
World Obesity Day
सतना. मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या के मामले में भारत दुनियाभर में तीसरे नंबर पर है। मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से शहरी इलाकों में मोटे बच्चों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा हो रहा है। इससे हमारा शहर भी अछूता नहीं। हमारे शहर के बच्चे बचपन से ओबेसिटी के शिकार हो रहे हैं। शहर के डॉक्टरों का कहना है कि अगर बच्चों की ओबेसिटी को कंट्रोल नहीं किया गया तो उन्हें मोटापे के साथ दिल की बीमारी होने की संभावना है। अब शहर के बच्चे अस्थमा, स्लीप पनिया जैसी प्राब्लम के भी शिकार हो रहे हैं। इसका रीजन मोटापा भी है।
बच्चों की तरफ बढ़ रहे खतरे
सीनियर मेडिसिन डॉक्टर अरविंद श्रीवास्तव कहते हैं कि मोटे और अधिक वजन के बच्चों पर बड़ी बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है। इनमें दिल की बीमारियां, स्ट्रोक, टाइप दो डायबिटीज, अस्थमा, स्लीप पनिया, हेपेटिक स्टेटोसिस और कई तरह के कैंसर के अलावा सामाजिक अवहेलना भी शामिल है। दिल की बीमारियों को भी विशेष रूप से मोटापे से जोड़ा जाता है। हाई ब्लडप्रेशर, टाइप दो डायबिटीज और हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियां बड़ों के साथ अब बच्चों में भी पैर पसार रही हैं। इसका मुख्य कारण मोटापा है। हर साल के शहर के कई बच्चों में अस्थमा, दिल संबंधी समस्या और स्ट्रोक की समस्या देखने को मिलती है।
पैरेंट्स को देना होगा ध्यान
पैरेंट्स अपने बच्चों को तंदुरुस्त देखना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें बच्चों के जरूरत से ज्यादा बढ़ते वजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हर बच्चे की लंबाई के हिसाब से उसके वजन का एक सही आंकड़ा होता है। बीएमआई रेट पूरी तरह से सही वजन का पैमाना नहीं है परंतु इस पर नजर रखकर बच्चे के वजन को करीब-करीब सही रखा जा सकता है और उसे खतरनाक मोटापे से बचाया जा सकता है। खानपान की गलत आदतों पर सुधार लाने की कोशिश करें।
व्यायाम पर दें ध्यान
मोटापे से बचने के लिए बच्चे के साथ योगा, व्यायाम या जिम में एक्सरसाइज करने के लिए सप्ताह में कम से कम दो बार समय अवश्य निकालें। इसके अलावा परिवार के साथ पैदल चलना, साइकिल चलवाना, मोटापा से बचने और निपटने के लिए यह बेहद फ ायदेमंद साबित होंगे।
Published on:
11 Oct 2019 09:54 pm
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