सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में वर्तमान में बाघ-बाघिनों पर खतरे के बादल मण्डरा रहे हैं और रणथम्भौर से लगातार बुरी खबर सामने आ रही है। करीब दो सप्ताह पहले रणथम्भौर में बाघ टी-57 की मौत के बाद मंगलवार को रणथम्भौर की फलौदी रेंज में बाघिन टी-114 व उसके एक शावक का शव मिला था। वहीं कुछ दिन पूर्व ही रणथम्भौर की खण्डार रेंज में एक सांभर के शिकार का मामला भी सामने आया था। वहीं बाघिन और एक शावक की मौत के बाद वन विभाग की ओर से बाघिन के शेष बचे दो शावकों को वन विभाग ने नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी (एनटीसीए) से अनुमति लेकर कोटा के अभेडा बॉयोलोजिकल पार्क में भेजा गया है। ऐसे में यह दूसरा मौका है जब रणथम्भौर से किसी बाघ या शावक को बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया है। इससे पहले रणथम्भौर के खूंखार बाघ उस्ताद यानी टी-24 को भी बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था।
मार्च 2015 में पहली बार उस्ताद को भेजा था
रणथम्भौर के प्रसिद्ध बाघ टी-24 यानी उस्ताद को रणथम्भौर से टे्रकुंलाइज कर उदयपुर के सज्जनगढ़ बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था। दरअसल उस्ताद ने एक वनकर्मी के सहित चार लोगों पर हमला कर उनकी जान ले ली थी। इसके बाद वन विभाग ने बाघ को मानव के लिए खतरा मानकर उसे रणथम्भौर से बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट किया था।
कोर्ट तक पहुंचा था मामला
उस्ताद को बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट करने का वन्यजीव प्रेमियों की ओर से पुरजोर विरोध किया गया था। उस्ताद को बॉयोलोजिकल पार्क से वापस जंगल में शिफ्ट करने की मांग को लेकर न्यायालय में रिट भी दायर की गई थी। इसके बाद बीच में उस्ताद को कुंभलगढ़ अभयारण्य में एनक्लोजर तैयार करके उसमें रखने की बात भी सामने आई थी हालांकि फिर यह हो नहीं सका और बाद में करीब आठ साल तक बॉयोलोजिकल पार्क में कैद में रहने के बाद 28 दिसम्बर 2022 को उदयपुर के बॉयोलोजिकल पार्क में उस्ताद की मौत हो गई थी।
टी-104 को भी बॉयोलोजिकल पार्क भेजने का था प्रस्ताव
वर्तमान में करीब तीन साल से रणथम्भौर के भिड नाके पर बने एनक्लोजर में कैद बाघ टी-104 को भी रणथम्भौर से किसी बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट करने का प्रस्ताव बना था। दरअसल टी-104 ने भी उस्ताद की ही तरह चार लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद से ही वन विभाग की ओर से बाघ टी-104 को एनक्लोजर में रखा जा रहा है। बीच में बाघ को मुकुंदरा में बने एनक्लोजर में भी शिफ्ट करने की बात सामने आई थी। इसके लिए पीसीसीएफ की ओर से प्रस्ताव भी तैयार किए गए थे लेकिन अभी तक एनटीसीए की ओर से अनुमति नहीं मिलने के कारण टी-104 को रणथम्भौर से शिफ्ट नहीं किया जा सका है।
वन विभाग की यह है योजना
वन अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में शावक काफी छोटे है और उन्हें विशेष देखभाल की दरकार है जो कि जंगल में संभव नहीं है। ऐसे में फिलहाल एहतियात के तौर पर शावकों को बॉयोलोजिकल पार्क में भेजा गया है। यदि ये शावक वहां पर सरवाइव कर लेते हैं तो भविष्य में वन विभाग की ओर से दोनों शावकोंं को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरा क्षेत्र में शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा।
एक्सपर्ट व्यू…
अभी शावक काफी छोटे है ऐसे में जंगल में शावकों की जान को भी खतरा रहता। बॉयोलोजिकल पार्क में शावकों की बेहतर देखभाल हो सकेगी। ऐसे में वन विभाग की ओर से शावकों को बॉयोलिकल पार्क में भेजने का फैंसला उचित है।
– आरएन महरोत्रा, पूर्व पीसीसीएफ, जयपुर।