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मधुमक्खी पालन सेे किसान बने आत्मनिर्भर

— 40 से शुरूआत, अब तैयार हैं 300 बॉक्स कम लागत में अधिक मुनाफा पाने के लिए मधुमक्खी पालन फायदे का सौदा साबित हो रहा है। सवाईमाधोपुर जिले के पीपलवाड़ा गांव में भैरूलाल माली इस व्यवसाय से सालाना 13 लाख रुपए तक आमदनी ले रहे हैं।

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मधुमक्खी पालन सेे किसान बने आत्मनिर्भर

मधुमक्खी पालन सेे किसान बने आत्मनिर्भर

युवा हो रहे प्रेरित
करीब आठ साल पहले किसान ने 40 बॉक्स से यह व्यवसाय शुरू किया। अब उनके पास 300 बॉक्स तैयार हैं। वे इससे शहद निकालने का काम कर रहे हंै। शहद को यूपी व भरतपुर भेजा जाता है। इससे प्रेरित हो स्थानीय युवाओं में भी रोजगार की नई उम्मीदे जगने लगी हैं।

वर्ष में 25 किलो शहद
एक बॉक्स में सालाना करीब 25 से 30 किलो तक आसानी से शहद निकल जाता है। सरसों व धनिये की फसल में मधुमक्खी के बैठने से सबसे ज्यादा फायदा होता है।

नेशनल बी बोर्ड से लिया प्रशिक्षण
किसान ने भारत सरकार के नेशनल बी बोर्ड से प्रशिक्षण लिया। इटावा, खातौली सहित यूपी में मधुमक्खी पालन करना सीखा था। इसके बाद से लगातार इस व्यवसाय में जुटे हैं। वे स्वयं भी अब दर्जन भर युवाओं को भी इसका प्रशिक्षण दे रहे हैं।

शहद के साथ फ सल उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी
जिस क्षेत्र में मधुमक्खी पालन होता है, वहां आसपास फ सलों के उत्पादन में 40- 45 प्रतिशत बढ़ोतरी हो जाती है। खेतों में फसल पर बैठने वाली मधुमक्खियां एक फूल से दूसरे फूल पर परागकण छोड़ देती हैं।

इनका कहना है...
जिले में मधुमक्खी पालन व्यवसाय में अपार संभावनाएं है। इस व्यवसाय पर 40 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान देय है। — चन्द्रप्रकाश बड़ाया, सहा.निदेशक, उद्यान विभाग, सवाईमाधोपुर

सुभाष मिश्रा — सवाईमाधोपुर