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udta satna: सतना जिले में नहीं एक भी नशामुक्ति केंद्र, गिरफ्त में 36% लोग, नशे की जद में आने से बिखर रहे परिवार

udta satna: सतना जिले में नहीं एक भी नशामुक्ति केंद्र, गिरफ्त में 36% लोग, नशे की जद में आने से बिखर रहे परिवार

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सतना

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Suresh Mishra

Jan 01, 2019

udta satna: 36 percent population of Satna in drunkenness

udta satna: 36 percent population of Satna in drunkenness

सतना। शहर के कृष्णनगर निवासी एक परिवार का किशोर नशीली दवाओं के सेवन की लत का शिकार हो गया। वह कक्षा 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। 10वीं बोर्ड सहित अन्य कक्षाओं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। लेकिन, कक्षा 11वीं में मुश्किल से उत्तीर्ण हो पाया। स्वास्थ्य में भी तेजी से गिरावट हो रही थी। परिजनों को चिंता हुई पर तब तक काफी देर हो चुकी थी। समझाइश और डांट का भी असर नहीं हो रहा था। परिजनों ने आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण कर्ज लेकर बड़े शहर में इलाज कराया।

मुश्किल से स्वास्थ्य में सुधार हुआ। यह महज एक परिवार की कहानी नहीं। नशे की जद में आकर कई परिवार बिखर रहे हैं। जिले में नशीली दवाइयों, इंजेक्शन का कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है। एक बार नशे की गिरफ्त में आने के बाद लोग आसानी से पीछा नहीं छुड़ा पाते। नशीली दवाइयों और इंजेक्शन का प्रतिकूल असर स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। लोगों के सोचने, समझने की शक्ति भी कमजोर हो जाती है।

72 शराब दुकानें पर नशामुक्ति केंद्र नहीं
जिले की आबादी 25 लाख है। लेकिन, नशे की लत के शिकार लोगों को बचाने के लिए शहर में एक भी नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं। जबकि बेहतर इलाज और परामर्श देकर लोगों को नशे से दूर किया जा सकता है। इसके विपरीत जिले में 72 शराब दुकानों का संचालन किया जा रहा है। इससे आसानी से लोग नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

33.21% लोग शराब के आदी
गैर सरकारी संगठन द्वारा जिले में नशे को लेकर सर्वे कराया गया। इसमें रोचक खुलासा हुआ। जिले में 36.3 प्रतिशत लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं। 33.21 प्रतिशत लोग शराब का नशा करते हैं। 5.6 प्रतिशत भांग के नशे के आदी हैं। 0.1 प्रतिशत लोग अन्य प्रकार के नशे के शिकार हैं।

एक परामर्श केंद्र के सहारे अभियान
जिले में लोगों को नशे की लत से दूर करने अभियान के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। नशामुक्ति के लिए महज एक परामर्श केंद्र का संचालन किया जा रहा है। जो नाकाफी साबित हो रहा है। लेकिन इसके बाद भी सामाजिक और राजनीतिक संगठन बुराई को जड़ से समाप्त करने आगे नहीं आ रहे हैं।

जागरूक होना होगा
नशे की जद में आने से परिवार बिखर रहे हैं। नशे में लिप्त लोग अपराध की दुनिया में भी कदम रख रहे हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक होना होगा। अधिकारियों का भी कर्तव्य है कि वे नशामुक्ति के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करें। अन्यथा इसका प्रभाव कई पीढिय़ों तक पड़ेगा।

हकीकत
- 36.3% लोग करते हैं तम्बाकू का सेवन
- 33.21 % लोग करते हैं शराब का नशा
- 5.6% भांग के नशे के आदी
- 0.1% अन्य नशे के शिकार
नोट: नशामुक्ति के लिए काम कर रहे संगठन (1 हजार लोगों पर सर्वे) के अनुसार