसंबर को शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय थरपहाड़ में पदस्थ अतिथि शिक्षक राम प्रताप उर्फ पप्पू पटेल पुत्र राम मनोहर पटेल (35) निवासी टेढ़ी व सहायक शिक्षक फूल सिंह गोड़ पुत्र जंगी सिंह गोड़ (38) निवासी थरपहाड़ को घर जाते समय रास्ते से अपहरण कर लिया था।

अपहरण का मास्टर माइंड है नवल
पुलिस का कहना है, मारे जा चुके डकैत ललित पटेल के साथ मिलकर चरवाहे का अपहरण करने के बाद से ही सेजवार निवासी शातिर बदमाश नवल धोबी फरार है। पुलिस के बढ़ते मूवमेंट के बाद वह अपने गिरोह की ताकत बढ़ाने में जुट गया था। उसने सुनियोजित तरीके से शिक्षकों के अपहरण को अंजाम दिया है। नवल की गिरफ्तारी के लिए भी 10 हजार रुपए का इनाम घोषित है। जिसको बढ़ाकर ३० हजार रुपए करने के लिए प्रतिवेदन आईजी रीवा को पुलिस अधीक्षक सतना ने भेजा है। शिक्षकों के रिहा होने के बाद पुलिस ने सभी बदमाशों को घेरे में लेने के लिए तेजी से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खबर है कि कई संदेही पुलिस की हिरासत में हैं।

चौथे दिन बन गया था पुलिस का दबाव
फूलसिंह ने बताया कि रात को जब डकैत उन्हें बैठा देते थे तो कुछ दूर वे आपस में चर्चा करते थे। चौथे दिन उनकी चर्चा में यह सुना गया कि पुलिस ने उनके घर वालों को उठा लिया है। इस दबाव से डकैत परेशान हो गए थे और उन्हें पकड़ छोडऩे की जल्दी थी। इसलिए उन्होंने अपहृतों के परिजनों पर और दबाव बनाना शुरू कर दिया था। साथ ही शिक्षकों को भी धमकाना तेज कर चुके थे।

पप्पू से नहीं मांगी फिरौती
सहायक शिक्षक फूल सिंह के साथ अगवा किए गए अतिथि शिक्षक राम प्रताप उर्फ पप्पू पटेल निवासी टेढ़ी पर डकैतों का रहम देखने को मिला। एक यह बात सामने आई है कि तराई के खूंखार डकैत संदर पटेल उर्फ रागिया का पप्पू पारिवारिक रिश्तेदार है। एक यह बात भी है कि तराई में जाति विशेष का प्रभाव रहता है। इसलिए डकैतों ने उसके परिवार से फिरौती की मांग नहीं की। दस्यु उन्मूलन अभियान से जुड़े सूत्रों का कहना है, बदमाशों ने पप्पू के मोबाइल का भी उपयोग नहीं किया। जबकि फूल सिंह के फोन से ज्यादातर बात की गई। एक यह बात भी सामने आई है कि डकैतों को कहीं न कहीं इस बात की खबर थी कि फूल सिंह के खाते में करीब ढाई लाख रुपए जमा हैं। उससे उसे बेटी की शादी करनी है। इस पूरे प्रकरण में कहीं न कहीं पप्पू की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है।

शिक्षक का अपहरण, मेरा अपहरण
थरपहाड़ से अगवा शिक्षकों की सकुशल रिहाई के बाद एसपी राजेश हिंगणकर शिक्षकों के बीच पहुंचे। उन्होंने चित्रकूट के कामतन विद्यालय में शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों के बीच जाकर सभी को भरोसा दिलाया कि अब एेसी घटनाएं नहीं होने देंगे। अब किसी शिक्षक का अपहरण हुआ, तो मानूंगा मेरा अपहरण हुआ। क्योंकि मैं भी एक शिक्षक रह चुका हूं।

आंख से पट्टी नहीं हटाई
सहायक अध्यापक फूलसिंह ने बताया, जंगल में कई मील पैदल चलाने के बाद खाना के लिए डकैत रुके। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को भी खाना दिया। लेकिन, आंख से पट्टी नहीं हटाई। सिर्फ हाथ खोले, ताकि हम खाना खा सकें। फूल सिंह को अंदेशा है कि बदमाश उसे कोल्हुआ के जंगल की ओर लेकर गए थे। वहां पहली रात ही गिरोह के सदस्यों ने उससे वेतन और पारिवारिक आय के बारे में पूछताछ शुरू कर दी। अगले दिन फूल सिंह के ही फोन से परिजनों को फोन लगाकर 20 लाख रुपए की फिरौती मांगी।

पहले दिन दो थालियों में आया भोजन
अतिथि शिक्षक पटेल के मुताबिक पहले दिन रात को चलाने के बाद जब रुके तो दो थालियों में भोजन उन्हें दिया गया। इसके बाद दूसरी रात चलाते रहे। तीसरी और चौथी रात को किसी कंदरा में ले जाकर रुका दिए। इस दौरान उन्हें खाना नहीं दिया गया। सिर्फ दो रुपए वाली बिस्कुट और 5 रुपए वाली नमकीन मात्र खाने को दिए। पांचवें दिन तड़के पूरी रात चलाने के बाद किसी गांव के बाहर डकैत पहुंचे। यहां नित्य क्रिया के लिए आंखों से पट्टी खोली। वहां खेतो में कुछ आदमी भी नजर आए। लेकिन भयवश कुछ बोल नहीं सके। नित्यक्रिया के बाद फिर डकैत आंख पर पट्टी बांध कर जंगलों में ले गए।