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भगवतगढ़ का चिकित्सालय मानवता की मिसाल की दिलाता है याद

ह्यूमन एंगल....राधारानी मरने के बाद भी दे गई थी तीन लोगों को जीवन

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भगवतगढ़ का चिकित्सालय मानवता की मिसाल की दिलाता है याद

भगवतगढ़ का चिकित्सालय मानवता की मिसाल की दिलाता है याद

सवाईमाधोपुर. भगवतगढ़ में राधारानी के नाम से संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हर किसी को मानवता की मिसाल की याद दिलाता है। यह मिसाल राधारानी के परिजनों ने 6 साल पहले पेश की थी लेकिन राधा के नाम से संचालित यह चिकित्सालय राधारानी के नाम को अमिट बनाए हुए है।अंधविश्वास के माहौल के बीच राधा के परिजनों ने मानवता की जो मिसाल पेश की थी, उससे तीन लोगों को नया जीवन मिल सका था। मतलबी दुनिया के दौर में राधा के परिजनों की यह मिसाल अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायी बनी हुई है।

भगवतगढ़ निवासी राधारानी लगभग 6 साल पहले ऊंचाई से गिरकर घायल हुई थी और उसे 22 फरवरी को पोलीट्रोमा आईसीयू में भर्ती कराया गया। चिकित्सक अपने भरसक प्रयासों के बाद भी उसका जीवन बचा नहीं पाए और चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उस समय राधारानी की आयु महज 14 साल थी। इसके बाद मोहन फाउण्डेशन जयपुर सिटीजन फोरम के सदस्यों की समझाइश पर परिजन राधा के अंग दान करने पर सहमत हो गए।
14 साल की किशोरी राधारानी की दो किडनी व एक लीवर का दान परिजनों ने करके एक महान मिसाल पेश कर दी। इन अंगों से तीन लोगों को नया जीवन मिल गया।

250 बार डायलिसिस कराने के बाद एक किडनी शकुन्तला के पति सुरेश शर्मा को, दूसरी सिरसी रोड़ निवासी 47 वर्षीय बृज किशोर को लगाई गई तो उनका जीवन बच गया। लीवर को दिल्ली के आर्मी के रिसर्च एंड रैफरल अस्पताल में सैन्य अधिकारी की पत्नी के ट्रांसप्लांट करने के लिए प्लेन के जरिए जयपुर से भेजा गया था। राधा के परिजनों द्वारा अंग दान की इस घोषणा से तत्कालीन चिकित्साा मंत्री काफी प्रभावित हुए। उन्होंने न केवल परिजनों के निर्णय को सराहते हुए उनका सम्मान किया बल्कि भगवतगढ़ गांव के चिकित्सालय का नामकरण राधारानी के नाम से कर दिया गया। ये नाम राधा के नाम को अमिट बनाने के साथ मानवता की प्रेरणा देता रहता है। अमूमन लोग चिकित्सालय के नाम को धार्मिक दृष्टि से जोड़कर देखते हैं लेकिन असल में ये नाम उस 14 साल की राधारानी का है, जिसने अपना जीवन तो नहीं जीया लेकिन तीन के लिए जीवनदान देकर दुनिया से चली गई।

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