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Year ender-2019: राहत के सपनों को नहीं लगे पंख, तंगी में गुजरा साल

यादों में 2019: कर्जमाफी और किसान सम्मान निधि ने पोछे अन्नदाता के आंसू, फसल नुकसानी का नहीं मिला मुआवजा, अटका रहा गेहूं का बोनस

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Year ender-2019: No compensation for crop losses, wheat bonus stuck

Year ender-2019: No compensation for crop losses, wheat bonus stuck

सतना/ वर्ष 2019 किसानों के लिए कुछ खास नहीं रहा। सरकार की कर्जमाफी और किसान सम्मान निधि योजना ने अन्नदाता के आंसू पोंछे तो अतिवृष्टि और सूखे की मार के कारण खराब हुई फसल का मुआवजा अभी तक नहीं मिल पाया। गेहूं का बोनस भी किसानों के खाते में नहीं पहुंचा। हां, बिजली बिल को लेकर सरकार ने किसानों को कुछ आंशिक राहत जरूर पहुंचाई। इन सबके बीच बैंक के वसूली नोटिस ने किसान की जान ले ली तो पूर्व मुख्यमंत्री ने रीवा में बिलों की होली जलाकर माहौल गर्म कर दिया था। आवारा पशु सालभर किसानों के लिए मुसीबत बने रहे। सरकार वादे के अनुसार गौशालाएं नहीं बनवा पाईं।

सतना: 160 रुपए किलो बिका प्याज फिर भी खेती नहीं बन पाई लाभ का धंधा
गुजरता साल 2019 खेती और जिले के किसानों के लिए लाभकारी नहीं रहा। सालभर किसान आर्थिक तंगी से जूझते रहे। प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे किसानों को सरकार भी कोई राहत नहीं दे सकी। कांग्रेस ने अपने चुनावी वचन पत्र में किसानों को राहत देने की कई घोषणाएं की लेकिन साल बीतने के बाद भी वह धरातल पर नजर नहीं आई। कर्ज में डूबे किसानों का साल कर्जमाफी और गेहूं की बोनस राशि खाते में आने का इंतजार करते गुजर गया। न कर्ज माफ हो पाया और न बोनस मिला। इस वर्ष सब्जियों के दामों ने उपभोक्ताओं को खूब रुलाया। महंगाई के सभी रिकार्ड तोड़ते प्याज तो 160 रुपए तक बिका। इसके बाद भी न किसानों की माली हालत सुधरी और न खेती लाभ का धंधा बन पाई। साल के अंत में किसानों को यूरिया संकट से जूझना पड़ा। 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली और पंपों का बिजली बिल हाफ योजना लागू होने से किसानों को बिल में थोड़ी राहत जरूर मिली।

रीवा: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करवाने में रहे असफल
साल 2019 किसानों के लिए आंसू पोंछने वाला रहा। सरकार की कर्जमाफी योजना से राहत मिली तो सम्मान निधि व पेंशन योजना ने नई आस जगाई। हालांकि अपनी फसल की कीमत निर्धारित करने का अधिकार मांगने वाले किसान इस साल भी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करवाने में असफल रहे। आजादी के बाद से प्रतिदिन 65 रुपए औसत आय से अपने परिवार का पेट भरने वाले अन्नदाता को सरकार ने सम्मान निधि व पेंशन का अधिकार देकर आंसू पोंछने काम किया। सात लाख किसानों को सम्मान निधि दी जानी है। अभी 1 लाख 81 हजार किसानों की ही पात्रता तय हो पाई। इनमें से 20 हजार किसानों को सम्मान निधि मिली भी। मातृधन पेंशन योजना में किसानों की भागीदारी पर तीन हजार पेंशन का अधिकार मिला, लेकिन अभी किसान चयनित नहीं हो पाए। आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या से किसान खेती छोडऩे को मजबूर रहे तो हर पंचायतों की जगह जिले में महज दो जगह गौशाला खुल पाई। लगातार प्राकृतिक आपदा से कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को उबारने सरकार की कर्जमाफी योजना की उम्मीद अभी बाकी है। जय किसान ऋण माफी में 83490 किसानों ने आवेदन किया, इसमें 36427 किसानों का 50 हजार तक का ऋण माफ हुआ। 47 हजार किसानों को अभी ऋणमाफी का इंतजार है। 33 हजार से अधिक किसानों को उपार्जन पर मिलने वाले बोनस का भी इंतजार है।

पन्ना: खाद-बीज का बना रहा संकट
जिले का किसान सालभर प्राकृतिक प्रकोप झेलता रहा। साल के शुरुआती महीने में गेहूं-चने की फसल सूखे के प्रभाव से नष्ट हो गई और अन्नदाता को कर्ज का बोझ उठाना पड़ा। जुलाई-अगस्त में बोई गई उड़द और तिली की 80 फीसदी से अधिक फसल अतिवृष्टि से नष्ट हो गई। मूंग और सोयाबीन को भी 50 से 60 फीसदी नुकसान हुआ। किसानों को अभी तक न सूखे का मुआवजा मिल पाया, न अतिवृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई हो पाई। किसानों के ऋणमाफी का मसला भी साल चर्चा में रहा लेकिन लाभ गिनती के किसानों को ही मिल पाया। इधर, जिले के किसानों की बदहाली को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही सालभर राजनीति करते नजर आए। कांग्रेस नेता केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर सहानुभूति लूटते रहे तो भाजपा ने प्रदेश सरकार को घेरा। भाजपा सांसद वीडी शर्मा ने तो चार नवंबर को प्रदेशव्यापी किसान आक्रोश आंदोलन कर डाला। इसमें बिजली के बिलों को जलाने के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पानी डाले जाने का मामला गर्मा गया था। इसके अलावा खाद-बीज के संकट से भी किसान जूझते रहे।

सीधी: मिट्टी परीक्षण केंद्र की सौगात
साल 2019 किसानों के लिए कुछ खास नहीं रहा। प्राकृतिक आपदा ने अन्नदाता को हर कदम पर छला तो बतौर सौगात प्रत्येक विकासखंड को मिट्टी परीक्षण केंद्र मिला। खरीफ सीजन में अल्पवर्षा के कारण किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए तो रबी में जब बुवाई का समय आया, बेमौसम हुई बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी। यही कारण है कि इस सीजन में बुवाई का रकबा घट गया। प्राकृतिक आपदा की घड़ी से निपटने के लिए किसानों ने फसल बीमा कराया पर दो वर्ष से किसानों को फसल बीमा का एक रुपए का भी लाभ नहीं मिला। स्थिति यह है कि 1.73 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा कराने के बाद भी जिले के अन्नदाता को बीमित राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा। इससे इतर कुसमी, मझौली, रामपुर नैकिन व सिहावल ब्लाक में मिट्टी परीक्षण केंद्र खुलने से किसान अपनी जमीन की मिट्टी का परीक्षण कराकर जान सकता है कि उसकी मिट्टी में किस पोषकतत्व की कमी है।

सिंगरौली: न अतिवृष्टि और न सूखे की मार
उर्जाधानी के किसानों के लिए वर्ष 2019 बड़ी उपलब्धि देने वाला रहा। जिले के लिए रिहंद सिंचाई परियोजना को शुरू करने की शासन से न केवल मंजूरी मिली, बल्कि इसको लेकर कागजी खानापूर्ति पूरी कर ली गई। इस सिंचाई परियोजना से खासतौर पर मांड़ा व सिंगरौली तहसील के किसानों को फायदा मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक 38000 हेक्टेयर रकबे में इस परियोजना से सिंचाई हो सकेगी। अभी तक यहां के किसानों की फसल बारिश और छोटे-मोटे बांधों के भरोसे रहती रही है। माना जा रहा कि अगले वर्ष किसानों को परियोजना का लाभ मिलने लगेगा। इधर, जिले के कर्सुआलाल व खैराही सहित आस-पास के गांवों के किसानों को छोड़ दिया जाए तो यह वर्ष खेती की दृष्टि सुखद रहा। यहां न अतिवृष्टि का असर रहा और न सूखे की मार। यह बात और रही कि एस्सार के ऐश डैम फूटने से कर्सुआलाल व खैराही सहित कुछ गांवों के किसानों की फसल जरूर तबाह हुई। कई किसानों को इसका असर खरीफ के बाद रबी में भी झेलना पड़ रहा। शासन की ऋणमाफी योजना का लाभ करीब साढ़े 12 हजार किसानों को मिला। इन किसानों के 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक का कर्जमाफ हो गया। बाकी रह गए किसानों के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू की गई है।