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UGC के निर्देश: MP के सभी कॉलेज में लगेंगे CCTV कैमरे, दिल खोलकर जाए पढ़ने, प्रॉब्लम हो तो…

तीसरी आंख दूर करेगी रैगिंग का डर, यूजीसी के निर्देश पर कॉलेजों और हॉस्टलों में लगाए जा रहे सीसीटीवी कैमरे

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सतना

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Suresh Mishra

Jul 08, 2018

UGC new rule of madhya pradesh college and universities

UGC new rule of madhya pradesh college and universities

सतना। रैगिंग रोकने के लिए जिले के सभी कॉलेजों में ड्राप बॉक्स लगाए जाएंगे। इसमें शिकायत करने वाले की पहचान गुप्त रहेगी। एंटी-रैगिंग कमेटी का गठन कॉलेजों में किया जाएगा। रैगिंग करते पकड़े जाने पर दोषी को एंटी रैगिंग कानून के अंतर्गत 2 वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपए का अर्थदंड या दोनों ही दिए जाने का प्रावधान है।

एक वक्त था जब कॉलेजों में प्रवेश के साथ ही नए स्टूडेंट्स में रैगिंग का डर घर कर जाता था। कॉलेज कैम्पस से लेकर हॉस्टल तक रैगिंग के रूप में प्रताडऩा इतनी बढ़ जाती थी कि स्टूडेंट्स आत्मघाती कदम तक उठाने से बाज नहीं आते थे। हालांकि पिछले कुछ सालों से इस तरह की घटनाओं में बहुत हद तक कमी आई है।

अब कॉलेजों में रैगिंग की जगह मैत्री दिवस, वेलकम पार्टी, इंट्रोडक्शन जैसे इवेंट्स होने लगे हैं। बदलाव के पीछे प्रमुख वजह यूजीसी और कॉलेजों द्वारा रैगिंग के विरोध में उठाए जा रहे सख्त कदम भी हैं। नए छात्रों में रैगिंग को लेकर डर रहता है। इसे दूर करने के लिए तरह-तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। कॉलेजों में आयोजन हो रहे हैं। पूरे कॉलेज कैम्पस और हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं।

जारी हैं प्रयास
वर्ष 2009 से अब तक रैगिंग रोकने के प्रयास लगातार जारी हैं। इस वर्ष यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में चार तरह के विशेष पोस्टर लगाने के लिए कहा है। एक पोस्टर में रैगिंग करने वाले पर होने वाली कार्रवाई की तस्वीर, दूसरे में इसके दंड, तीसरे में इसके भविष्य खराब होने को दिखाया गया है। चौथे पोस्टर में रैगिंग रोकने के बाद कैम्पस में शांति का माहौल इंगित है। यह सभी पोस्टर हॉस्टल, कैंटीन, मेस, डिपार्टमेंट व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे।

मोबाइल ऐप जारी
एमएचआरडी और यूजीसी ने एंटी रैगिंग मोबाइल ऐप जारी किया है। इस एप से स्टूडेंट्स द्वारा की गई शिकायत सीधे यूजीसी को मिलेगी। इसे ही एफआईआर माना जाएगा। गूगल प्ले पर इसे फ्री डाउनलोड किया जा सकेगा। यूजीसी ने एंटी रैगिंग हेल्पलाइन नंबर 18001805522 की शुरुआत की है। 12 भाषाओं में रैगिंग से पीडि़त स्टूडेंट्स इस टोल फ्री नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

ये भी हैं रैगिंग के रूप
स्टूडेंट्स को उसके रंग, बैकग्राउंड, धर्म, जाति, आर्थिक स्थिति, जन्म स्थान के आधार पर कोई भी कमेंट करना रैगिंग के अंतर्गत है। इस पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

संस्थान और शिक्षक पर भी कार्रवाई
- मेरठ में वर्ष 2009 की घटना के बाद यूजीसी ने एक रेग्युलेशन पारित किया। इसके तहत रैगिंग की सूचना देने वाले स्टूडेंट्स की हिफाजत करना संस्थान की जिम्मेदारी है।
- दाखिले के समय ही स्टूडेंट्स व पैरेंट्स को रैगिंग से जुड़ी सारी जानकारी दी जानी चाहिए। ताकि वे रैगिंग को लेकर सतर्क रहें।
- रैगिंग का शिकार स्टूडेंट या उस समय वहां मौजूद अन्य स्टूडेंट्स और अन्य सदस्य भी अगर संस्थान को इस बारे में जानकारी नहीं देते तो उन्हें भी रैगिंग का दोषी माना जाएगा।
- अगर किसी स्टूडेंट्स पर रैगिंग का आरोप लगता है तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उस स्टूडेंट को कॉलेज व हॉस्टल से सस्पेंड किया जाना चाहिए। पुलिस को भी सूचित किया जाना चाहिए। इसके बाद उसे अपने पक्ष में कहने का अवसर दिया जाएगा।
- स्कॉलरशिप व शेष अन्य सुविधाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
- टेस्ट व परीक्षाओं में बैठने पर रोक लग सकती है।

हमारे कॉलेज कैम्पस सहित हॉस्टल्स में लगभग 300 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वाड बनाए गए हैं। कॉलेज का टोल फ्री नम्बर भी है, जिसमें स्टूडेंट्स रैगिंग की शिकायत कर सकते हैं।
नवीन मिश्रा, रजिस्ट्रार आदित्य कॉलेज

कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी गठित की गई है, जो दिन में तीन बार पूरे कॉलेज कैम्पस में राउंड करती है। कॉलेज कैम्पस में जगह-जगह यूजीसी के नियमों के तहत पोस्टर व बैनर भी लगाए गए हैं। रैगिंग पर सेमिनार का भी आयोजन किया जाता है।
राकेश तिवारी, प्राचार्य विट्स कॉलेज

रैगिंग को लेकर यूजीसी प्रत्येक वर्ष जो भी निर्देश देती है उसका पालन किया जाता है। कॉलेज में दो अलग-अलग कमेटी बनाई गई है। एक रैगिंग कमेटी और दूसरी अनुशासन समिति। किसी भी स्टूडेंट को यदि कोई परेशानी होती है तो उस पर गंभीरता से अमल किया जाता है।
डॉ. राम बहोरी त्रिपाठी, प्राचार्य डिग्री कॉलेज