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विंध्य क्षेत्र का घटा ‘पावर’, नहीं लौटेगा 1998 का ‘वो’ दौर, सियासी वीरों में मंत्री पद पाने की जुगत शुरू

कांग्रेस सरकार...सियासी वीरों में मंत्री पद पाने की जुगत शुरू

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Vindhya region ka mp congress sarkar me power ghata

Vindhya region ka mp congress sarkar me power ghata

पुष्पेंद्र पाण्डेय@सतना। सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के बाद अब विधायकों में मंत्री पद पाने की होड़ शुरू हो गई है। प्रदेश का राज कमलनाथ को मिलने के बाद कांग्रेस के सभी सियासी रणवीर अपने-अपने आकाओं के माध्यम से पद पाने की चाल चल चुके हैं। लेकिन, इस बार कांग्रेस के हाथ से फिसले विंध्य के पास महज 6 योद्धा ही हैं जो विधानसभा तक पहुंचे। इनमें मंत्री पद के सिर्फ दो दावेदार कमलेश्वर पटेल और बिसाहूलाल हैं।

विंध्य के लिए 1998 का वो दौर अब नहीं लौटने वाला जब कांग्रेस सरकार में यहां के 7 मंत्री हुआ करते थे। अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी रीवा से विधानसभा चलाते थे। कांग्रेस सरकार जाते ही यहां का रुतवा भी घट गया। कांग्रेस ने एक पंचवर्षीय (1998-2003) में सात तो भाजपा ने 2003-2018 तक 15 साल (तीन पंचवर्षीय) में सात मंत्री बनाए।

1998 में जितने मंत्री बने, इस बार उतने विधायक
विंध्य का पावर सरकार में इस बार कम रहेगा। कारण, यहां की 30 सीट में से महज 6 विधायक ही चुनकर विधानसभा तक पहुंचे। 24 सीटें भाजपा के पक्ष में हैं। मंत्रालय में यदि 'अनुभव' को वरीयता दी जाएगी तो महज दो विधायक कमलेश्वर पटेल सिहावल और बिसाहूलाल सिंह अनूपपुर ही खरा उतरेंगे। चित्रकूट को छोड़कर अन्य विधायक पहली बार पहुंचे। चित्रकूट के नीलांशु चतुर्वेदी कम समय में दूसरी बार विधायक बने हैं। इस कारण संभावना कम ही नजर आ रही है। सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा, कोतमा विधायक सुनील सराफ, पुष्पराजगढ़ विधायक फुलेलाल सिंह मार्को पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।

कांग्रेस ने रीवा, सतना और सीधी को साधा
1998 के दौर में कांग्रेस ने रीवा, सीधी और सतना जिले को साधा। यहां से पांच मंत्री बने। जबकि अनूपपुर, कोतमा और शहडोल जिले को मिलाकर सिर्फ एक मंत्री बनाया गया बिसाहूलाल सिंह को। भाजपा में यह दावं उल्टा रहा। सबसे ज्यादा अनूपपुर, कोतमा और शहडोल को साधा गया।

कांग्रेस: ऐसा था 1998 का कार्यकाल
प्रदेश में दिग्विजय सरकार बनी। मनगवां से विजयी विंध्य के कद्दावर नेता श्रीनिवास तिवारी को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया। रीवा विधायक पुष्पराज सिंह, रीवा जिले के सिरमौर से निर्वाचित विधायक राजमणि पटेल, सतना विधायक सइद अहमद, सीधी जिले के चुरहट से विधायक अजय सिंह, सीधी विधायक इंद्रजीत पटेल और अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। पुष्पराज सिंह स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री, राजमणि पटेल योजना एवं सांख्यिकी, सइद अहमद वाणिज्यकर मंत्री, अजय सिंह पंचायत एवं ग्रामीण विकास-पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, इंद्रजीत पटेल कैबिनेट मंत्री शिक्षा व उच्च शिक्षा तथा बिसाहूलाल पीडब्ल्यूडी मंत्री थे।

भाजपा: 2003 से 2018 तक छू पाए आंकड़ा
2003 से 2018 तक भाजपा सरकार थी। शिवराज सरकार में भी विंध्य से 6 मंत्री बने। खासियत यह रही कि कांग्रेस ने पांच साल में 6 विधायकों को उपकृत किया जबकि भाजपा ने 15 साल में 6 विधायकों को मंत्री पद से नवाजा। इन 15 सालों में भाजपा से रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला खनिज एवं उद्योग मंत्री, सिंगरौली से चितरंगी विधायक जगन्नाथ सिंह शिक्षा और श्रम मंत्री, रामपुर बाघेलान विधायक हर्ष सिंह जलसंसाधन राज्यमंत्री, ब्योहारी विधायक लोकेश सिंह विधि-विधायी श्रम मंत्री, मीना सिंह महिला बाल विकास राज्यमंत्री, जय सिंह मरावी वन-राजस्व राज्यमंत्री तथा ज्ञान सिंह जनजाति विकास मंत्री बने थे।

दिग्गज हारे, कांग्रेस की सरकार बनी
विंध्य में दिग्गज जब भी हारे, पार्टी की सरकार बनी। 1993 में अजय सिंह ने भोजपुर से सुंदरलाल पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ा और हार गए। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। यही हाल 2018 के चुनाव में हुआ। फर्क सिर्फ इतना रहा कि इस बार वे अपनी सीट से ही हारे और प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी। कुछ यही हाल सुंदरलाल तिवारी का है। 2004 का लोस चुनाव तत्कालीन सांसद सुंदरलाल तिवारी हारे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी। 2018 में विधानसभा चुनाव हारे और प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी।