
World AIDS Day: disease increased through highway drivers
रमाशंकर शर्मा @ सतना। शहर से गुजरने वाले हाइवे क्रमांक-75 और 7 भले जिले के लिए आर्थिक जीवन रेखा हों, लेकिन यही जीवन रेखा ट्रक चालकों की लाइफलाइन भी खत्म करती जा रही है। जिले की एड्स नियंत्रण इकाई के आंकड़े हाइवे का एक स्याह पक्ष कमोवेश उजागर कर रहे हैं।
एड्स पीडि़तों की काउंसलिंग से जुड़े जिम्मेदार बताते हैं कि आमतौर पर यह देखने में आता है कि हाईवे से गुजरने वाले कई ट्रक ड्राइवर और सफर करने से संबंधित अन्य पेशों से जुड़े पुरुष असुरक्षित सेक्स कर एचआईवी संक्रमण के शिकार हो जाते हैं। जब यही पुरुष अपने घर जाते हैं, तो वहां भी एड्स फैलाते हैं।
जिससे दिनों-दिन एड्स रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। 2002 से आधिकारिक तौर पर डाटा संग्रहण कर रही एड्स नियंत्रण इकाई के मुताबिक अब तक जिले में एड्स पीडि़तों की संख्या 389 तक पहुंच चुकी है। चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि इस वर्ष एड्स पॉजिटिव पाए गये लोगों की संख्या गत वर्ष के बराबर 37 तक पहुंच चुकी है।
जबकि अभी साल खत्म होने में महीना भर बाकी है। जिले में 2002 से एड्स नियंत्रण के लिए आईसीटीसी (इंटीग्रेटेड काउन्सिलिंग एण्ड टेस्टिंग सेंटर) केन्द्र प्रारंभ है। जिला अस्पताल और मैहर सिविल अस्पताल में चल रहे इन केन्द्रों में संभावितों की एचआईवी जांच एवं काउंसलिंग का काम सतत तौर पर जारी है। इसमें सबसे अच्छी बात यह भी है कि अब सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव के पहले एचआईवी टेस्ट हो रहे हैं। नतीजा यह है कि कई महिलाओं को एड्स पॉजिटिव होने पर उनके बच्चों को इस जानलेवा बीमारी से बचाया जा चुका है।
15 बच्चे सुरक्षित
एड्स नियंत्रण इकाई ने एक बड़ी खुशखबरी दी है कि जिले में एड्स पीडि़त महिलाओं के जितने भी बच्चे हुए हैं सभी को उचित इलाज के सहारे एड्स से बचा लिया गया है। बताया गया कि एड्स पीडि़त महिलाओं से होने वाले बच्चों को नेब्रापिन सिरप जन्म के 72 घंटे के अंदर दिया जाता है और 12 सप्ताह तक इनका इलाज किया जाता है। जिससे ये एचआईवी पॉजिटिव होने से बच जाते हैं। इलाज उपरांत कराई गई जांच में सभी बच्चे एचआईवी निगेटिव पाये गये हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म
बताया गया कि आज एड्स से बचाव का इलाज मौजूद है। एड्स के चलते लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने लगती है। इनका इलाज एआरटी सेंटर में किया जाता है जो रीवा में है। इनके इलाज को सीडी 4 के नाम से जाना जाता है। जिले में एचआईवी पॉजिटिव पाए गये 94 फीसदी लोग एआरटी सेंटर में पहुंच कर अपना इलाज करा रहे हैं।
ट्रक ड्राइवर हैं बड़े एड्स वाहक
जिला एड्स नियंत्रण इकाई की माने तो यहां सर्वाधिक एड्स पॉजिटिव ट्रक चालक और शहर से बाहर रोजगार की तलाश में जाने वाले लोग है। इनमें भी सर्वाधिक संख्या ट्रक चालकों की है। इन सभी को एड्स की बीमारी शारीरिक संबंध बनाने पर मिली है। और इनके द्वारा यह रोग अपनी पत्नियों को भी दिया जा चुका है। इसके बाद का आंकड़ा ड्रग इंजेक्ट करने वालों का है। हालांकि इनकी संख्या ज्यादा नहीं है। एड्स पाजिटिव मिले लोगों के अनुसार 90 फीसदी को सेक्सुअल रिलेशन की वजह से यह बीमारी हुई है। इसमें एक फीसदी के लगभग समलैंगिक शामिल हैं। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण अभी तक एड्स का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
जिले के लिए खतरनाक हैं 506 महिलाएं
एड्स नियंत्रण इकाई ने एक एनजीओ द्वारा अधिकृत तौर पर किए गए सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर खतरनाक खुलासा किया है। बताया कि जिले में 506 महिलाएं वेश्यावृत्ति के पेशे में हैं और इनमें से कई एड्स रोग की वाहक हैं। इसी तरह से 165 पुरुष समलैंगिक हैं जिनमें से 2 एड्स पीडि़त हैं। ड्रग इंजेक्ट करने वालों की संख्या 245 है, लेकिन अभी अधिकृत तौर पर इनमें से किसी के एड्स पॉजिटिव होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
सेक्स वर्कर साबित हुए खतरनाक
एड्स पीडि़तों की काउंन्सिलिंग के बाद यह तथ्य सामने आया है कि सबसे ज्यादा खतरनाक सेक्स वर्करों के साथ शारीरिक संबंध बनाना साबित हुआ है। यह आंकड़ा 70 फीसदी तक है। इनमें से 60 फीसदी एड्स पीडि़त या तो अनपढ़हैं या कम पढ़े लिखे हैं।
दो महिलाओं की नादानी पड़ी भारी
जिले में दो महिलाएं ऐसी भी सामने आई हैं जिन्हें एड्स है लेकिन उनके पतियों को नहीं है। बेहतर काउंसिलिंग और परिवार के सहयोग से दोनों बेहतर जीवन जी रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली इन महिलाओं के अनुसार शादी के पहले हुए शारीरिक संबंधों से इन्हें एचआईवी मिला है। हालांकि अब उनका परिवार उनके साथ है।
हर साल 23 मरीज का औसत
विगत 15 साल के आंकड़ों को देखे तो 2002 से 2016 तक 352 एड्स पॉजिटिव सामने आए हैं। अर्थात हर साल औसत तौर पर 23 लोग एड्स की गिरफ्त में आए हैं। वहीं इस साल के आंकड़े को देखें तो जनवरी से अब तक कुल 37 एड्स पीडि़त सामने आ चुके हैं। अक्टूबर तक के इन आंकड़ों के आधार पर इस साल हर माह औसत तीन मरीज एड्स सामने आए।
इस साल संख्या बढ़ी
काउंसलर नीरज सिंह तिवारी के मुताबिक वर्ष 2017 में की गई कुल जांचों में जनवरी, फरवरी और मार्च में एक-एक एड्स पॉजिटिव सामने आए हैं। अप्रैल में 4, मई में 4, जून 9, जुलाई 4, अगस्त 3, सितंबर 2 और अक्टूबर में 3 एड्स पाजिटिव मिले। गर्भवती महिलाओं की स्थिति देखे तो जनवरी, मार्च, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर माह में 1-1 एचआईवी पॉजिटिव महिलाएं सामने आई हैं।
शर्माएं नहीं सामने आएं
एड्स काउंसलर नीरज सिंह तिवारी बताते हैं कि एड्स उतना भयावह नहीं है जितना बताया जाता है। इससे बचाव का इलाज आज मौजूद है। बशर्तें लोग सामने आकर जांच कराएं। उन्होंने बताया कि एड्स शारीरिक संबंध, ड्रग इंजेक्ट और ब्लड ट्रांसफ्यूजन से फैलता है। सबसे ज्यादा केस शारीरिक संबंधों के कारण सामने आते हैं। इसलिये सुरक्षित सेक्स संबंध के उपाय को उन्होंने बचाव का बेहतर तरीका बताया है।
जवानी में फिसलन पड़ी भारी
एड्स पॉजिटिव लोगों के आंकड़ों पर गौर करें तो 25 से 40 की उम्रवय लोग सर्वाधिक एड्स के शिकार हुए हैं। इनका प्रतिशत 70 है। वहीं 15 साल से कम्र उम्र वालों का प्रतिशत 3 फीसदी है। 50 वर्ष से ऊपर के एड्स पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 20 फीसदी है। इनमें से 98 फीसदी को शारीरिक संबंधों के कारण एड्स का रोग लगा है।
एचआईवी पॉजिटिव की स्थिति
वर्ष पुरुष महिला गर्भवती कुल
2002 08 02 00 10
2003 05 01 00 06
2004 05 01 00 06
2005 12 06 00 18
2006 32 15 00 47
2007 13 12 00 25
2008 22 11 01 33
2009 08 2 00 10
2010 15 8 00 23
2011 06 6 01 12
2012 18 14 01 33
2013 15 10 03 28
2014 08 11 00 19
2015 08 11 00 19
2016 21 15 02 38
योग ? 212 130 10 352
(स्रोत : एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्र, सतना)
Published on:
01 Dec 2017 11:31 am
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