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सूखे से निपटने के लिए जखनी गांव के लोगों ने किया ऐसा प्रयास कि नजीर बन गया नवाचार

बारीकियां समझने पहुंच रहे देश-प्रदेश के प्रबुद्धजन, सूखे से निपटने के लिए जखनी गांव के लोगों ने किया सामूहिक प्रयास

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सतना

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Suresh Mishra

Jan 09, 2020

Unique use of water conservation on UP-MP border Jakhani village

Unique use of water conservation on UP-MP border Jakhani village

सतना/चित्रकूट/ यूपी-एमपी की सीमा पर बसे जखनी गांव में जल संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों द्वारा किए गए प्रयास नजीर बन गए हैं। यूपी ही नहीं बल्कि देशभर के प्रबुद्धजन जल संरक्षण के जखनी मॉडल की सराहना करते हुए अन्य गांवों के लोगों को ऐेसे प्रयास करने की सीख दे रहे हैं। दरअसल, यूपी के सीमाई क्षेत्र में बसा बुंदेलखंड का यह इलाका भीषण सूखे के लिए जाना जाता था। गर्मी सीजन में यहां के लोगों को पेयजल के लिए भारी परेशान होना पड़ता था।

सूखे की समस्या का समाधान
पानी के अभाव में वे खेती भी नहीं कर पाते थे। शासन स्तर से मदद के लिए कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं मिली तो खुद से जल संरक्षण के प्रयास शुरू कर दिए। उनकी इस पहल की जानकारी मिली तो कुछ समाजसेवी संगठन भी मदद के लिए आग आए। जिसका परिणाम यह हुआ कि गांव के लोग सूखे की समस्या को मात देकर खुशहाल हैं।

अधिकारी पहुंचे गांव
जल शक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह, उप्र पुलिस के महानिदेशक तकनीक व जल गुरु महेंद्र मोदी, अपर पुलिस महानिदेशक विजय कुमार, मप्र पुलिस के एडीजी राजाबाबू सिंह, कृषि प्रौद्योगिकी विवि बांदा के कुलपति यूएस गौतम, जल वैज्ञानिक परंपरागत अनुपम मिश्र जल संरक्षण के कार्यों को देखने के लिए जखनी पहुंचे।

मॉडल अपनाने का संदेश दिया
चित्रकूट धाम मंडल कमिश्नर तत्कालीन कमिश्नर एल. वेकटेश्वर लू, तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश कुमार व वर्तमान जिलाधिकारी बांदा हीरालाल ने जनपद की 471 पंचायतों को जखनी मॉडल अपनाने का संदेश दिया। बांदा जनपद के अधिकारियों ने भी जखनी गांव के जल संरक्षण का अवलोकन किया। केंद्रीय भूजल बोर्ड के निदेशक जल संरक्षण कार्य करने वाले शोध छात्र भी यहां अक्सर आते रहते है।

पूर्व प्रधानमंत्री को पसंद आया था नवाचार
जल संरक्षण को लेकर जखनी गांव में किए गए नवाचार को समझने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत, भारत रत्न नानाजी देशमुख, समाजसेवी मोहन धारिया, मप्र के तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव, उप्र के तत्कालीन राज्यपाल राम नइक, राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल मदनलाल खुराना व दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को पसंद आए थे। उन्होंने जखनी मॉडल की न सिर्फ सराहना की थी, बल्कि इसके संयोजक को बुलाकर विस्तृत जानकारी ली थी। सूखे से निपटने के लिए इस विधि को कारगर बताते हुए अन्य क्षेत्रों में लागू करने का आश्वासन दिया था।