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सवाई माधोपुर

चम्बल अभयारण्य बनता जा रहा पर्यटन हब

पर्यटक को लुभा रहे घडिय़ाल व मगरमच्छ दस बोटों में कराई जा रही सफारी

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सवाईमाधोपुर. जिले को यूं तो रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के कारण बाघों की नगरी के नाम से जाना जाता है। बड़ी संख्या में यहां देशी विदेशी पर्यटक बाघों के दीदार के लिए आते है लेकिन अब रणथम्भौर के साथ- साथ जिले में वाटर ट्यूरिज्म भी फल फूल रहा है। वन विभाग की ओर से राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में भी पर्यटकों को बोटिेंग कराकर घडिय़ा व मगरमचछ की सफारी कराई जा रही है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग को पर्यटकों की ओर से अच्डा रेस्पांस भी देखने को मिल रहा है। और यहां भी भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में धीरे-धीरे सवाईमाधोपुर के पालीघाट स्थित राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य भी जिले का दूसरा पर्यटन हब बनता जा रहा है।
विभाग को हो रही प्रतिदिन एक लाख की आय
वन अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल विभाग की ओर से यहां भ्रमण पर आने वाले वाले भारतीय पर्यटक से 545 व विदेशी पर्यटक से 958 रुपए भ्रमण शुल्क वसूल किया जा रहा है। प्रतिदिन यहां करीब 100 पर्यटक भ्रमण पर पहुंच रहें है। ऐसे में विभाग को प्रतिदिन करीब एक लाख की आय हो रही है। वहीं वीकेंउ पर पर्यटकों की आवक अधिक होने से इसमें और भी इजाफा हो जाता है।
दस बोटो से कराई जा रही बोटिंग
फिलहाल वन विभाग की ओर से चंबल अभयारण्य में दस बोटो से पर्यटकों को वाटर सफारी कराई जा रही है। इसके लिए विभाग की ओर से पूर्व में टेण्डर किए गए थे। वन अधिकारियों ने बताया कि विभाग की ओर से भविष्य में पर्यटकों की आवक अधिक होने पर बोट की संख्या में भी इजाफा किया जाएगा।
जल्द शुरू होगा क्रूज का संचालन
इतना ही नहीं पर्यटकों को अब जल्द ही क्रूज से चंबल सफारी का लुत्फ उठाते हुए भी देखा जा सकेगा। इसके लिए सरकार व वन विभाग की ओर से गंगा नदी की तर्ज पर छोटे कू्रज का संवालन शुरू करने की योजना बनाई ई है। कई निजी कंपनियों के साथ इस संबंध में वार्ता भी की जा रही है। ऐसे में अब जल्द ही चंबल में क्रूज संचालन शुरू होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
दस से अधिक टेंट लगाए
पूर्व में जहां चंबल में पर्यटकों के लिए महज एक या दो टेंट ही हुआ करते थे वहीं अब वन विभाग की ओर से टेंट को बढ़ाकर दस कर दिया गयाहै। इसके अलावा विभाग की ओर से चंबल अभयारण्य को प्रचारित करने के लिए रणथम्भौर की तर्ज पर गाइड जैकेट आदि भी बनवाई गई है।
विक सित हो रही होटल इण्ड्रस्ट्री
वन विभाग की ओर से चंबल में पर्यटकों के लिए बोटिंग की सुविधा को शुरू करने और चंबब अभयारण्य में पर्यटकों की आवक शुरू होने के साथ ही अब यहां होटल इण्ड्रस्ट्री भी विकसित होने लगी है। पूर्व में जहां इस मार्ग पर एक भी होटल या मोटल नहीं थे वहीं अब यहां कई होटल तैयारहो चुके है और कई का निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में यहां पर्यटन शुरू होने से धीरे-धीरेरोजगार के अवसरों में भी इजाफा हो रहाहै।
गंगा के बाद सबसे अधिक घडिय़ाल चंबल में
जिले के राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में गंगा के बाद सर्वाधिक घडिय़ाल चंबल नदी में पाए जाते है। सवाईमाधोपुरके साथ-साथ बूंदी, कोटा,धौलपुर , करौली का क्षेत्र भी अभयारण्य के हिस्से आता है। सवाईमाधोपुर में नदी के बीच में टापू बना हुआ है। ऐसे में यहां जलीय जीव पानी में तैरने के साथ-साथ टापू पर अरामभी करते है। जो पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं।
तीन राज्यों से होकर गुजरता है
राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य देश का एक मात्र ऐसा जलीय अभयारण्य है तो राजस्थान, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश तीन राज्यों से होकर गुजरता है। इसके कोर एरिया में 400 किमी लम्बी चंबल नदी आती है। ऐसे में यहां पर्यटन की अपार संभावनाए हैं। इसके अलावा परालीघाट पर चंबल, पार्वती व सीप नदी का त्रिवेणी संगम भी होता है।
क्यों खास है चंबल अभयारण्य…
1978 में हुई स्थापना।
400 किमी लम्बी चंबल नदी आती है कोर एरिया में
2176 घडिय़ाल है अभयारण्य में
866 मगरमच्छ है अभयारण्य में
83 डॉल्फिन है अभयारण्य में
इनका कहना है…
चंबल घडिय़ाल अभयारण्य को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करने की योजना है। फिलहाल यहां पर्यटकों के लिए बोटिंग की सुविधा को शुरू किया गया है। जल्द ही यहां पर्यटकों के लिए कई अन्य प्रकार की सुविधाओं को भी विकसित किया जाएगा।
– अनिल यादव, उपवन संरक्षक, राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य, सवाईमाधोपुर।
एक्सपर्ट व्यू…
चंबल में पर्यटन की अपार संभावनाए हैं, वन विभाग को इस ओर ध्यान देकर इसे विकसित करना चाहिए। इससे पर्यटन बढऩे के साथ-साथ जलीय जीवों का संरक्षण भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।
– बृजेश विजयवर्गीय, अध्यक्ष,राष्ट्रीय जल बिरादरी समिति, कोटा