
Satna malnutrition
सतना. जिले में कुपोषण से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। रामपुर बाघेलान के छिरहाई गांव के दो साल के आदिवासी मासूम ने सोमवार की सुबह कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया। मासूम को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया था।
अस्पताल में कराया था भर्ती
बताया गया, रिछहाई गांव का ऋषि आदिवासी (2 वर्ष) गंभीर कुपोषण का शिकार था। परिजन मासूम को लेकर 28 अगस्त को जिला अस्पताल पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचे। वहां शिशु रोग विशेषज्ञ ने उसका उपचार किया और शिशु रोग वार्ड में दाखिल कराया। विशेषज्ञ चिकित्सक के मुताबिक मासूम की हालत नाजुक थी। इसके बावजूद दो दिन बाद 30 अगस्त को मासूम को परिजनों को कहने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। ९ दिन बाद मासूम ने गांव में ही दम तोड़ दिया।
दो साल के मासूम का पांच किग्रा से कम वजन
महिला बाल विकास महकमे के रिकार्ड के मुताबिक २ सितंबर को मासूम का वजन 4.300 किलोग्राम था। मिड अपर आर्म सरकमफेरेन्स (एमयूएसी ) शॉल्डल से कोहनी के बीच के हिस्से की मोटाई 10 सेमी. थी। गंभीर कुपोषण के चलते मासूम के शरीर में प्रोटीन, विटामिन सहित अन्य पोषकतत्वों की कमी आ गई थी। दो साल की उम्र में भी ऋषि अच्छे से बैठ नहीं पाता था।
जिम्मेदारों की सफाई-भर्ती कराया था
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सौरभ सिंह ने बताया कि कुपोषित मासूम ऋषि को एनआरसी में दाखिल कराने के मकसद से आंगनबाड़ी कार्यक र्ता रिछहाई अरुणा सिंह उसके घर तक गई थी। लेकिन, परिजन तैयार नहीं थे। बाद में परिजनों को प्रेरित कर वाहन सुविधा मुहैया कराई गई और जिला अस्पताल भिजवाया गया था।
महकमा मना रहा पोषण माह
महिला एवं बाल विकास विभाग राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मना रहा है। जिम्मेदार दावा कर रहे कि मैदानी अमले द्वारा भोजन की थाली में पोषक आहार शामिल करने जागरूक किया जा रहा। लेकिन, हकीकत इसके ठीक उलट है।
Updated on:
10 Sept 2019 08:54 pm
Published on:
10 Sept 2019 08:54 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
