सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर बाघ परियोजना से विवादों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। गत दिनों जहां तालड़ा रेंज में वनकर्मी द्वारा अवैध वसूली का मामला सामने आया था। वहीं अब एक नए विवाद में भी तालडा रेंज का नाम सामने आ रहा है। दरअसल वन विभाग की ओर से हाल ही में रणथम्भौर की तालड़ा रेंज का एक वीडियो सामने आया था। जो कि काफी चर्चाओं में रहा था। जिसके बाद वन तालड़ा रेंज के बाढ़ बिरौली प्लांटेशन चर्चाओं में है। यहां दो साल पहले 15 हजार पौधों का प्लांटेशन लगाया था। जिसमें फिलहाल 500 से भी कम पेड बचे है। जबकि प्लाटेंशन के नाम पर सरकार के लाखों रुपए का बजट पास हुआ था। इन सबके बावजूद वन विभाग इन पेड़ो के नहीं बचा सका। वन विभाग के प्लांटेशन में पेड़ों की नहीं बच पाना। वन विभाग की वन संरक्षण की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
25 लाख की थी लागत
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की तालड़ा रेंज में एक प्लाटेंशन का काम करवाया था। करीब 25 लाख रुपए की लागत से प्लांटेशन लगाया था। इस प्लांटेशन में करीब 15 हजार पौधे रोपे गए थे। इन पौधों की देखभाल और सार संभाल के लिए वन विभाग की ओर से तीन वनकर्मियों की ड्यूटी भी लगाई थीए लेकिन वन विभाग की उदासीनता के चलते इन 15 हजार पौधों को नहीं बचाया जा सका है। फिलहाल इस प्लांटेशन में सिर्फ 500 पौंधे बचे है। वन बचाने की दुहाई देने वाला वन विभाग खुद के बनाए प्लांटेशन को ही नहीं बचा सका। यह वन विभाग के वन संरक्षण की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
इनका कहना है…
मामला पुराना है। मेरी हाल ही में तबादला हुआ है। मुझे पूरी जानकारी नहीं है। मामले की पूरी जानकारी करवाने के बाद ही कुछ कह सकता हूं।
– मोहित गुप्ता, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।