
vindhya chamber of commerce Forgery in satna
सतना। आपको भरोसा नहीं होगा कि व्यापारियों की अग्रणी संस्था विंध्य चेंबर ऑफ कॉमर्स में सद्दाम हुसैन व जिन्ना जैसे लोगों ने निर्माण कार्य किया है। ये इन दिनों चेम्बर की बैठक में सुर्खियां बने हुए हैं। इनके माध्यम से पूर्व कार्यकारिणी पर गड़बड़झाला करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इसके चलते चेम्बर में शीत युद्ध भी शुरू हो गया है।
दरअसल, चेम्बर भवन में खिड़की, दरवाजे व दीवार का मरम्मत कार्य कराया गया। इसका मटेरियल व मजदूरी भुगतान करीब 51.120 रुपए का किया गया है। इसमें मटेरियल के लिए 42.320 रुपए व मजदूरी के लिए 8800 रुपए का भुगतान शामिल है। लेकिन, इस मामले में पेच यह फंस गया कि चेम्बर का अधिवेशन 7 जुलाई को आयोजित किया गया था।
उसके दूसरे दिन 8 जुलाई को भुगतान किया गया। इसका आशय है कि 7 जुलाई को पूर्व कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म हो गया था, उसके बाद भी पूर्व कार्यकारिणी ने भुगतान किया। वहीं जब नई कार्यकारिणी ने वर्ष 2018-20 की रसीदों का संधारण शुरू किया तो रसीद 1101-1200 की रसीद बुक, दस्तावेज व 50 हजार रुपए गायब मिले।
इसके बाद कार्यालय सचिव बृजेश चौधरी को बुलाकर पूछा गया, तो उसने बताया कि चुनाव में संबंधित रसीद बुक से नकद नामांकन लिया गया था, जो उनसे गुम हो गई है। जब 50 हजार का हिसाब मांगा गया, तो उन्होंने बाउचर प्रस्तुत किया। उसमें मरम्मत कार्य का जिक्र था। उसमें मटेरियल व मजदूरी का खर्चा दिखाया गया था। लेकिन, डे बुक में इसका उल्लेख नहीं था।
इन्होंने किया काम
जो बाउचर व दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं उसके अनुसार आधा दर्जन मजूदरों ने काम किया है। इसमें सद्दाम हुसैन, जिन्ना बारी, कल्लू कोटवार, महरनिया बारी, सोहनलाल, मुल्लू, पार्वती आदि शामिल हैं।
दुकान भी संदिग्ध
जिस दुकान से मैटेरियल लाने की रसीद जमा की गई है, वह मौजूद नहीं है। रसीद पर संतनगर घूरडांग का पता है और एक मोबाइल नंबर अंकित है। संंबंधित पते पर फर्म मौजूद नहीं है। पूर्व कार्यकारिणी ने इस फर्म से खजुराहो बालू 2ट्राल, सोन बालू 2 आटो, ईंट 1 ट्राली, पटिया20 नग, पाइप 2 नग, सीमेंट 20 बोरी, सीमेंट सफेद 20 बोरी, गिट्टी 1 आटो खरीदना दर्शाया है। कुल 42320 रुपए का भुगतान किया गया है।
कार्यकारिणी ने माना दोषी
मामला चेम्बर की कार्यकारिणी में उठ चुका है। कार्यकारिणी ने भी महामंत्री यशपाल जैन को दोषी माना और कार्रवाई की अनुशंषा कर रखी है। अब देखना होगा कि चेंबर के जिम्मेदार क्या कदम उठाते हैं।
ऐसे फंसी पेच
जिस बाउचर के माध्यम से 51120 रुपए का खर्चा दिखाया गया है उसमें कार्यालय मंत्री बृजेश चौधरी व महामंत्री यशपाल जैन के हस्ताक्षर हैं। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि जब कार्यकारिणी खत्म हो गई थी, तो भुगतान किस आधार पर किया गया। उसकी डे बुक में इंट्री क्यों नहीं की गई? साथ ही रसीद बुक कैसे गायब हो गई? जब सभी से चेक के माध्यम से सदस्यता शुल्क लिया गया तो वो कौन लोग थे, जिनसे नगदी के रूप में सदस्यता शुल्क ली गई। किसके कहने पर नियम तोड़ा गया।
Published on:
08 Jan 2019 03:20 pm
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